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यहां दलालों के बिना नहीं चलता काम

Sun, 10 Aug 2014 01:50 PM IST
सुशील राज/अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील राज/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 10 Aug 2014 01:50 PM IST
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Bribers in Chandigarh RLA

रजिस्टरिंग एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) के कर्मचारी दलालों के साथ मिलकर हर रोज पांच से दस हजार रुपये की से ज्यादा कमाई करते थे। एक फाइल पास करने के कर्मचारी एक हजार से 1500 के बीच रुपये लेते थे।

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इस चक्कर में आरएलए के कर्मचारी फाइल में लगे कागजात को भी वेरीफाइ नहीं करते थे। कई लोगों के तो दलालों ने जाली रेजीडेंट प्रूफ पर ही चंडीगढ़ का लाइसेंस बना डाला। यह खुलासा पकड़े गए दलाल सोनू ने विजिलेंस से किया।
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सोनू ने बताया कि वह हर रोज करीब दस लाइसेंस आरएलए कर्मचारियों के द्वारा बनवाता था। उसके जरिए लाइसेंस बनवाने वाले को किसी प्रकार का कोई टेस्ट नहीं देना होता था।
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विजिलेंस ने दलाल सोनू और पीयन राकेश को शनिवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। गिरोह के अन्य सदस्य पकड़ने के लिए विजिलेंस ने दोनों आरोपियों का रिमांड मांगा। अदालत ने दोनों का एक दिन का पुलिस रिमांड मंजूर किया।

ऐसे चलता था खेल

Bribers in Chandigarh RLA

आरएलए का प्रभार संभालते ही कशिश मित्तल ने आदेश जारी किए थे कि कंप्यूटर पर डाटा एंट्री करने वाले कर्मचारियों के मोबाइल फोन ड्यूटी पर आते ही उनसे ले लिए जाएं। उसके बाद से इन कर्मचारियों ने दलालों से संपर्क साधने का नया तरीका निकाला।

इसके लिए पियन और सफाई कर्मचारियों की मदद ली जाने लगी। दलाल लर्निंग लाइसेंस के टेस्ट में पास होने और बिना रेजीडेंट प्रूफ के लाइसेंस बनाने के लिए तीन से पांच हजार रुपये मांगते थे।

सौदा होने के बाद दलाल आरएलए के पीयन के माध्यम से डाटा आपरेटर से संपर्क करता था। दलाल फाइल पास करने के लिए डाटा एंट्री आपरेटर को 1500 रुपये देता था। ऑपरेटर तक फाइल पहुंचाने के लिए 500 रुपये पीयन या सफाई कर्मी को दिए जाते थे।

एक साल का रिकार्ड जांचा जाएगा

Bribers in Chandigarh RLA

विजिलेंस आरएलए से ड्राइविंग और आरसी का रिकार्ड जब्त करेगी। प्राथमिक जांच में पता चला है कि पिछले एक साल से दलाल इन पीयन के द्वारा लाइसेंस बना रहे थे। ड्राइविंग लाइसेंस बनाने केलिए जाली कागजात का इस्तेमाल हुआ है।

विजिलेंस को शक है ड्राइविंग टेस्ट पास करने के लिए दलालों ने जाली स्टैंप तो नहीं बनवा रखी है। रिकार्ड लेने के बाद ही सारे मामले का खुलासा होगा।
 
खंगाली जा रही है कॉल डिटेल
रुपये लेकर ड्र्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए पूरे के पूरे गिरोह को पकड़ने के लिए विजिलेंस टीम चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राकेश और दलाल सोनू के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल खंगाल रही है।

विजिलेंस पता कर रही है कि  इन के संपर्क में आरएलए के कौन से कर्मचारी शामिल हैं और इन्होंने किन-किन लोगों के ड्राइविंग लाइसेंस बिना टेस्ट के बनवाएं है।

दलालों की लिस्ट तैयार

Bribers in Chandigarh RLA

आरएलए के बाहर लोगों से रुपये लेकर ड्राइविंग लाइसेंस और आरसी बनाने वाले दलालों की लिस्ट विजिलेंस तैयार कर रही है। ज्यादातर सभी दलालों के नाम और पते विजिलेंस को मिल गए हैं। जल्द ही विजिलेंस इन पर भी शिकंजा कसेगा।

नाम सामने आता है पर कार्रवाई नहीं होती
दो साल पहले विजिलेंस टीम ने जाली कागजात पर और ड्राइविंग टेस्ट के लिए डीएसपी के फर्जी साइन करके ड्राइविंग टेस्ट बनाने वाले दलाल और नगर निगम के कर्मचारी को पकड़ा था। विजिलेंस ने मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया था।

जांच में चंडीगढ़ पुलिस के कई कर्मचारियों के नाम आए थे, लेकिन उनपर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। इसके बाद ही आरएलए के कर्मचारियों के मोबाइल फोन ड्यूटी पर आने के बाद जमा करवा लिए जाते थे।

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