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Chandigarh News: लोकसभा में भाजपा ने जाति और क्षेत्र के मजबूत मोहरों पर खेला दांव
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चार सांसदों के टिकट काटकर नए मोहरों को मैदान में उतारा
पूर्व सांसद रत्नलाल कटारिया की पत्नी को टिकट दे सहानुभूति की उम्मीद
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा की सभी 10 लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी घोषित करने में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों का पूरा ध्यान रखा है। भाजपा ने उन क्षेत्रीय नेताओं को तवज्जो दी है, जिनका अपने-अपने इलाकों में प्रभाव है। एंटी इंकम्बेंसी से बचने के लिए भाजपा ने अपने मौजूदा चार सांसदों की टिकट काटी है और इनके स्थानों पर नए चेहरों को मौका दिया है। अंबाला में पूर्व सांसद रतनलाल कटारिया के निधन के बाद सहानुभूति को देखते हुए उनकी पत्नी बंतो कटारिया को मैदान में उतारा है।
भाजपा ने जिन चार सांसदों की टिकट काटी है, उनमें से करनाल से संजय भाटिया, सिरसा से सुनीता दुग्गल, कुरुक्षेत्र से नायब सैनी और सोनीपत से रमेश कौशिक के नाम शामिल हैं। शेष छह प्रत्याशी पुराने हैं या फिर पिछले सांसद के परिवार से हैं। जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों की बात करें तो भाजपा ने अहीरवाल में अपना प्रभाव रखने वाले राव इंद्रजीत सिंह को तीसरी बार प्रत्याशी बनाया है। इसी प्रकार फरीदाबाद से कृष्णपाल गुर्जर पर तीसरी बार विश्वास जताया है। दोनों ही नेताओं का अपने अपने क्षेत्र और जाति यादव और गुर्जर समाज पर पूरा प्रभाव है। भिवानी से धर्मबीर सिंह जाट नेता हैं और चौधरी बंसीलाल परिवार को दशकों से टक्कर देते आ रहे हैं। वहीं, सिरसा से सुनीता दुग्गल के स्थान पर कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष रहे अशोक तंवर पर दांव खेला है। तंवर अनुसूचित जाति के बड़े नेता हैं और वह सिरसा से पहले सांसद रह चुके हैं।
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रणजीत को मैदान में उतार अन्य दलों के बदलेंगे समीकरण
भाजपा ने रणजीत चौटाला को हिसार से मैदान में उतारकर अन्य दलों को अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर कर दिया है। क्योंकि हिसार में ताऊ देवीलाल के चौटाला परिवार को दबदबा है। अब क्योंकि इनेलो टूट तक दो पार्टियों में बंट चुकी है। इनेलो और जजपा दोनों ही पार्टी अपनी सियासी जमीन मजबूत करने की कोशिश में है। इनेलो की ओर से सुनैना चौटाला का नाम चल रहा है, जबकि हिसार से जजपा के प्रत्यासी के तौर पर नैना चौटाला या फिर परिवार का कोई और सदस्य आ सकता है। लेकिन रणजीत चौटाला के आने के बाद अन्य दलों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
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जीटी बेल्ट पर एससी, वैश्य, पंजाबी और ब्राह्मणों को साधा
जीटी बेल्ट की बात करें तो भाजपा ने एससी, वैश्य, पंजाबी और ब्राह्मण समाज को साधने की कोशिश की है। अंबाला से बंतो कटारिया, कुरुक्षेत्र से नवीन जिंदल, करनाल से मनोहर लाल और सोनीपत से मोहन लाल बड़ोली को टिकट दी हैं। इन चारों ही चेहरों का अपने अपने क्षेत्र और समाज पर प्रभाव है और समाज उनको नेता के रूप में मानता है। इनमें सबसे अधिक पेच कुरुक्षेत्र की सीट को लेकर फंसा था, क्योंकि नवीन जिंदल को भाजपा में लाने की तैयारियां थी, लेकिन बार बार इसमें देरी हो रही थी, लेकिन रविवार को आनन-फानन में भाजपा ज्वाइन कराई गई और तुरंत टिकट घोषित कर दी गई।
