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Hindi News ›   Chandigarh ›   BJP MP from Bijnor district, appeared in court

बिजनौर के भाजपा सांसद चंडीगढ़ जिला अदालत में हुए पेश, ये है मामला

Sat, 17 Sep 2016 01:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 17 Sep 2016 01:09 AM IST
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BJP MP from Bijnor district, appeared in court
- फोटो : Demo Pic
भारतीय जनता पार्टी के बिजनौर से सांसद राजकुमार भारतेंद्र सिंह एक केस के सिलसिले में शुक्रवार को जिला अदालत में पेश हुए। संबंधित केस उनकी पत्नी की ओर से दायर किया गया है। बच्चों के भरण पोषण के लिए मासिक भत्ते संबंधी केस में पिछली सुनवाई पर अदालत ने उन्हें अदालत में पेश होने को कहा था। 
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शुक्रवार को उन्होंने बच्चों के लिए 1.90 लाख रुपये अदालत में जमा करवाए। वहीं अदालत ने सांसद को आदेश दिए कि वह बच्चों को प्रति महीना 1.10 लाख रुपये देंगे। अदालत ने अगली सुनवाई पर मेंटिनेंस पाने वाले तीनों बच्चों को भी कोर्ट में पेश करने को कहा है। शिकायतकर्ता पक्ष के वकील जीएस संधू ने बताया कि तीनों बच्चों के मेंटिनेंस के एरियर के तौर पर अभी प्रतिवादी पक्ष को 14.10 लाख रुपये और जमा करवाने हैं। 
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इससे पहले फरवरी 2016 में राजकुमार भारतेंद्र को उनकी पत्नी सेक्टर-8 स्थित सलोनी सिंह की अर्जी पर रकम के आदेश दिए थे। 23 अगस्त को अदालत राजकुमार भारतेंद्र के कंडीशनल अरेस्ट वारंट भी जारी कर चुकी है। उनकी पत्नी द्वारा उनके खिलाफ प्रोटेक्शन ऑफ वुमेन फ्रॉम डोमेस्टिक वायलंस एक्ट के तहत वर्ष  2013 में केस दायर किया गया था।
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यह है मामला

BJP MP from Bijnor district, appeared in court
सांसद राजकुमार भारतेंद्र सिंह के खिलाफ उनकी पत्नी सेक्टर-8बी निवासी सलोनी सिंह ने वर्ष 2013 में संबंधित शिकायत दायर की थी। प्रोटेक्शन ऑफ वुमेन फ्रॉम डोमेस्टिक वायलंस एक्ट की धारा 23 के तहत उन्होंने अंतरिम राहत की अर्जी दायर की थी। इस अर्जी पर सुनवाई करते हुए जिला अदालत ने उनके बेटे रणंजय सिंह के लिए 25 हजार और बेटियों के लिए 15-15 हजार रुपये प्रति माह मेंटेनेंस मंजूर किया था। यह मेंटेनेंस भारतेंद्र सिंह को देना था।

वहीं मामले में प्रतिवादी पक्ष की ओर से कहा गया था कि उनके (भारतेंद्र सिंह) द्वारा दायर तलाक की अर्जी के जवाब में संबंधित शिकायत दायर की गई। साथ ही कहा गया था कि वह उन्हें पूरी सुविधाएं प्रदान करवा रहे हैं। ऐसे में इस अर्जी का कोई औचित्य नहीं बनता। यह केवल उनकी सामाजिक छवि खराब करने के मकसद से दायर की गई है। कोर्ट फैसले के बावजूद मंथली मेंटेनेंस न देने पर वर्ष 2015 में ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट में अदालत के आदेशों की अवहेलना पर एग्जीक्यूशन एप्लीकेशन दायर की गई थी। 
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