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ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन से अलग होने पर उद्यमियों ने दी राय
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना(पंजाब)
Updated Sat, 25 Jun 2016 09:42 AM IST
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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरून
- फोटो : फाइल फोटो
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यूरोपियन यूनियन से ब्रिटेन के अलग होने पर उद्योग जगत में अलग अलग राय है। भारत और इंग्लैंड के बीच कारोबार बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। कुछ उद्यमियों का मानना है कि यदि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था कमजोर होगी तो इसका भारत पर असर हो सकता है। कुछ की राय है कि तत्काल इसका प्रभाव भारत नहीं होगा, लेकिन करेंसी में होने वाले उतार चढ़ाव को संभालने की जरूरत है।
इंग्लैंड और भारत अपने अपने तरीके से आपसी कारोबार को आगे बढ़ा सकेंगे। दोनों देशों के बीच आपसी सहमति से व्यापार मुक्त समझौता भी भविष्य में हो सकता है। ब्रिटेन में हुए जनमत संग्रह के बाद वहां की जनता ने यूरोपियन यूनियन से अलग होने पर अपनी मोहर लगा दी। इसके बाद आर्थिक मोर्चे पर चौतरफा उथल पुथल और आंकलन का दौर शुरू हो गया।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशंस (फियो) के अध्यक्ष एससी रल्हन का कहना है कि इस फैसले से राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता आई है, लेकिन ब्रिटेन और ईयू के साथ भारत के होने वाले कारोबार पर इसका खास असर नहीं होगा। उन्होंने कहा कि काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि ब्रिटेन अगले दो साल में ईयू के साथ किस प्रकार से मोल भाव कर पाता है और ईयू सदस्यों के लिए ब्रिटेन कैसे अपने दरवाजों को खोलता है।
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अगर ब्रिटेन को पहले की तरह ही ईयू के साथ शुल्क मुक्त व्यापार की इजाजत दे दी जाती है और ईयू के लोगों को बेरोकटोक आने-जाने की इजाजत रहती है तो भारत के लिए कुछ खास नहीं बदलेगा। वहीं अगर ब्रिटेन के साथ गैर सदस्य देश की तरह व्यवहार किया जाता है तो यह ईयू और ब्रिटेन दोनों के साथ भारत के निर्यात पर सकारात्मक असर डालेगा। 2015-16 में भारत ने ईयू में 35.35 अरब डालर का निर्यात किया, वहीं इस अवधि में ब्रिटेन में भारत ने 9.35 अरब डालर का निर्यात किया।
फियो का मानना है कि निकट भविष्य में करेंसी में उतार-चढ़ाव से भारतीय निर्यात पर दबाव बन सकता है क्योंकि ब्रिटेन के पौंड और यूरो दोनों में ही गिरावट आएगी और दोनों ही एक-दूसरे से तीसरे देश के बाजार में प्रतिस्पर्धा करेंगे। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल के पूर्व राष्ट्रीय चेयरमैन सतीश ढांडा का कहना है कि इस जनमत संग्रह से भारत और इंग्लैंड के बीच कारोबार में इजाफा होगा।
इंग्लैंड ने साइकिल आयात पर चालीस फीसदी एंटी डंपिंग ड्यूटी लगा रखी है, वह भी खत्म हो सकती है। भारत और इंग्लैंड में आपसी निवेश बढ़ सकता है। अपैरल एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन ऑफ लुधियाना के प्रधान संजीव गुप्ता ने कहा कि इंग्लैंड को बेस बनाकर यूरोपियन यूनियन में कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों पर इसका बुरा असर होगा। पौंड के कमजोर होने से कारोबार सिमट सकता है, लेकिन भारत पर इसका ज्यादा असर नहीं होगा।
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इंग्लैंड और भारत अपने अपने तरीके से आपसी कारोबार को आगे बढ़ा सकेंगे। दोनों देशों के बीच आपसी सहमति से व्यापार मुक्त समझौता भी भविष्य में हो सकता है। ब्रिटेन में हुए जनमत संग्रह के बाद वहां की जनता ने यूरोपियन यूनियन से अलग होने पर अपनी मोहर लगा दी। इसके बाद आर्थिक मोर्चे पर चौतरफा उथल पुथल और आंकलन का दौर शुरू हो गया।
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फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गनाइजेशंस (फियो) के अध्यक्ष एससी रल्हन का कहना है कि इस फैसले से राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता आई है, लेकिन ब्रिटेन और ईयू के साथ भारत के होने वाले कारोबार पर इसका खास असर नहीं होगा। उन्होंने कहा कि काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि ब्रिटेन अगले दो साल में ईयू के साथ किस प्रकार से मोल भाव कर पाता है और ईयू सदस्यों के लिए ब्रिटेन कैसे अपने दरवाजों को खोलता है।
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अगर ब्रिटेन को पहले की तरह ही ईयू के साथ शुल्क मुक्त व्यापार की इजाजत दे दी जाती है और ईयू के लोगों को बेरोकटोक आने-जाने की इजाजत रहती है तो भारत के लिए कुछ खास नहीं बदलेगा। वहीं अगर ब्रिटेन के साथ गैर सदस्य देश की तरह व्यवहार किया जाता है तो यह ईयू और ब्रिटेन दोनों के साथ भारत के निर्यात पर सकारात्मक असर डालेगा। 2015-16 में भारत ने ईयू में 35.35 अरब डालर का निर्यात किया, वहीं इस अवधि में ब्रिटेन में भारत ने 9.35 अरब डालर का निर्यात किया।
फियो का मानना है कि निकट भविष्य में करेंसी में उतार-चढ़ाव से भारतीय निर्यात पर दबाव बन सकता है क्योंकि ब्रिटेन के पौंड और यूरो दोनों में ही गिरावट आएगी और दोनों ही एक-दूसरे से तीसरे देश के बाजार में प्रतिस्पर्धा करेंगे। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रोमोशन काउंसिल के पूर्व राष्ट्रीय चेयरमैन सतीश ढांडा का कहना है कि इस जनमत संग्रह से भारत और इंग्लैंड के बीच कारोबार में इजाफा होगा।
इंग्लैंड ने साइकिल आयात पर चालीस फीसदी एंटी डंपिंग ड्यूटी लगा रखी है, वह भी खत्म हो सकती है। भारत और इंग्लैंड में आपसी निवेश बढ़ सकता है। अपैरल एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन ऑफ लुधियाना के प्रधान संजीव गुप्ता ने कहा कि इंग्लैंड को बेस बनाकर यूरोपियन यूनियन में कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों पर इसका बुरा असर होगा। पौंड के कमजोर होने से कारोबार सिमट सकता है, लेकिन भारत पर इसका ज्यादा असर नहीं होगा।