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Hindi News ›   Chandigarh ›   Breaking alliance with NDA is not easy for Shiromani Akali Dal

पंजाब: एनडीए से गठबंधन तोड़ना शिरोमणि अकाली दल के लिए आसान नहीं

Sun, 20 Sep 2020 01:38 PM IST
ajay kumar अभिषेक वाजपेयी, अमर उजाला, चंडीगढ़
अभिषेक वाजपेयी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 20 Sep 2020 01:38 PM IST
सार

  • बरगाड़ी बेअदबी कांड और ड्रग्स मामलों की जांच खड़ी कर सकती हैं मुश्किलें
  • समर्थन वापसी पर शिरोमणि अकाली दल और भाजपा भी साधे हुए चुप्पी

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Breaking alliance with NDA is not easy for Shiromani Akali Dal
एनडीए से गठबंधन तोड़ना शिअद के लिए आसान नहीं। - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफे के बाद भी एनडीए से समर्थन वापसी को लेकर शिअद की राहत आसान नहीं दिख रही है। बरगाड़ी बेअदबी कांड और ड्रग्स मामले समर्थन वापसी की राह और मुश्किल बना रहे हैं। बरगाड़ी बेअदबी कांड की जांच सीबीआई और ड्रग्स मामले की ईडी की जांच शिअद के लिए मुसीबत खड़ी कर सकती हैं। इसलिए शिअद के साथ ही भाजपा भी समर्थन वापसी को लेकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।

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कृषि अध्यादेशों के विरोध में शिअद सांसद हरसिमरत कौर के इस्तीफे के बाद पंजाब में शिअद से एनडीए से समर्थन वापसी की मांग उठने लगी है। हालांकि शिअद के नेता यह बात कोर कमेटी भी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि केंद्र से समर्थन वापसी को लेकर कोई भी फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया जाएगा। इन सब के बीच शिअद के लिए भी एनडीए से समर्थन वापसी को लेकर राह आसान नहीं दिख रही है। 
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12 अक्तूबर 2015 में बरगाड़ी बेअदबी कांड और ड्रग्स कांड में वोट बैंक को लेकर पहले की काफी सियासी नुकसान उठा चुकी है। इन दोनों कांडों से पूर्व सूबे के हालात चाहे कैसे भी रहे हों लेकिन शिअद विपक्ष में रहते हुए भी 40 से 45 सीटों पर काबिज रही है लेकिन इस विधानसभा चुनाव में मात्र 15 सीटों पर ही शिअद अपना कब्जा जमा पाई है। ऐसे में अभी इस्तीफे जैसे बड़े फैसले के बाद एनडीए से समर्थन वापसी को लेकर कोई भी फैसला लेने में शिअद के नेता जल्दबाजी में नहीं दिख रहे हैं। हालांकि भाजपा भी समर्थन वापसी को लेकर कोई भी बयान देने से बच रही है।
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बड़े बादल नाखून और मांस की दे चुके हैं संज्ञा
सियासी जानकारों की मानें तो एनडीए से समर्थन नहीं वापस लेने का एक कारण वरिष्ठ शिअद नेता प्रकाश सिंह बादल भी हैं। परिस्थितियां चाहे जितनी भी खराब रहीं हो लेकिन भाजपा और शिअद के संबंध हमेशा कायम रहे हैं। शिअद के वरिष्ठ नेता प्रकाश सिंह बादल पहले भी दोनों के संबंधों को लेकर नाखून और मांस होने की संज्ञा दे चुके हैं।

अकाली दल ने विरोध किया है, इसलिए समर्थन वापसी का फैसला भी अकाली दल द्वारा ही किया जाएगा। भाजपा का इस सियासी घटनाक्रम से कोई भी लेना देना नहीं है। अश्वनी शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा

 

एनडीए के साथ समर्थन वापसी में शिअद अभी कोई निर्णय लेने में जल्दबाजी नहीं करेगी। इसके पीछे एक बड़ा कारण दोनों सियासी दलों के बीच बहुत पुराना संबंध है। इसके साथ ही पंजाब में दोनों दलों को अपनी मजबूत आधारशिला बनाने के लिए एक दूसरे की आवश्यकता भी है। दोनों का साथ बने रहने के पीछे एक कारण शिअद के वरिष्ठ नेता प्रकाश सिंह बादल भी हैं। डॉ. नवजोत, राजनीतिक विशेषज्ञ, पंजाब विश्वविद्यालय

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