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हरियाणा में भत्ते और भर्ती रोकने का विरोध, कर्मचारी संघ ने दिए सुझाव, हुड्डा-सुरजेवाला ने कसे तंज

Tue, 28 Apr 2020 07:47 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 28 Apr 2020 07:47 PM IST
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BS Hooda and Randeep Singh Surjewala targets on Haryana government
बीएस हुड्डा, रणदीप सुरजेवाला। - फोटो : फाइल फोटो

हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अगले एक साल तक सरकार में भर्ती प्रक्रिया बंद किए जाने का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि पिछले काफी समय से देश में बेरोजगारी का माहौल है। कोरोना की मार पड़ने से पहले ही प्रदेश में बेरोजगारी का आंकड़ा 28 फीसदी की उच्च दर तक पहुंच गया है। कोरोना के बाद ये आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है। ऐसे में अगर सरकारी भर्तियां भी बंद हो गई तो प्रदेश के युवाओं को रोजगार कैसे मिलेगा।

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यहां जारी प्रेस बयान में हुड्डा ने कहा कि मौजूदा मुश्किल हालातों से उबरने के लिए युवाओं को ज्यादा से ज्यादा रोजगार देने की जरूरत है। लेकिन सरकार इसके उलट फैसले ले रही है, जो हैरान करने वाले हैं। ऐसा फैसला लेने से पहले सरकार को सोचना चाहिए कि जो युवा भर्ती के इंतजार में कई महीनों से तैयारी कर रहे हैं, वे इस इस एक साल में ओवर एज हो जाएंगे।
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भत्तों पर रोक लगाने से कर्मचारियों में नाराजगी
 बहु उद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारी एसोसिएशन हरियाणा ने सरकार से मंहगाई भत्ते व अन्य रोक हटाने की मांग की है। एसोसिएशन की राज्य प्रधान ओमपति कादियान, महासचिव हरिनिवास व प्रवक्ता संदीप कुंडू ने कहा कि एमपीएचडब्लू कैडर का हर कर्मचारी कोरोना जंग में अपनी जान जोखिम में डाल कर फ्रंट लाइन में रहकर सेवाएं दे रहे हैं। इसके साथ साथ पुलिस, बिजली व सफाई कर्मचारी भी दिन रात जुटे हुए हैं। सरकार द्वारा महंगाई व अन्य भत्ते रोकने व भर्तियों पर रोक लगाने से कर्मचारियों का मनोबल गिरा है।
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एसोसिएशन ने सरकार से कर्मचारियों को हतोत्साहित करने की बजाय पूंजीपति वर्ग से संसाधन जुटा कर कोरोना आपदा के समाधान की अपील की है। प्रधान ने कहा कि महंगाई के इस दौर में स्वास्थ्य कर्मचारी वेतन से परिवार के लिए दो समय की रोटी ही जुटा पाते हैं।इससे ही वह बच्चो व परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं। उसके पास आमदनी का ओर कोई जरिया नही है। महंगाई भत्ते, जीपीएफ निकासी व एलटीसी भत्ते पर रोक लगाने से इसका सीधा असर कर्मचारियों व परिवार पर पड़ेगा।

भर्तियों पर रोक की एनएसयूआई ने की निंदा

 मनोहर सरकार द्वारा भर्तियों पर लोग लगाने के फैसले की एनएसयूआई ने भी निंदा की है हरियाणा एनएसयूआई के अध्यक्ष दिव्यांशु बुद्धिराजा का है जिन्होंने कहा है कि एक तरफ तो राज्य में पहले ही रोजगार नहीं है और अब सरकार आगामी एक साल तक भी कोई भी भर्ती नहीं करेगी। उनके अनुसार एक तरफ धंधे चौपट हो रहे है, लॉकडाउन के कारण आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है, बेरोजगारी चरम सीमा पर है। तो ऐसे समय में सरकार को तो रोजगार देने की बात करनी चाहिए थी।

लेकिन सरकार ने बेरोजगारी बढ़ाने में अपना योगदान देकर जले पर नमक छिड़कने का काम किया है।  दिव्यांशु ने कहा कि खासकर जिन युवाओ की भर्ती की उम्र पूरी होने वाली है उनके बारे में सरकार के पास अभी कोई वैकल्पिक योजना नहीं है। तो वहीं जिन छात्रों-युवाओ ने अपनी रोजी रोटी के लिए विभिन्न शिक्षण संस्थाओं से पिछले 6 महीने व 1 साल से तैयारी के लिए कोचिंग ली उनके बारे में भी सरकार ने ना सोचकर केवल तुगलकी फरमान जारी किया हैं।