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पूर्व सांसद रत्नलाल कटारिया की पत्नी को टिकट दे सहानुभूति की उम्मीद
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा की सभी 10 लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी घोषित करने में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों का पूरा ध्यान रखा है। भाजपा ने उन क्षेत्रीय नेताओं को तवज्जो दी है, जिनका अपने-अपने इलाकों में प्रभाव है। एंटी इंकम्बेंसी से बचने के लिए भाजपा ने अपने मौजूदा चार सांसदों की टिकट काटी है और इनके स्थानों पर नए चेहरों को मौका दिया है। अंबाला में पूर्व सांसद रतनलाल कटारिया के निधन के बाद सहानुभूति को देखते हुए उनकी पत्नी बंतो कटारिया को मैदान में उतारा है।
भाजपा ने जिन चार सांसदों की टिकट काटी है, उनमें से करनाल से संजय भाटिया, सिरसा से सुनीता दुग्गल, कुरुक्षेत्र से नायब सैनी और सोनीपत से रमेश कौशिक के नाम शामिल हैं। शेष छह प्रत्याशी पुराने हैं या फिर पिछले सांसद के परिवार से हैं। जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों की बात करें तो भाजपा ने अहीरवाल में अपना प्रभाव रखने वाले राव इंद्रजीत सिंह को तीसरी बार प्रत्याशी बनाया है। इसी प्रकार फरीदाबाद से कृष्णपाल गुर्जर पर तीसरी बार विश्वास जताया है। दोनों ही नेताओं का अपने अपने क्षेत्र और जाति यादव और गुर्जर समाज पर पूरा प्रभाव है। भिवानी से धर्मबीर सिंह जाट नेता हैं और चौधरी बंसीलाल परिवार को दशकों से टक्कर देते आ रहे हैं। वहीं, सिरसा से सुनीता दुग्गल के स्थान पर कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष रहे अशोक तंवर पर दांव खेला है। तंवर अनुसूचित जाति के बड़े नेता हैं और वह सिरसा से पहले सांसद रह चुके हैं।
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रणजीत को मैदान में उतार अन्य दलों के बदलेंगे समीकरण
भाजपा ने रणजीत चौटाला को हिसार से मैदान में उतारकर अन्य दलों को अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर कर दिया है। क्योंकि हिसार में ताऊ देवीलाल के चौटाला परिवार को दबदबा है। अब क्योंकि इनेलो टूट तक दो पार्टियों में बंट चुकी है। इनेलो और जजपा दोनों ही पार्टी अपनी सियासी जमीन मजबूत करने की कोशिश में है। इनेलो की ओर से सुनैना चौटाला का नाम चल रहा है, जबकि हिसार से जजपा के प्रत्यासी के तौर पर नैना चौटाला या फिर परिवार का कोई और सदस्य आ सकता है। लेकिन रणजीत चौटाला के आने के बाद अन्य दलों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
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जीटी बेल्ट पर एससी, वैश्य, पंजाबी और ब्राह्मणों को साधा
जीटी बेल्ट की बात करें तो भाजपा ने एससी, वैश्य, पंजाबी और ब्राह्मण समाज को साधने की कोशिश की है। अंबाला से बंतो कटारिया, कुरुक्षेत्र से नवीन जिंदल, करनाल से मनोहर लाल और सोनीपत से मोहन लाल बड़ोली को टिकट दी हैं। इन चारों ही चेहरों का अपने अपने क्षेत्र और समाज पर प्रभाव है और समाज उनको नेता के रूप में मानता है। इनमें सबसे अधिक पेच कुरुक्षेत्र की सीट को लेकर फंसा था, क्योंकि नवीन जिंदल को भाजपा में लाने की तैयारियां थी, लेकिन बार बार इसमें देरी हो रही थी, लेकिन रविवार को आनन-फानन में भाजपा ज्वाइन कराई गई और तुरंत टिकट घोषित कर दी गई।