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पिछले दोनों बजट में खाली रहे पंजाब के हाथ, इस बार काफी उम्मीदें, क्या पूरी होंगी ये मांगें

Fri, 31 Jan 2020 12:28 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 31 Jan 2020 12:28 AM IST
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Budget 2020: Punjab has many expectations from Budget 2020
बजट पेश करतीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : पीटीआई (फाइल फोटो)

एक फरवरी को संसद में पेश होने वाले वर्ष 2020-21 के आम बजट से पंजाब ने भी बड़ी उम्मीदें लगाई हैं। हालांकि बीते दो बजट पंजाब के लिए निराशाजनक साबित हुए थे। 2017-18 के आम बजट में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर न कुछ सस्ता न कुछ महंगा और कोई बड़ी योजना के बिना पंजाब को मायूस कर गया वहीं, वर्ष 2019-20 के आम बजट में भी पंजाब की लंबे समय से चली आ रही अधिकांश मांगें लंबित ही रहीं।

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इसमें पंजाब को एक बड़ी राहत शराब की लाइसेंस फीस को लेकर मिली, जिसमें लाइसेंस फीस पर लग रहा 18 फीसदी जीएसटी हटा लिया गया था। वैसे बीते साल आम बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब के वित्त मंत्री ने कहा था कि केंद्र का बजट किसी वर्ग की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा।
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पंजाब की कांग्रेस सरकार के लिए बीता साल केंद्र के साथ बहुत अच्छे संबंधों वाला नहीं साबित हुआ क्योंकि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल और अन्य मंत्री भी विभिन्न विकास योजनाओं को लागू करने और पुरानी योजनाओं की बकाया राशि जारी करवाने के लिए बार-बार दिल्ली के चक्कर लगाते रहे और प्रधानमंत्री के अलावा संबंधित मंत्रालयों के मंत्रियों के साथ बैठकें करते रहे। 
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पंजाब सरकार इसे लेकर मायूस है कि केंद्र सरकार द्वारा ज्यादातर मामलों और राज्य सरकार द्वारा उठाई गई मांगों पर कोरे आश्वासन ही दिए जाते रहे। इधर, वित्त मंत्री मनप्रीत बादल भी केंद्र द्वारा जीएसटी के स्टेट शेयर की अदायगी में देरी को लेकर साल भर खासे नाराज रहे। दिसंबर में उन्होंने केंद्र के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने तक ही चेतावनी दे डाली थी। केंद्र में भाजपा और राज्य में कांग्रेस की सरकार के बीच साल भर दिखाई दी तालमेल की कमी के चलते पंजाब शनिवार को पेश हो रहे आम बजट को लेकर आशावान तो है लेकिन उत्साहित नहीं है।

बजट से यह हैं पंजाब की उम्मीदें

रेलवे:  सरहदी जिलों में ढांचागत विकास के लिए केंद्रीय परियोजनाओं की मांग राज्य सरकार द्वारा की जाती रही है। बजट में देश की सीमा से सटे राज्यों के इलाकों के विकास को लेकर अलग से घोषणा पिछले बजट में भी नहीं की गई। पंजाब के सरहदी जिलों में रेलवे के विस्तार की मांग लंबे समय से की जा रही है। 

इनमें पठानकोट-गुरदासपुर रेलवे लाइन को डबल करने, गुरदासपुर जिले के अंतर्गत आने वाले रेलवे स्टेशनों को अपग्रेड करने, फिरोजपुर से चंडीगढ़ ट्रेन को फाजिल्का से चलाने, फाजिल्का से हरिद्वार के लिए सीधी ट्रेन, जलालाबाद-मुक्तसर नई रेल लाइन, जालंधर व जालंधर कैंट स्टेशनों के आधुनिकीकरण, फरीदकोट में छह रेलवे ओवरब्रिज बनाने की मांग, राजपुरा-मोहाली रेल लाइन का बाकी 14 किमी. हिस्सा पूरा कर चंडीगढ़ को सीधे मालवा से जोड़ने की मांगों के अलावा मोगा-कोटकपूरा, नवांशहर-अमृतसर नई रेल लाइन की मांग अब तक लंबित है।

उद्योग:  पंजाब में साइकिल, होजिरी, लोहा इंडस्ट्री लंबे समय से करों में राहत की मांग करती रही है। इस दौरान पंजाब सरकार भी केंद्र के समक्ष यह मांग बार-बार उठाती रही है कि पड़ोसी हिमाचल प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने के बाद से पंजाब के उद्योग हिमाचल स्थानांतरित होने लगे हैं। इसके चलते सूबे की सरकार पंजाब को भी विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग करती रही है। पंजाब से उद्योगों का पलायन रोकने और नए उद्योगों का आगमन प्रशस्त करने को लेकर बजट में पंजाब केंद्र से सकारात्मक सहयोग की उम्मीद कर रहा है।

कृषि: पंजाब में छोटी होती जोत, फसलों को न्यूनतम मूल्य में अपेक्षाकृत वृद्धि नहीं होने और कर्ज में डूबे किसानों की कर्ज माफी सबसे बड़ा मुद्दा है, जिसमें राज्य सरकार अपनी कर्ज माफी योजना में केंद्र से सहयोग की मांग करती रही है। पिछले साल केंद्रीय बजट में मोदी सरकार ने देश के किसानों को लाखों रुपये के कर्ज मुहैया कराने के लिए इस मद में पैसा बढ़ाया लेकिन पूरे बजट में किसानों के पिछले कर्ज माफ करने को लेकर कोई जिक्र नहीं किया। 

पंजाब में किसानों की कर्ज माफी के वादे को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने अपने स्तर पर काम किया है, जिसमें केंद्र ने उसे कोई मदद नहीं दी है। इसके अलावा फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भी पंजाब केंद्र द्वारा लाई जा रही नई नीति को लेकर आशंकित है और एमएसपी को जारी रखने के साथ-साथ फसलों की लागत के अनुसार किसानों की क्रय शक्ति बढ़ाने की मांग कर रहा है। 

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