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इस किताब से सीखें त्वचा को निखारने के तरीके
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 28 May 2014 04:04 PM IST
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ऑफिस में इस्तेमाल होने वाली लाइट्स और कंप्यूटर में भी अल्ट्रा वायलेट (यूवी) रेंज होती हैं जो त्वचा के लिए खतरनाक है। अपनी पहली किताब ‘बी ब्यूटीफुल’ के विमोचन के दौरान डॉ. जसतिंदर गिल ने यह जानकारी दी।
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डॉ. गिल ने मंगलवार दोपहर सेक्टर-17 के एक होटल में अपनी किताब का विमोचन मिल्खा सिंह की पत्नी निर्मल मिल्खा सिंह के हाथों करवाया।
डॉ जसतिंदर गिल लुधियाना में सतगुरु प्रताप सिंह अपोलो अस्पताल में एमडी के तौर पर नियुक्त हैं। उन्होंने कहा कि वे जब भी किसी मरीज को सलाह देती थी तो वे थोड़े दिनों बाद भूल जाते थे। इस पर उन्होंने सोचा कि त्वचा और बालों की देखरेख के संबंध में एक किताब ही क्यों न लिखी जाए।
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उन्होंने कहा कि ज्यादातर लोग अपनी त्वचा का ख्याल नहीं रखते और अपने बालों के लिए मनमाने शैंपू और तेल खरीदते हैं। उन्हें पहले अपनी त्वचा को समझना चाहिए। सबसे आम बीमारी डैंड्रफ की है।
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सनस्क्रीन क्रीम नहीं लगाते लोग
डॉ. जसतिंदर ने कहा कि आमतौर पर ऑफिस में काम करने वाले लोग सनस्क्रीन क्रीम का उपयोग नहीं करते। ऑफिस में ज्यादातर एसी चलते है, जिस वजह से हवा बहुत खुश्क हो जाती है। उन्होंने कहा इस वजह से त्वचा सूख जाती है। इसलिए अपनी त्वचा को वेट रखे।
डॉ. गिल ने कहा कि इस किताब को लिखने के लिए उन्हें दस साल का समय लगा। वह जल्द ही अपनी नई किताब को विमोचन करेगी। इसमें बच्चों से संबंधित त्वचा रोग की जानकारी दी जाएगी।
गर्मियों में ऐसे रखें त्वचा का ख्याल
- गर्मियों में खूब पानी पीना चाहिए
- अपनी डाइट का ख्याल रखें
- दिन में कम से कम दो बार चेहरा धोए
मिल्खा सिंह की स्टोरी सुन शादी को हुई तैयार: निर्मल कौर
विमोचन के दौरान निर्मल कौर ने बताया कि मिल्खा सिंह को जानने से पहले वह पंजाब स्टेट खेल विभाग में डायरेक्टर ऑफ स्पोर्ट्स के तौर पर नियुक्त थीं। एक दिन मिल्खा सिंह ने उनको अपनी आपबीती सुनाई तो वह बहुत ही भावुक हो गई और उन्होंने मिल्खा सिंह के साथ विवाह के बंधन में बंधने का निर्णय लिया।
उन्होंने बताया कि भाग मिल्खा भाग फिल्म देखकर उनकी आंखों में आंसू आ गए थे। उन्होंने कहा कि मिल्खा सिंह पहले ऐसे जीवित खिलाड़ी हैं जिन पर फिल्म बनी और आजकल का युवा शायद यह भी नहीं जानता था कि मिल्खा सिंह को फ्लाइंग सिंह का खिताब किसने दिया।
उन्होंने कहा कि राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने बेहतरीन फिल्म बनाई है यह सिर्फ वहीं कर सकते थे। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म का 90 प्रतिशत हिस्सा सौ फीसदी सही था और सिर्फ 10 प्रतिशत फिल्म के अनुसार बनाया गया।