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बजट 2020: जानिए क्या है रेलवे के निजीकरण का प्रस्ताव, इससे फायदा होगा या नुकसान?
Mon, 03 Feb 2020 11:59 AM IST
खुशबू गोयल
दीपक शाही, अमर उजाला, चंडीगढ़
दीपक शाही, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 03 Feb 2020 11:59 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा शनिवार को संसद में पेश किए गए बजट में 150 ट्रेनों को पब्लिक प्राइवेट पाटर्नरशिप (पीपीपी) के तहत चलाने का एलान किया गया। मिली जानकारी के मुताबिक राजधानी, शताब्दी और दुरंतो जैसी प्रीमियम ट्रेनों के निजीकरण की शुरुआती योजना पर विचार हो रहा है।
यात्रियों से किराया निजी कंपनी ही वसूलेगी, लेकिन निजी कंपनी रेल चलाने के एवज में रेल मंत्रालय को पैसा देगी। 100 दिन के भीतर रेलवे निजी कंपनियों की बोलियां मंगवा सकता है। बता दें कि कुछ ट्रेनों को प्राइवेट हाथों में देना एक अच्छा फैसला हो सकता है, क्योंकि जिस तरह का फर्क हम सरकारी बैंकों और प्राइवेट बैंकों की सेवाओं में देखते हैं, हो सकता है आने वाले वक्त में यही फर्क रेलवे में भी देखने को मिले।
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यात्रियों से किराया निजी कंपनी ही वसूलेगी, लेकिन निजी कंपनी रेल चलाने के एवज में रेल मंत्रालय को पैसा देगी। 100 दिन के भीतर रेलवे निजी कंपनियों की बोलियां मंगवा सकता है। बता दें कि कुछ ट्रेनों को प्राइवेट हाथों में देना एक अच्छा फैसला हो सकता है, क्योंकि जिस तरह का फर्क हम सरकारी बैंकों और प्राइवेट बैंकों की सेवाओं में देखते हैं, हो सकता है आने वाले वक्त में यही फर्क रेलवे में भी देखने को मिले।
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रेलवे का फायदा होगा या नुकसान?
टूरिज्म को देखते हुए जो अहम रूट हैं, उन पर ट्रेन चलाने के लिए निजी क्षेत्र को मौका दिया जा सकता है और दो बड़े शहरों को जोड़ने वाले रूट पर भी फैसला हो सकता है। इससे पहले कई स्टेशनों पर मिलने वाली सुविधाओं को निजी हाथों में दिया जा चुका है।
सबसे बड़ा सुलगता सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्राइवेट कंपनियों को रेल परिचालन में क्यों शामिल किया जा रहा है। इसे समझने के लिए उन बड़े देशों में रेलवे चलाने के फॉर्मूले को जानना होगा, जहां करीब-करीब पूरी तरह से रेलवे का निजीकरण हो चुका है। दुनिया के चार बड़े देशों अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और कनाडा में रेलवे का परिचालन निजी हाथों में है और यहां पर इनका सफल परिचालन हो रहा है। यात्रियों को यहां सुविधाएं भी विश्वस्तरीय मिलती हैं।
सबसे बड़ा सुलगता सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्राइवेट कंपनियों को रेल परिचालन में क्यों शामिल किया जा रहा है। इसे समझने के लिए उन बड़े देशों में रेलवे चलाने के फॉर्मूले को जानना होगा, जहां करीब-करीब पूरी तरह से रेलवे का निजीकरण हो चुका है। दुनिया के चार बड़े देशों अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और कनाडा में रेलवे का परिचालन निजी हाथों में है और यहां पर इनका सफल परिचालन हो रहा है। यात्रियों को यहां सुविधाएं भी विश्वस्तरीय मिलती हैं।