फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   brave sisters of rohtak interview to bbc

दिल्ली रेपिस्ट के बाद रोहतक सिस्टर्स का BBC को इंटरव्यू

Sat, 11 Apr 2015 11:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Sat, 11 Apr 2015 11:35 AM IST
विज्ञापन
brave sisters of rohtak interview to bbc

बीबीसी ने दिल्ली के बहुचर्चित निर्भया गैंगरेप के आरोपी के बाद अब छेड़छाड़ की शिकार रोहतक सिस्टर्स का इंटरव्यू लिया। सरकारी रेस्टोरेंट में बीबीसी की टीम के सामने दोनों बहनों पूजा और आरती का दर्द फूट गया।

विज्ञापन


बीबीसी प्रतिनिधि ने पूजा से पूछा था कि अगर 28 नवंबर 2014 जैसी घटना दोबारा हुई तो क्या वे उसी तरह विरोध करेंगी? अब छेड़छाड़ का विरोध करने की हिम्मत नहीं बची है। पूजा ने कहा कि मैं अंदर तक टूट गई हूं। यह कहना है बस में छेड़छाड़ की शिकार रोहतक सिस्टर्स का। छेड़छाड़ करने वालों को सबक सिखाने के लिए शायद ही अब वह हिम्मत जुटा पाऊं, जो बस के अंदर दिखाई थी।
विज्ञापन


टीम ने करीब एक घंटे तक दोनों बहनों से बात की और रिकॉर्डिंग की। पूजा ने पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच को लगातार लटकाया जा रहा है। सीबीआई लैब की पॉलीग्राफ टेस्ट की रिपोर्ट का वही हिस्सा कैसे उजागर हुआ, जो उनके खिलाफ बताया जा रहा है। पूरी रिपोर्ट क्यों नहीं उजागर की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


समझौते के सवाल पर आरती ने कहा कि उनके खिलाफ योजना के तहत ऐसी बातों को सामने लाया जा रहा है, जिनका न तो केस से संबंध है और न ही कोई औचित्य है। केवल मानसिक दबाव बनाने के लिए ऐसे किया जा रहा है।

अब आरटीआई से फंसाने का दांव

brave sisters of rohtak interview to bbc

लड़कों के पक्ष का दावा है कि पूजा और आरती का उनके पुराने कॉलेज में व्यवहार अक्खड़ था। बचाव पक्ष के वकील एडवोकेट संदीप राठी की ओर से लगाई गई आरटीआई में खरखौदा कॉलेज की प्रिंसिपल ने यह कथित जवाब दिया है।

प्रिंसिपल ने बताया है कि दोनों बहनों का अन्य छात्राओं व अध्यापिकाओं के साथ व्यवहार अक्खड़ था। हालांकि आरटीआई में उन्होंने ये भी माना है कि दोनों बहनों के खिलाफ मेरे पास लिखित में कुछ भी नहीं है। एडवोकेट संदीप राठी का कहना है कि ये जानकारियां केस में महत्वपूर्ण साबित होंगी।

एडवोकेट अतर सिंह पंवार का कहना है कि इस आरटीआई का केस से कोई लेना देना नहीं है। यह सामाजिक रूप से दबाव बनाने की ही प्रक्रिया है, ताकि समझौता हो जाए। यदि कोई हक की आवाज उठाता और गलत के खिलाफ बोलने की हिम्मत करता है तो उसके व्यवहार को अक्खड़ ही समझा जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed