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बम धमकी ने खोली सुरक्षा की पोल: 30 स्कूलों की जांच में कम पड़े बम डिटेक्शन जवान
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ के 30 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी के बाद शहर की सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति उजागर हो गई। एक साथ इतने बड़े पैमाने पर जांच की जरूरत पड़ने पर बम डिटेक्शन टीम के सुरक्षाकर्मी कम पड़ गए। हालात ऐसे बने कि पुलिस को बीट बॉक्स और पुलिस चौकियों में तैनात जवानों को बुलेटप्रूफ जैकेट पहनाकर स्कूल परिसरों में सर्च ऑपरेशन के लिए भेजना पड़ा।
सुबह पुलिस कंट्रोल रूम में एक के बाद एक कॉल आने के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। धमकी की गंभीरता को देखते हुए सभी थानों और चौकियों को अलर्ट किया गया। जिन स्कूलों को धमकी मिली थी, वहां तत्काल पुलिस बल तैनात कर दिया गया। हालांकि किसी भी स्कूल से कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस संसाधनों की सीमाओं पर सवाल जरूर खड़े कर दिए।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, चंडीगढ़ पुलिस की बम डिटेक्शन टीमें केवल संदिग्ध वस्तु की पहचान तक सीमित हैं। बम को निष्क्रिय करने की आधुनिक सुविधा फिलहाल पुलिस के पास नहीं है। इससे पहले भी शहर में बम मिलने की घटनाओं में सेना या विशेष एजेंसियों की मदद से बम को निष्क्रिय कराया गया है। इस बार भी यदि कोई विस्फोटक मिलता तो अतिरिक्त एजेंसियों पर निर्भर रहना पड़ता।
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सूचना मिलते ही विभिन्न थानों से जवानों को लॉन्ग रेंज हथियारों और बुलेटप्रूफ जैकेट के साथ स्कूलों में भेजा गया। कई जगह बीट स्टाफ और चौकी इंचार्ज स्वयं मोर्चा संभालते नजर आए। पूरे मामले में सेक्टर-17 थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है जबकि साइबर क्राइम थाना की टीमें धमकी भरे ई-मेल के आईपी एड्रेस और सोर्स की जांच में जुटी हैं।
शाम साढ़े पांच बजे तक चला सर्च ऑपरेशन
बम डिटेक्शन की चार टीमें सुबह से शाम साढ़े पांच बजे तक अलग-अलग स्कूलों में सघन तलाशी लेती रहीं। हर टीम में लगभग छह जवान शामिल थे। सूत्रों के मुताबिक, महज 28 जवानों को एक साथ कई स्थानों पर जांच का जिम्मा सौंपना पड़ा। सभी टीमों ने सतर्कता के साथ जांच पूरी की लेकिन सीमित संसाधनों का दबाव साफ नजर आया।
बच्चों की सुरक्षा पर एसएसपी के सख्त निर्देश
एसएसपी कंवरदीप कौर ने बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए कि धमकी मिलने स्कूलों के साथ-साथ अन्य स्कूलों की भी जांच की जाए। बीट स्टाफ, पीसीआर, डॉग स्क्वॉयड और बम डिटेक्शन टीमें लगातार स्कूल परिसरों में तैनात रहीं और स्कूल स्टाफ से तकनीकी इनपुट भी जुटाए गए।
बम डिटेक्शन टीम में बिना प्रशिक्षण के 8 जवान
सूत्रों के मुताबिक चंडीगढ़ पुलिस की बम डिटेक्शन टीम में इस समय कुल 28 पुलिसकर्मी तैनात हैं। इनमें से आठ जवान ऐसे हैं जिन्होंने बम डिटेक्शन से संबंधित कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया है। हैरानी की बात यह है कि ये सभी पिछले तीन से चार वर्षों से इसी टीम में ड्यूटी कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि पूर्व डीजीपी के कार्यकाल के दौरान प्रशिक्षित जवानों का तबादला कर दिया गया जिसके बाद बिना कोर्स किए कर्मियों को टीम में शामिल कर लिया गया। बम डिटेक्शन का प्रशिक्षण जालंधर और मानेसर में कराया जाता है लेकिन पिछले करीब चार वर्षों से यह प्रशिक्षण नहीं हुआ है। ऐसे में बम की सूचना पर मौके पर पहुंचने वाले इन जवानों की जान के साथ-साथ आम लोगों की सुरक्षा भी जोखिम में रहती है।
