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जंग में घायल अफसरों को सुविधाएं, जवानों को नहीं, हाईकोर्ट सख्त

Wed, 01 Jun 2016 10:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 01 Jun 2016 10:32 AM IST
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bsf personnel injured in terror attack, summons to BSF Director General by high court
कोर्ट

आतंकी हमले में एक टांग गंवा चुके जवान की प्रमोशन भी वापस लेने के मामले में हाईकोर्ट ने बीएसएफ के महानिदेशक को किया तलब। दरअसल आतंकी हमले में अपनी एक टांग गंवा चुके बीएसएफ के जवान को सुविधाएं देने की बजाए दी हुई प्रमोशन भी वापस ले लिए जाने के मामले में दायर अवमानना याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बीएसएफ के महानिदेशक केके शर्मा को एक अगस्त को मामले की अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट में पेश होने के आदेश जारी किए हैं।

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जस्टिस जितेंद्र चौहान की कोर्ट ने बीएसएफ के जवान कमल कुमार की ओर से दायर अवमानना याचिका पर कहा कि या तो बीएसएफ आगामी एक अगस्त तक याचिकाकर्ता के बनते सारे अधिकार और सम्मान मुहैया करा दे, या बीएसएफ के महानिदेशक खुद कोर्ट में पेश हों। याचिकाकर्ता के वकील संदीप बंसल ने बताया कि 1990 में पटियाला के पातड़ां में एक आतंकी हमले में बीएसएफ जवान कमल कुमार को गोली लगने के बाद उपचार के दौरान दाहिनी टांग गंवानी पड़ी थी।
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वर्ष 2000 में बीएसएफ ने कमल को हेडकांस्टेबल पदोन्नत करने का फैसला किया और बीएसएफ और असम राइफल द्वारा केंद्र सरकार को भेजे गए उस प्रस्ताव को केंद्र ने मंजूरी दे दी, जिसमें ऐसे जवान जोकि ड्यूटी के दौरान दुश्मन/आतंकियों का मुकाबला करते हुए घायल हो जाते हैं, उनके मामलों में विशेष छूट का प्रावधान किया गया था। इसके बाद कमल को 14 दिसंबर, 2001 को हेडकांस्टेबल प्रमोट कर दिया गया।
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लेकिन 2006 में गृह मंत्रालय ने एक आदेश पारित करते हुए घायल सिपाही को दी गई पदोन्नति को इस आधार पर वापस ले लिया कि यह सुविधा और छूट केवल अधिकारी रेंक के लिए है न कि ओआर के लिए। याचिकाकर्ता ने इस पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए अधिकारियों के लिए सुविधाएं सीमित किए जाने और प्रमोशन के पांच साल बाद डिमोशन को चुनौती दी। तब जस्टिस अजय तिवारी की कोर्ट में पहुंचे इस मामले पर 30 मार्च, 2015 को फैसला सुनाते हुए जस्टिस तिवारी ने कहा कि गृह मंत्रालय को दुश्मन से लड़ते हुए हर रैंक के अधिकारी और सिपाही को समान सुविधाएं देनी चाहिए। अदालत ने याचिकाकर्ता की प्रमोशन को भी बहाल करने के आदेश दिए।


हाईकोर्ट के इस आदेश को बीएसएफ की ओर से चुनौती दी गई, लेकिन फैसला याचिकाकर्ता के पक्ष में ही आया। इसके बाद बीएसएफ ने जब अदालत के आदेश के बावजूद याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं दी तो उसकी ओर से अवमानना याचिका दायर की गई है।

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