मोदी सरकार का अंतरिम बजट हुआ पेश, पढ़ें चंडीगढ़ को इस बार क्या मिला खास
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चंडीगढ़ के विकास के लिए चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से लंबे-चौड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अंतरिम बजट में यूटी को जो रुपया आवंटित किया गया है, वह उम्मीद से कम है। पिछली बार के मुकाबले ओवरऑल बजट में सिर्फ साढ़े पांच प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि कैपिटल बजट, जिसका इस्तेमाल नए प्रोजेक्ट के लिए किया जाता है, उसमें जबरदस्त कटौती कर दी गई है।
पिछली बार ओवरऑल कैपिटल बजट 505 करोड़ रुपये का मिला था, जिसे इस बार 401.63 करोड़ का कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि करीब 100 करोड़ रुपये पिछली बार के मुकाबले कम मिले हैं। कैपिटल बजट से नए प्रोजेक्ट शुरू होते हैं, ऐसे में बजट में कटौती से विकास की रफ्तार कम हो जाएगी।
स्वास्थ्य के कैपिटल बजट में करीब एक करोड़ रुपये की कटौती हुई है। साल 2018-19 में 76.13 करोड़ रुपये आवंटित हुए थे। सितंबर में रिवाइज्ड होने के बाद यह बजट 80.93 करोड़ में पहुंच गया, जबकि इस बार बजट 75.31 करोड़ रुपये में ही सिमट गया। शिक्षा में तो कैपिटल के साथ ओवरऑल बजट को भी कम कर दिया गया है।
पिछले साल 827.90 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया, जबकि इस बार 809.37 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। कैपिटल बजट 67.56 करोड़ रुपये आवंटित हुआ है, जबकि साल 2018-19 में 99.89 करोड़ रुपये मिले थे। हालांकि हेल्थ के ओवरऑल बजट में बढ़ोतरी हुई है। पिछली बार यूटी को 478.92 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि इस बार 513.90 करोड़ रुपये मिले हैं। हालांकि इसमें अधिकतर हिस्सा सैलरी व दूसरे कामकाज में चले जाते हैं।
465 करोड़ कम मिला बजट
चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से गृह मंत्रालय को 5218.03 करोड़ रुपये का बजट बनाकर भेजा गया था, जिसकी जगह 4753.12 करोड़ रुपये ही स्वीकृत किए गए हैं। करीब 465 करोड़ रुपये के बजट पर कैंची चल गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि 465 करोड़ रुपये से जो विकास होने वाला था, वह प्रभावित होगा।
हालांकि यह अंतरिम बजट है। यदि चंडीगढ़ प्रशासन मजबूती से अपनी बात गृहमंत्रालय के सामने उठाता है तो रिवाइज्ड बजट में कुछ पूंजी बढ़ाने का भी प्रावधान है। पिछले साल 2018-19 में चंडीगढ़ प्रशासन की से केंद्र को भेजे गए 5908.22 करोड़ के प्रस्ताव की जगह 4511.91 करोड़ रुपये ही स्वीकृत किए गए थे। तब करीब 1396.31 करोड़ रुपये कम बजट मिला था।
रिवाइज्ड बजट में मिलती है राहत
प्रशासन को सितंबर में रिवाइज्ड एस्टीमेट भेजना होता है और उसमें और बजट की मांग की जा सकती है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में चंडीगढ़ का रिवाइज्ड बजट 4536.57 करोड़ रुपये हो गया था, जो पहले 4511.91 करोड़ रुपये था। ऐसे में चंडीगढ़ प्रशासन के सामने भी रास्ते अभी खुले हैं, लेकिन रिवाइज्ड बजट में ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती।
पिछले साल के मुकाबले ओवरऑल कैपिटल बजट में 20 प्रतिशत की कटौती
कैपिटल बजट की राशि का इस्तेमाल शहर के प्रोजेक्टों में किया जाता है। लेकिन कैपिटल बजट में भी झटका मिला है। चंडीगढ़ प्रशासन ने कैपिटल बजट के तहत 575.50 करोड़ रुपये मांगा था, जबकि मिला 401.63 करोड़ रुपये। करीब 173.87 करोड़ रुपये कम। साल 2018-19 में चंडीगढ़ को कैपिटल बजट के तहत 505.03 करोड़ रुपये मिले थे।
यानी पिछली बार के मुकाबले कम बजट मिला। इसका सीधा असर उन प्रोजेक्ट पर पड़ेगा, जो निर्माणाधीन है या जिनकी प्लानिंग होनी है। प्रशासन के सामने अब फिर से पिछले साल जैसी ही परेशानी आ गई है। चंडीगढ़ प्रशासन के कुछ अधिकारियों का कहना है कि उम्मीद से कम बजट मिलने पर प्रशासन और नगर निगम के कुछ प्रोजेक्ट्स प्रभावित हो सकते हैं।
किस साल कितना मिला बजट
साल 2017-18 2018-19 2019-20
रेवेन्यू 3838.66 4006.88 4351.49
कैपिटल 792.58 505.03 401.63
कुल बजट 4628.24 4511.91 4753.12
नोट : सभी राशि करोड़ों में
किस साल कितना रहा है कैपिटल बजट
डिपार्टमेंट साल 2017-18 2018-19 2019-20
शिक्षा 79.43 99.89 68.56
स्वास्थ्य 57.91 76.13 75.31
ट्रांसपोर्ट 23.37 41.05 23.71
सरकारी हाउस 23.21 32.30 23.70
शहरी विकास 544.48 155.14 1147.04
नोट : सभी राशि करोड़ों में
यूपीए सरकार में हर बजट में दस फीसदी की बढ़ोतरी होती रही है, जबकि भाजपा के सरकार में सिर्फ साढ़े पांच फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, कैपिटल बजट में जबरदस्त कटौती की गई है। इससे विकास कार्य प्रभावित होंगे। बजट से शहरवासी निराश हैं। -पवन बंसल, पूर्व सांसद
यह बजट ऐतिहासिक है। मध्य वर्ग को टैक्स से बड़ी राहत दी गई है। चंडीगढ़ को पिछले साल के मुकाबले साढ़े पांच फीसदी ज्यादा बजट मिला है। -किरण खेर, सांसद