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सुबह पुलिस कंट्रोल रूम में एक के बाद एक कॉल आने के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। धमकी की गंभीरता को देखते हुए सभी थानों और चौकियों को अलर्ट किया गया। जिन स्कूलों को धमकी मिली थी, वहां तत्काल पुलिस बल तैनात कर दिया गया। हालांकि किसी भी स्कूल से कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस संसाधनों की सीमाओं पर सवाल जरूर खड़े कर दिए।
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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, चंडीगढ़ पुलिस की बम डिटेक्शन टीमें केवल संदिग्ध वस्तु की पहचान तक सीमित हैं। बम को निष्क्रिय करने की आधुनिक सुविधा फिलहाल पुलिस के पास नहीं है। इससे पहले भी शहर में बम मिलने की घटनाओं में सेना या विशेष एजेंसियों की मदद से बम को निष्क्रिय कराया गया है। इस बार भी यदि कोई विस्फोटक मिलता तो अतिरिक्त एजेंसियों पर निर्भर रहना पड़ता।
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सूचना मिलते ही विभिन्न थानों से जवानों को लॉन्ग रेंज हथियारों और बुलेटप्रूफ जैकेट के साथ स्कूलों में भेजा गया। कई जगह बीट स्टाफ और चौकी इंचार्ज स्वयं मोर्चा संभालते नजर आए। पूरे मामले में सेक्टर-17 थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है जबकि साइबर क्राइम थाना की टीमें धमकी भरे ई-मेल के आईपी एड्रेस और सोर्स की जांच में जुटी हैं।
शाम साढ़े पांच बजे तक चला सर्च ऑपरेशन
बम डिटेक्शन की चार टीमें सुबह से शाम साढ़े पांच बजे तक अलग-अलग स्कूलों में सघन तलाशी लेती रहीं। हर टीम में लगभग छह जवान शामिल थे। सूत्रों के मुताबिक, महज 28 जवानों को एक साथ कई स्थानों पर जांच का जिम्मा सौंपना पड़ा। सभी टीमों ने सतर्कता के साथ जांच पूरी की लेकिन सीमित संसाधनों का दबाव साफ नजर आया।
बच्चों की सुरक्षा पर एसएसपी के सख्त निर्देश
एसएसपी कंवरदीप कौर ने बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए कि धमकी मिलने स्कूलों के साथ-साथ अन्य स्कूलों की भी जांच की जाए। बीट स्टाफ, पीसीआर, डॉग स्क्वॉयड और बम डिटेक्शन टीमें लगातार स्कूल परिसरों में तैनात रहीं और स्कूल स्टाफ से तकनीकी इनपुट भी जुटाए गए।
बम डिटेक्शन टीम में बिना प्रशिक्षण के 8 जवान
सूत्रों के मुताबिक चंडीगढ़ पुलिस की बम डिटेक्शन टीम में इस समय कुल 28 पुलिसकर्मी तैनात हैं। इनमें से आठ जवान ऐसे हैं जिन्होंने बम डिटेक्शन से संबंधित कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया है। हैरानी की बात यह है कि ये सभी पिछले तीन से चार वर्षों से इसी टीम में ड्यूटी कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि पूर्व डीजीपी के कार्यकाल के दौरान प्रशिक्षित जवानों का तबादला कर दिया गया जिसके बाद बिना कोर्स किए कर्मियों को टीम में शामिल कर लिया गया। बम डिटेक्शन का प्रशिक्षण जालंधर और मानेसर में कराया जाता है लेकिन पिछले करीब चार वर्षों से यह प्रशिक्षण नहीं हुआ है। ऐसे में बम की सूचना पर मौके पर पहुंचने वाले इन जवानों की जान के साथ-साथ आम लोगों की सुरक्षा भी जोखिम में रहती है।