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खूनी दस्त ठीक करना है जल्दी तो रोज खाओ हल्दी
आशीष वर्मा
Updated Fri, 22 Nov 2013 04:03 PM IST
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खाने को स्वादिष्ट बनाने वाली हल्दी के एक और गुण पर मेडिकल साइंस ने मुहर लगा दी है।
चंडीगढ़ पीजीआई की रिसर्च के मुताबिक खूनी दस्त (अल्सररेटिव कोलाइट्स) में हल्दी का इस्तेमाल एक अचूक इलाज है। सुबह-शाम लगातार आठ हफ्ते तक हल्दी लेने से रोगी को खूनी दस्त से छुटकारा मिल जाएगा।
इसके इस्तेमाल से आंत के जख्म भी पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। ५३ रोगियों पर आधारित यह रिसर्च हाल ही में पीजीआई में पूरी हुई है।
बेहतरीन रिजल्ट आने के बाद अब यह रिसर्च पेपर जल्द ही यूरोप से प्रकाशित होने वाले एक जरनल में प्रकाशित होने वाला है। रिसर्च के मुताबिक खूनी दस्त से पीडि़त ५३ मरीज को दो हिस्सों में बांटा गया।
२८ मरीजों के एक वर्ग को हल्दी दी गई, जबकि दूसरे २५ मरीजों के वर्ग को स्टार्च से बना हल्दी जैसा पाउडर दिया गया। आठ हफ्ते तक रोजाना इन मरीजों पर निगरानी रखी गई। उसके बाद जब आंत का टेस्ट किया गया तो जख्म पूरी तरह से भर चुके थे और दस्त में खून आना भी बंद हो गया था।
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क्यों आता है दस्त में खून
दस्त में खून आने की कई वजह हो सकती हैं। इनमें एक प्रमुख वजह कीटाणु होते हैं। कई लोगों के पेट में कीड़े होते हैं। ये कीड़े धीरे-धीरे आंत में जख्म कर देते हैं और दस्त में खून आने लगता है।
मेडिकल साइंस में इसका पुख्ता इलाज उपलब्ध है, जो काफी महंगा है। इलाज के दौरान दी जाने वाली दवाओं के अपने साइड इफेक्ट भी हैं। यह बीमारी करीब २० से ५० वर्ष की उम्र में होती है।
हल्दी का ऐसे करे प्रयोग
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में मिलने वाली अधिकतर हल्दी में मिलावट होती है। हल्दी में कुर्क मीन नाम की एक मेडिसिन प्रापर्टी है, जो दवाई का काम करती है।
सूखी हल्दी बाजार से खरीदें और उसे घर पर या बाजार की किसी चक्की में पिसवाएं। पीसने के दौरान ध्यान रखना होगा कि उसमें गर्माहट नहीं आनी चाहिए।
हल्दी को धीरे-धीरे पीसे जैसे ही गर्म होने लगे तो उसे रोक लें। हल्दी को पीसने तक यही क्रम अपनाना चाहिए। दस्त में खून आने से पीडि़त रोगियों को सुबह-शाम पांच ग्राम हल्दी खानी होगी।
कच्ची हल्दी भी खा सकते हैं। हल्दी को गर्म पानी में उबालना नहीं चाहिए। रिसर्च से पहली हल्दी की शुद्धता मोहाली के नाइपर इंस्टीट्यूट में इसे चेक भी कराया गया। टेस्ट में कुर्क मीन करीब ३.५६ प्रतिशत निकला, जो काफी अच्छा माना जाता है।
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चंडीगढ़ पीजीआई की रिसर्च के मुताबिक खूनी दस्त (अल्सररेटिव कोलाइट्स) में हल्दी का इस्तेमाल एक अचूक इलाज है। सुबह-शाम लगातार आठ हफ्ते तक हल्दी लेने से रोगी को खूनी दस्त से छुटकारा मिल जाएगा।
इसके इस्तेमाल से आंत के जख्म भी पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। ५३ रोगियों पर आधारित यह रिसर्च हाल ही में पीजीआई में पूरी हुई है।
बेहतरीन रिजल्ट आने के बाद अब यह रिसर्च पेपर जल्द ही यूरोप से प्रकाशित होने वाले एक जरनल में प्रकाशित होने वाला है। रिसर्च के मुताबिक खूनी दस्त से पीडि़त ५३ मरीज को दो हिस्सों में बांटा गया।
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२८ मरीजों के एक वर्ग को हल्दी दी गई, जबकि दूसरे २५ मरीजों के वर्ग को स्टार्च से बना हल्दी जैसा पाउडर दिया गया। आठ हफ्ते तक रोजाना इन मरीजों पर निगरानी रखी गई। उसके बाद जब आंत का टेस्ट किया गया तो जख्म पूरी तरह से भर चुके थे और दस्त में खून आना भी बंद हो गया था।
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क्यों आता है दस्त में खून
दस्त में खून आने की कई वजह हो सकती हैं। इनमें एक प्रमुख वजह कीटाणु होते हैं। कई लोगों के पेट में कीड़े होते हैं। ये कीड़े धीरे-धीरे आंत में जख्म कर देते हैं और दस्त में खून आने लगता है।
मेडिकल साइंस में इसका पुख्ता इलाज उपलब्ध है, जो काफी महंगा है। इलाज के दौरान दी जाने वाली दवाओं के अपने साइड इफेक्ट भी हैं। यह बीमारी करीब २० से ५० वर्ष की उम्र में होती है।
हल्दी का ऐसे करे प्रयोग
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में मिलने वाली अधिकतर हल्दी में मिलावट होती है। हल्दी में कुर्क मीन नाम की एक मेडिसिन प्रापर्टी है, जो दवाई का काम करती है।
सूखी हल्दी बाजार से खरीदें और उसे घर पर या बाजार की किसी चक्की में पिसवाएं। पीसने के दौरान ध्यान रखना होगा कि उसमें गर्माहट नहीं आनी चाहिए।
हल्दी को धीरे-धीरे पीसे जैसे ही गर्म होने लगे तो उसे रोक लें। हल्दी को पीसने तक यही क्रम अपनाना चाहिए। दस्त में खून आने से पीडि़त रोगियों को सुबह-शाम पांच ग्राम हल्दी खानी होगी।
कच्ची हल्दी भी खा सकते हैं। हल्दी को गर्म पानी में उबालना नहीं चाहिए। रिसर्च से पहली हल्दी की शुद्धता मोहाली के नाइपर इंस्टीट्यूट में इसे चेक भी कराया गया। टेस्ट में कुर्क मीन करीब ३.५६ प्रतिशत निकला, जो काफी अच्छा माना जाता है।