सरकार से रूटीन भर्ती प्रक्रिया जारी रखने की मांग
सरकार द्वारा नई भर्तियों पर रोक लगाने से हल्ला बोल समिति के युवा खासे नाराज हैं। सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। हल्ला बोल के नेता अनुपम का कहना है कि हरियाणा सरकार की ये घोषणा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के सामने बड़ी मुसीबत खड़ी कर देगा। पहले से कोरोना महामारी के चलते अचानक हुए लॉकडाउन के कारण छात्र व छात्राएं परेशानी में आ चुके हैं। जो कि दिल्ली, चंडीगढ़ और अन्य बड़े शहरों में रहकर विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

उनके सामने किराया देने और खाने की समस्या पहले से चल रही है और अब अचानक  इस घोषणा सेे और परेशानी बढ़ेगी। युवाओं ने मांग की है कि रूटीन भर्तियों को न रोका जाए, वरना युवाओं में हताशा बढ़ेगी। संगठन के नेशनल कोऑर्डिनेटर गोविन्द मिश्रा ने कहा कि हरियाणा के हर एक गांव में बड़ी संख्या में छात्र सरकारी नौकरी की चाह रखते हैं। ऐसे मे नई सरकारी भर्तियों पर रोक इन छात्रों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के बारे में सोचें और भर्तियों से रोक को हटाएं।

कर्मचारियों के भत्ते रोकने की बजाय पूंजीपतियों पर लगाएं ज्यादा टैक्स
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने मुख्यमंत्री के साथ मंगलवार को हुई मीटिंग में अनेक सुझाव दिए। संघ के अध्यक्ष सुभाष लांबा ने दो टूक कहा कि सरकार कर्मचारियों के भत्तों में कटौती करने की बजाए बड़े पूंजीपतियों पर ज्यादा टैक्स लगाकर आवश्यक संसाधन जुटाने का काम करे। केंद्र सरकार से जीएसटी का राज्य का हिस्सा लिया जाए। पीएम केयर्स फंड से फंड लेकर आर्थिक संकट दूर कर सकते हैं।

लांबा व प्रदेश उपाध्यक्ष नरेश शास्त्री ने बताया कि सरकार ने इसके बावजूद कर्मचारियों के अन्य भत्तों में कटौती करने के संकेत दिए हैं। जिसे कर्मचारी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं कर सकते। एक ही मजदूर संगठन को मीटिंग में आमंत्रित करने व बाकी ट्रेड यूनियन की अनदेखी करने के एतराज पर सीएम ने कहा कि शीघ्र सभी मजदूर संगठनों को बुलाकर बातचीत की जाएगी।

संघ नेताओं ने मुख्यमंत्री को पुरानी पेंशन बहाल कर एनपीएस के करोड़ों रुपए सरकार के खजाने में जमा करने और ठेकेदारों को बीच से हटाकर ठेका कर्मचारियों को सीधा विभागों के पे रोल पर लेकर ठेकेदारों को दिया जाने वाला जीएसटी व सर्विस टैक्स का करोड़ों रुपए बचाने का भी सुझाव दिया। जिस पर सरकार ने गंभीरता से गौर करने का आश्वासन दिया है। सरकार के आदेश के बावजूद कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया है।

ये भी दिए सुझाव
सभी विभागों के रेगुलर व ठेका कर्मचारियों के तीन से चार महीने से वेतन का भुगतान करें, जीपीएफ निकलने पर लगाई गई रोक को हटाएं, सुप्रीम कोर्ट से हार चुके 1983 पीटीआई व आईटीआई के अनुबंध अनुदेशकों को सेवा सुरक्षा प्रदान करें, हरियाणा सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक कर्मचारियों को जुलाई 2019 से रोका गया मंहगाई भत्ता दें, आशा वर्करों के मानदेय को बढ़ाकर 8 हजार रुपये करें, सभी सफाई कर्मचारियों को 4 हजार रुपये जोखिम भता दिया जाए।

किसानों से छलावा कर रही गठबंधन सरकार : सुरजेवाला

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने गेहूं खरीद की अनियमितताओं को लेकर गठबंधन सरकार को घेरा है। उन्होंने कहा सरकार किसान को छल रही है। 26 मार्च 2020 को सरकार ने किसान को गेहूं खरीद पर मई व जून में 50 से 125 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने की घोषणा की थी। अब उससे पीछे हटते हुए गेंद केंद्र सरकार के पाले में डाल दी गई है।

13 व 16 अप्रैल को सभी आढ़तियों को ऑनलाइन पेमेंट करने का निर्देश दिया व सात प्राइवेट बैंकों में खाते खोलने को कहा। दबाव बना तो यह आदेश वापस ले पुराने सिस्टम पर खरीद करने का निर्णय लिया गया। 21 अप्रैल को आढ़तियों की बजाय पंचायतों के जरिये खरीद के आदेश दिए गए, बाद में इन्हें भी वापस ले लिया। 24 अप्रैल, 2020 को फिर ऑनलाइन पेमेंट का आदेश दिया गया। सुरजेवाला ने कहा कि सरकार के नित नए आदेशों से किसान परेशान है। किसान व आढ़तियों के रिश्तों को तोड़ने की साजिश रची जा रही है।
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