Haryana: जहां कभी नहीं जीती भाजपा, वहां इस रणनीति से ढहा रही किला, पहले जींद अब आदमपुर जीता
भव्य को मंत्रिमंडल में शामिल करने के कयास भी लगाए जा रहे हैं, जिनके पूरा होने में कई तरह की अड़चनें हैं। मंत्रिमंडल में कोई जगह फिलहाल खाली नहीं है। मुख्यमंत्री सहित मंत्रिमंडल में 14 मंत्री पद पूरा भर चुके हैं। 90 विधायकों वाली विधानसभा के लिहाज से इतने ही मंत्री बन सकते हैं। इसे लेकर हाईकोर्ट में केस भी विचाराधीन है।
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हरियाणा में भाजपा ने इनेलो और कांग्रेस के गढ़ों को बड़े राजनीतिक परिवारों के रसूख के सहारे ढहाया है। जींद में भाजपा कभी नहीं जीती थी, पहली बार यहां उपचुनाव में ही पार्टी ने जनवरी 2019 में कमल खिलाया। अब आदमपुर में जींद का इतिहास दोहराया है। जींद में पूर्व विधायक हरि चंद मिड्ढा का नाम और काम भाजपा की जीत का आधार बना तो आदमपुर में भजनलाल के नाम पर नैया पार हुई।
भाजपा सरकार के आठ साल के कार्यकाल में चार उपचुनाव हुए, जिनमें पार्टी ने दो जीते और दो हारे हैं। पिछले कार्यकाल में एक और इस सरकार के कार्यकाल में तीन उपचुनाव अब तक हो चुके हैं। आदमपुर में भव्य बिश्नोई की जीत के बाद अब भाजपा व भजनलाल परिवार पर जनता से किए वादे पूरा करने का दबाव भी रहेगा।
भव्य पहली बार ही विधानसभा पहुंचे हैं और अब वह हरियाणा के राजनीतिक इतिहास में सबसे कम उम्र 29 साल के युवा विधायक हो गए हैं, इससे पहले यह गौरव डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला को प्राप्त था। वह सबसे कम उम्र 34 साल के विधायक थे।
मंत्रिमंडल में शामिल होने में कई अड़चनें
भव्य को मंत्रिमंडल में शामिल करने के कयास भी लगाए जा रहे हैं, जिनके पूरा होने में कई तरह की अड़चनें हैं। मंत्रिमंडल में कोई जगह फिलहाल खाली नहीं है। मुख्यमंत्री सहित मंत्रिमंडल में 14 मंत्री पद पूरा भर चुके हैं। 90 विधायकों वाली विधानसभा के लिहाज से इतने ही मंत्री बन सकते हैं। इसे लेकर हाईकोर्ट में केस भी विचाराधीन है।
याचिकाकर्ता की दलील है कि नियमानुसार मुख्यमंत्री सहित कुल 13 मंत्री ही होने चाहिए। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आते समय कुलदीप बिश्नोई की भव्य को विधानसभा उपचुनाव लड़ाने की मांग पार्टी पूरा कर चुकी है। अब कुलदीप को ही राजनीतिक तौर पर एडजस्ट किया जाना है। उनके बेटे को मंत्री बनाने के लिए भाजपा किसी वरिष्ठ मंत्री का पत्ता काटने से गुरेज ही करेगी। चूंकि, क्षेत्र और अन्य समीकरणों को देखते हुए मंत्रिमंडल के सभी पद भरे गए हैं। जजपा कोटे से मुख्यमंत्री के अलावा दो मंत्री हैं। उनके साथ तो वैसे ही कोई छेड़छाड़ संभव नहीं है। हिसार से डॉ. कमल गुप्ता पहले ही कैबिनेट रैंक के मंत्री हैं। ऐसे में भव्य को मंत्रिमंडल में शामिल करना भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के लिए आसान नहीं है।
जाटलैंड की सीटें नहीं जीत पाई भाजपा
इस सरकार में पहले बरोदा में छह बार के कांग्रेस विधायक श्रीकृष्ण हुड्डा की मृत्यु के कारण उपचुनाव हुआ। यहां भाजपा के योगेश्वर दत्त कांग्रेस के इंदुराज नरवाल से हार गए। उसके बाद किसान आंदोलन के बीच इनेलो विधायक अभय चौटाला के इस्तीफा देने पर ऐलनाबाद उपचुनाव की नौबत आई। यहां भाजपा के गोविंद कांडा को अभय चौटाला से पराजय झेलनी पड़ी। दोनों ही सीटें जाट बहुल मानी जाती हैं, इसलिए यहां भाजपा जीत दर्ज नहीं कर पाई।
विधानसभा का अंक गणित
- दल विधायक संख्या
- भाजपा 41
- कांग्रेस 30
- जजपा 10
- निर्दलीय 07
- हलोपा 01
- इनेलो 01
भजनलाल परिवार में अब सत्ता का विधायक
भजनलाल परिवार में अब सत्ता का विधायक हैं। 2005 में कांग्रेस सरकार आने पर भजनलाल को सीएम न बनाकर आलाकमान ने भूपेंद्र हुड्डा को कमान सौंप दी थी। इसके बाद भजनलाल सरकार में शामिल नहीं हुए। अपने बड़े बेटे चंद्रमोहन बिश्नोई को डिप्टी सीएम बनाया। दो साल ही भजनलाल सरकार के साथ रहे और उसके बाद अपनी पार्टी हजकां-बीएल बना ली। इसके बाद से 2022 तक सरकार के विरुद्ध ही भजनलाल परिवार से विधायक बनते रहे।
उपचुनाव में इनेलो नहीं दिखा पाई कोई कमाल
आदमपुर उपचुनाव में इनेलो कोई कमाल नहीं दिखा पाई। पार्टी का निराशाजनक प्रदर्शन जारी रहा। अभय चौटाला के रूप में इकलौते विधायक वाली इनेलो को अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए 2024 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कड़ी मेहनत करनी होगी। पार्टी उम्मीदवार कुरड़ाराम अपनी जमानत तक नहीं बचा सके। उन्होंने टिकट न मिलने पर कांग्रेस से बगावत कर इनेलो का दामन थामा था।
पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला ने उपचुनाव में जोरशोर से प्रचार किया। अभय चौटाला भी दिन-रात फील्ड में डटे रहे लेकिन जनता ने उन्हें समर्थन नहीं दिया। इनेलो उम्मीदवार सिर्फ वोट कटवा साबित हुए। 2014 में मुख्य विपक्षी दल इनेलो का प्रदेश में जनाधार लगातार सिमटा है। 2019 विधानसभा चुनाव से पहले इनेलो में फूट के साथ ही चौटाला परिवार भी टूटा। जननायक जनता पार्टी के बनने के बाद इनेलो के कैडर में लगातार सेंध लगी है। पिछले आम चुनाव से पहले उनके अधिकतर विधायक पार्टी छोड़कर भाजपा और जजपा में शामिल हो गए थे। इससे पार्टी को बड़े स्तर पर नुकसान हुआ और सिर्फ अभय चौटाला ही ऐलनाबाद से जीत हासिल कर सके।