बजट से कारोबारियों में कहीं खुशी कहीं गम, जीएसटी में कोई बदलाव नहीं होने से इंडस्ट्री में मायूसी
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आम बजट पर इंडस्ट्री की मिली-जुली प्रतिक्रिया आई है। कुछ कारोबारियों का कहना है कि इस बजट में इंडस्ट्री को कुछ नहीं दिया गया है, वहीं कुछ कारोबारी इस बजट को अच्छा मान रहे हैं। आम जनता की बात करें तो आयकर स्लैब में बदलाव करते 5 लाख रुपये तक छूट के फैसले से हर कोई खुश दिखाई दे रहा है। बजट के जानकारों के अनुसार इस बजट से एकदम कोई फायदा नहीं दिखेगा, लेकिन कुछ समय बाद बदलाव साफ दिखाई देगा।
मालूम था, बजट से कुछ नहीं मिलेगा
केंद्र सरकार का साल 2020 का बजट मेरी उम्मीद पर बिलकुल खरा उतरा है, क्योंकि मुझे पहले उम्मीद थी कि इंडस्ट्री के लिए बजट में कुछ नहीं मिलेगा। वह इस बजट से साफ हो गया है। छोटे और सूक्ष्म उद्योग के लिए सहायक कर्ज देने की बात तो बजट में कही गई, लेकिन पहले की योजनाओं को सही तरीके से लागू नहीं किया जा सका है। ऐसे में नई योजनाएं क्या फायदा देंगी। क्रेडिट लिंकड कैपिटल सब्सिडी की बात करे तो लगभग 1800 करोड़ की सब्सिडी केंद्र सरकार की तरफ बकाया पड़ी है। उस राशि को देने पर बजट में कुछ नहीं कहा गया। सरकार के पास कुछ है नहीं तो देगी भी क्या। बदीश जिंदल, फेडरेशन ऑफ पंजाब स्मॉल इंडस्ट्री एसोसिएशन
हौजरी इंडस्ट्री को बजट से मिली मायूसी
होजरी इंडस्ट्री को इस बजट से बहुत उम्मीद थी, लेकिन बजट में कुछ नहीं मिला। इस बजट को देखकर लगता है कि 5 ट्रिलियन क्या तीन ट्रिलियन भी इकोनॉमी नहीं होगी। हमें तो इस बजट से सिर्फ निराशा हाथ लगी है। बजट में नेशनल टेक्निकल टेक्सटाइल मिशन स्थापित करने के लिए 1480 करोड़ रुपये खर्च करने की बात से कुछ राहत जरूर है। इसका फायदा पूरी इंडस्ट्री को नहीं मिल सकता है। हमें उम्मीद थी कि हमारा मुकाबला चीन, बांग्लादेश, श्रीलंका और वियतनाम से है। बांग्लादेश में कस्टम ड्यूटी जीरो है, भारत में यही ड्यूटी 18.9 फीसदी है। इसमें सरकार ने कोई राहत नहीं दी है। विनोद थापर, चेयरमैन निटवियर एंड टेक्सटाइल क्लब
देशहित में पेश किया गया बजट
मेरी नजर में यह बजट पूरी तरह से देशहित में पेश किया गया है। आयकर टैक्स में जो भी नई स्लैब बनाई गई, यह कदम सराहनीय है। लेकिन इसमें एक बात मुझे ठीक नहीं लगी कि सरकार ने डिडक्शन को खत्म कर दिया है। सरकार को इस बारे में दोबारा विचार करना चाहिए। कृषि क्षेत्र में सरकार ने अच्छा प्रयास किया है, लेकिन सरकार को चाहिए कि बड़े किसानों पर पांच फीसदी तक टैक्स लगाया जाना चाहिए। अशोक जुनेजा, चेयरमैन, पंजाब प्लाईवुड एसोसिएशन
कहीं खुशी कहीं गम जैसे बजट
वित्तमंत्री का बजट कहीं खुशी कहीं गम जैसा है। साइकिल इंडस्ट्री की पहले से मांग थी कि चाइना बाईसाइकिल और साइकिल पाटर्स को भारत में डंप कर रहा है। इसे रोका जाना चाहिए। भारत सरकार ने साइकिल पर 20 फीसदी और पार्ट्स पर 30 फीसदी कस्टम ड्यूटी लगा दी थी। लेकिन चाइना ने चालाकी से साफटा देशों से माल भारत में भेजना शुरू किया, जिन पर कस्टम ड्यूटी जीरो है। अमेरिका ने चाइना की तरफ से आने माल पर 67 फीसदी कस्टम ड्यूटी लगा दी है, तो भारत क्यों नहीं। हम यूरोप को साइकिल पार्ट्स एक्सपोर्ट कर सकते हैं कि सरकार ने बजट में हमें अपग्रेड करने के लिए कुछ नहीं दिया। जीएसटी की बात करे तो साइकिल इंडस्ट्री पर 12 फीसदी और कच्चे माल पर 18 फीसदी है। हमारा पैसा तो जीएसटी में जा रहा है जैसे एक्सपोर्ट्स को डिजीटल भुगतान करने की बात कही गई है, उसी तर्ज पर एमएसएमई और साइकिल पार्टस को भी शामिल किया जाए। डीएस चावला, प्रधान यूसीपीएमए
बजट को 10 में से देंगे 5 नंबर
इस बजट में इंडस्ट्री को सीधे तौर पर कोई फायदा नहीं दिया गया है। इसे इज ऑफ डूईंग बिजनेस कहना ठीक रहेगा। अगर बजट को अंक देने की बात कहें तो मैं 10 में से 5 नंबर दूंगा। सबसे पहले एमएसएमई को ऑडिट करवाने के लिए एक करोड़ रुपये बढ़ा 5 करोड़ की छूट देना अच्छा कदम है। बजट में उत्पादन को बढ़ावा देने, क्वालिटी स्टैंडर अपग्रेड करने, निर्यात में डिजीटल रिफंड, डाटा सेंटर, आईपीआर के तहत अलग विभाग बनाने जैसे कदम सरहानीय है। हमें उम्मीद थी कि जीएसटी को कुछ कम किया जाएगा, लेकिन उस पर कोई राहत नहीं दी गई। मेरा अनुमान है कि इस बजट से जीडीपी 5.5 से छह फीसदी तक जा सकती है। उपकार सिंह आहूजा, प्रधान, सीआईसीयू
स्लैब में बदलाव भ्रमित करने जैसा
सरकार का यह बजट ठीक ठाक कहा जा सकता है। आयकर स्लैब में बदलाव एक भ्रमित करने जैसा है। हर व्यक्ति पहले पुराने तरीके से टैक्स की गणना करेगा, फिर नए स्लैब के अनुसार। उदाहरण के तौर पर अगर किसी व्यक्ति की सालाना आय 7.50 लाख है तो पुरानी स्लैब के अनुसार उसे 26 हजार 500 रुपये टैक्स देना पड़ेगा। नए स्लैब के अनुसार उसे 37 हजार 500 रुपये देने पड़ेंगे। सरकार ने बजट में शिक्षा, कृषि क्षेत्र में बड़ी घोषणाएं की है लेकिन यह बताया नहीं कि इसके लिए पैसा कहां से आएगा। बजट की कॉपी मिलने पर सब कुछ साफ हो जाएगा। दिनेश कुमार, उप प्रधान इन डॉयरेक्ट टैक्स एसोसिएशन