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सरिता देवी के समर्थन में उतरे बॉक्सर विजेंद्र सिंह

Fri, 14 Nov 2014 01:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा(हरियाणा )
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा(हरियाणा ) Updated Fri, 14 Nov 2014 01:16 AM IST
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Boxer Vijender Singh landed in support of Sarita Devi

इंचियोन एशियाई खेलों में पदक लौटाकर विरोध जताने वाली बॉक्सर एल सरिता देवी के पक्ष में ओलंपियन विजेंद्र सिंह भी खड़े हो गए हैं। डेरा सच्चा सौदा पहुंचे अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर ने कहा कि माफी मांगे जाने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ द्वारा आजीवन प्रतिबंध लगाए जाने के संकेत देना गलत है।

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चार साल की मेहनत के बाद यदि परिणाम खिलाड़ी के विपरीत जाता है तो ऐसा प्रतिक्रिया स्वाभाविक है। इस पर सरिता देवी आईबा से माफी मांग चुकी है। उसे माफ कर दिया जाना चाहिए। विजेंद्र सिंह ने कहा कि सरिता देवी पर आजीवन प्रतिबंध लगाने के संकेत का भारत सरकार और खेल मंत्रालय को ठोस जवाब देना चाहिए। सरिता देवी ने एशियाई खेलों में एक मुकाबले में उसके साथ बेईमानी करने का आरोप लगाते हुए अपना पदक सभी के सामने लौटा दिया था।
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विजेंद्र ने कहा कि भारतीय मुक्केबाजी संघ के निलंबन के चलते खिलाड़ियों को बड़ा ऑफिशियल टूर्नामेंट खेलने को नहीं मिला। इसका असर कामनवेल्थ खेलों में भी दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि मुक्केबाजी फेडरेशन के गठन के बाद खिलाड़ियों की चयन प्रक्रिया में बदलाव आया है और धीरे-धीरे चयन में रहने वाली खामियां दूर हो रही हैं।

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जल्द ही शुरू करेंगे मुक्केबाजी अकादमी

Boxer Vijender Singh landed in support of Sarita Devi

विजेंद्र ने कहा कि वे जल्द ही मुक्केबाजी अकादमी शुरू कर देंगे। इससे युवा बॉक्सर तैयार होंगे। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट, ताइक्वांडो और जूडो से जुड़कर सेल्फ  डिफेंस की ट्रेनिंग लेनी चाहिए।

भाजपा से भी खेलों को बढ़ावा देने की उम्मीद
विजेंद्र ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार युवाओं की सरकार है। ऐसे में देश को गति देने में अहम भूमिका निभाने वाले युवा वर्ग और खिलाड़ियों के सम्मान में कांग्रेस की तरह भाजपा भी देश व प्रदेश को खेल हब बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

साइकिल पर जाता था भिवानी
विजेंद्र ने कहा कि उनके गांव में खेल का अच्छा माहौल था और मुझे गांव से ही बॉक्सिंग की प्रेरणा मिली। मैं साइकिल पर हररोज अभ्यास के लिए गांव से भिवानी जाता था। विजेंद्र ने कहा कि मुक्केबाजी का अभ्यास उसने 13-14 साल की उम्र में ही शुरू कर दिया था। इसके अलावा विजेंद्र ने खिलाड़ियों को मुक्केबाजी के गुर भी सिखाए।

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