फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   BJP Strategy to win Haryana Assembly Elections 2019, Congress

हरियाणा विधानसभा चुनाव में 42 साल बाद 75 का आंकड़ा छूने को बेकरार भाजपा, समीकरण देखिए

Thu, 22 Aug 2019 09:43 AM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 22 Aug 2019 09:43 AM IST
विज्ञापन
BJP Strategy to win Haryana Assembly Elections 2019, Congress
अमित शाह, सीएम खट्टर - फोटो : फाइल फोटो
हरियाणा में सत्तारूढ़ भाजपा 'अबकी बार 75 पार' के नारे के साथ चुनावी दंगल में ताल ठोकने जा रही है। पार्टी ने मिशन-75 को पूरा करने के लिए रणनीतिक बिसात भी बिछा दी है। मगर, 1967 से लेकर 2014 तक हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम का आंकलन किया जाए तो आज तक एक बार ही हरियाणा में कोई राजनीतिक दल 75 सीटें जीत पाया है। 1977 में जनता पार्टी ने आपातकाल के गुस्से का फायदा उठाते हुए कांग्रेस को चारों खाने चित कर 75 सीटें जीती थी।
विज्ञापन


कांग्रेस मात्र तीन सीटों पर सिमट गई थी। वीएचपी ने पांच और निर्दलीय उम्मीदवार पांच सीटों पर विजयी हुए थे। अब 42 साल बाद भाजपा इस आंकड़े को छूने के लिए बेकरार है। 1977 से पहले या बाद में कोई दल 75 के आंकड़े को न तो पार कर पाया, न ही छू पाया। इस बार अक्टूबर में होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा ने मिशन-75 रखा है। भाजपा अगर इस बार यह लक्ष्य हासिल करने में सफल हुई तो इतिहास दोहराया जाएगा। इससे ज्यादा सीटें जीती तो नया इतिहास बनेगा।
विज्ञापन


भाजपा ने लक्ष्य हासिल करने के लिए एजेंडा सेट कर लिया है। मुख्यमंत्री के तौर पर मनोहर लाल ही भाजपा के चेहरा होंगे और जिताऊ उम्मीदवारों को ही मैदान में उतारा जाएगा। मुद्दे भी तय हैं। लोकसभा चुनाव की तर्ज पर विधानसभा चुनाव में भी राष्ट्रवाद सबसे बड़ा मुद्दा होगा। अनुच्छेद-370 हटाने को और विकास कार्यों को आधार बनाकर भाजपा जनता के बीच जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

1977 में ही 81 से बढ़कर 90 हुई थी सीटें

1977 के चुनावों में ही हरियाणा में विधानसभा सीटों को 81 से बढ़ाकर 90 किया गया था। उस समय देश व प्रदेश में आपातकाल के कारण कांग्रेस विरोधी लहर थी। उसी में कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया था। इस समय में भी देश में कांग्रेस को जनता नकार चुकी है। लोकसभा चुनावों में हरियाणा में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल पाया है। इससे भाजपा अपने मिशन-75 को पूरा करने के लिए और ज्यादा मुखर है।

कांग्रेस की अंतर्कलह से बड़ा फायदा
हरियाणा में भाजपा को सबसे बड़ा फायदा विपक्ष में जबरदस्त फूट होने का भी मिल रहा है। कांग्रेस छह गुटों में बंटी हैं। बड़े नेता एक-दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहा रहे। कांग्रेस कार्यकर्ता इस कारण असमंजस में है। यही स्थिति रही तो कांग्रेस के लिए सत्ता में वापसी आसान नहीं होगी। भाजपा ने इनेलो के दस विधायकों, चार निर्दलीय और एक बसपा निष्कासित विधायक को ज्वाइन कराकर खुद की स्थिति बेहद मजबूत कर ली है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed