पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा की प्रतिक्रिया : 'खोदा पहाड़ निकली चुहिया’ जैसा बजट, सीएम के भाषण में सिर्फ निराशा
- हरियाणा के बजट पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने दी तीखी प्रतिक्रिया
- भूपेंद्र हुड्डा बोले- मनोहर लाल के बजट में सिर्फ आंकड़ों की जादूगरी
- बजट से भ्रमित हो गए हरियाणा के लोग, बजट भाषण में सिर्फ निराशा
विस्तार
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रदेश सरकार के बजट पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के ढाई घंटे लंबे बजट भाषण में किसान, मजदूर, कर्मचारी, कारोबारी और गृहिणी समेत किसी भी वर्ग के लिए राहत या मदद की घोषणा नहीं की। हुड्डा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने जानबूझकर बजट भाषण को लंबा खींचा ताकि, आंकड़ों की जादूगरी कर लोगों को भ्रमित कर सके। बजट का हाल ‘खोदा पहाड़ निकली चुहिया’ जैसा रहा।
हरियाणा भवन में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में हुड्डा ने कहा कि सरकार की तरफ से बार-बार शिक्षा और कृषि का बजट बढ़ाने का दावा किया गया। जबकि, सच ये है कि इनका बजट बढ़ाने के बजाय कम किया गया है। शिक्षा के बजट में टेक्निकल एजुकेशन को जोड़कर जनता को भ्रमित करने की कोशिश की गई है। सरकार की नीतियों के चलते आज प्रदेश की वित्तीय स्थिति नाजुक हो गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार लगातार प्रदेश को कर्ज में डुबोती जा रही है। इस बार के बजट भाषण में कर्ज के आंकड़ों को स्पष्ट तौर पर नहीं बताया गया। जाहिर है कि सरकार अपनी नाकामी को उजागर करने से हिचकिचा रही है। हुड्डा ने कहा कि बजट का सबसे निराशाजनक पहलू ये है कि इसमें ना कोई विजन दिखा और ना ही अपने चुनावी घोषणाओं को पूरा करने की कोशिश नजर आई। बुढ़ापा पेंशन में महज 250 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। जबकि, जेजेपी ने बीजेपी के साथ बुढ़ापा पेंशन 5100 रुपए करने की शर्त पर गठबंधन किया था।
नेता प्रतिपक्ष ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने सरकार को बुढ़ापा पेंशन बढ़ाने, गरीबों, किसानों और छोटे कारोबारियों को मंदी से उबारने के लिए आर्थिक मदद देने समेत कई मांगे की थी लेकिन उनकी मांगों को बजट में शामिल नहीं किया गया। कामगारों के साथ सरकार ने बजट में बेरोजगारों की भी अनदेखी की है। नई उद्योग नीति में सरकार ने बड़े-बड़े लक्ष्य रखे हैं।
पिछली नीति के आंकड़े बताते हैं कि सरकार पांच साल में निवेश का सिर्फ 24 प्रतिशत और रोजगार सृजन का सिर्फ आठ प्रतिशत लक्ष्य ही हासिल कर पाई। हरियाणा रिहायशी सर्टिफिकेट के नियमों में फेरबदल से प्रदेश में बेरोजगारी का संकट और गहराने वाला है। 15 साल की शर्त को कम करके पांच साल करने से मूल हरियाणवियों को भारी नुकसान होगा। इसलिए सरकार को बिना देरी इस फैसले को वापस लेना चाहिए।