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Hindi News ›   Chandigarh ›   BJP decided to go ahead in Punjab Assembly elections 2022 with alliance in Captain Amarinder Singh

पंजाब विधानसभा चुनाव: गठबंधन में कैप्टन के सहारे आगे बढ़ेगी भाजपा, कई सीटों पर पीएलसी के चिह्न पर चुनाव लड़ेंगे भाजपा प्रत्याशी

Thu, 23 Dec 2021 02:48 PM IST
निवेदिता वर्मा हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 23 Dec 2021 02:48 PM IST
सार

शिअद के साथ 25 साल तक चले गठबंधन में भाजपा को दूसरे नंबर की पार्टी के रूप में 23 सीटें ही लड़ने के लिए मिल पाती थीं। पंजाब में 38.5 फीसदी हिंदू वोटर हैं और 45 शहरी सीटों पर हिंदू या तो बहुसंख्यक हैं या फिर हार-जीत का फैसले को प्रभावित करने में सक्षम हैं। इस बार भाजपा की नजर इन्हीं शहरी सीटों और हिंदू वोटरों पर हैं।

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BJP decided to go ahead in Punjab Assembly elections 2022 with alliance in Captain Amarinder Singh
अमित शाह के साथ कैप्टन अमरिंदर सिंह। - फोटो : फाइल

विस्तार

भाजपा ने पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की पार्टी- पंजाब लोक कांग्रेस (पीएलसी) के साथ गठबंधन के सहारे आगे बढ़ने का फैसला ले लिया है। हालांकि इस गठबंधन में भाजपा ही बड़ी पार्टी होगी और प्रदेश की 70 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी। लेकिन किसानों के गुस्से के कारण अब तक चिंतित पार्टी अपने कई प्रत्याशियों को पीएलसी के चिन्ह पर चुनाव में उतारने की योजना बना रही है।

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वहीं इस गठबंधन के तीसरे घटक संयुक्त अकाली दल में फूट पड़ने के हालात बनने लगे हैं। ब्रह्मपुरा समेत कई अकाली नेता भाजपा से गठबंधन को राजी नहीं हैं। नई पार्टी का गठन करने के साथ ही कैप्टन ने भाजपा के साथ गठबंधन कर आगामी विधानसभा चुनाव में उतरने का एलान कर दिया था। इस गठबंधन को मूर्त रूप देने के लिए कैप्टन कई बार दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर आए, लेकिन भाजपा हाईकमान द्वारा गठबंधन को लेकर चुप्पी साधे रखी गई।

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शेखावत से मुलाकात के बाद बना था गठबंधन

अमित शाह ने तो गठबंधन के लिए अकाली नेताओं को भाजपा की प्राथमिकता बता दिया था। आखिरकार केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की चंडीगढ़ में कैप्टन से मुलाकात के बाद गठबंधन का मुद्दा आगे बढ़ा। इसके लिए वह अकाली दल बादल से अलग हुए सीनियर टकसाली नेताओं के संयुक्त अकाली दल के प्रधान सुखदेव सिंह ढींढसा से भी मिले। कैप्टन ने भाजपा और सीनियर टकसालियों के इस गठबंधन में भी शामिल होने पर सहमति जता दी थी। गठबंधन के तहत कैप्टन की पीएलसी 20 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी जबकि भाजपा ने अपने लिए 70 से अधिक सीटों का अवलोकन कर लिया है। पार्टी कार्यकर्ता ‘नवां पंजाब-भाजपा दे नाल’ नारे के साथ राज्य भर में घूमेंगे और नशा माफिया से मुक्ति तथा भ्रष्टाचार के खात्मे के संकल्प के साथ चुनाव में वोट मांगेंगे।

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पहली बार शिअद के बिना चुनाव में उतरेगी भाजपा

इस तरह कैप्टन जहां पहली बार कांग्रेस के बगैर चुनाव में उतरेंगे वहीं भाजपा भी शिअद से अलग होकर पहली बार इतने बड़े पैमाने पर अपने प्रत्याशियों को चुनाव में उतारेगी। शिअद के साथ गठबंधन में भाजपा को जहां शहरी वोटरों का समर्थन मिलता था, वहीं शिअद को ग्रामीण व सिख वोटरों का साथ मिल जाता था। वैसे शिअद के साथ 25 साल तक चले गठबंधन में भाजपा को दूसरे नंबर की पार्टी के रूप में 23 सीटें ही लड़ने के लिए मिल पाती थीं। पंजाब में 38.5 फीसदी हिंदू वोटर हैं और 45 शहरी सीटों पर हिंदू या तो बहुसंख्यक हैं या फिर हार-जीत का फैसले को प्रभावित करने में सक्षम हैं। इस बार भाजपा की नजर इन्हीं शहरी सीटों और हिंदू वोटरों पर हैं। वहीं, कैप्टन का साथ मिलने और सीनियर टकसाली नेताओं की पार्टी से भाजपा को यह भी उम्मीद है कि कैप्टन के समर्थक कांग्रेसी वर्कर और वोटर हार-जीत में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

2017 में अच्छा नहीं रहा भाजपा का प्रदर्शन

पंजाब में 2017 के विधानसभा चुनाव में शिअद के साथ गठबंधन के तहत चुनाव में उतरी भाजपा को वोटरों ने निराश किया था। पार्टी ने 23 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन उसे 3 सीटों पर ही जीत मिली। इस चुनाव में भाजपा का कुल वोट प्रतिशत भी महज 5.4 फीसदी रह गया था।

कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकता है कैप्टन-भाजपा गठबंधन

2012 के विधानसभा चुनाव में मौजूदा वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल अपनी पंजाब पीपुल्स पार्टी बनाकर चुनाव में उतरे थे। हालांकि उनकी पार्टी एक भी सीट जीत नहीं सकी लेकिन पीपीपी के प्रत्याशियों ने कुल 6 फीसदी वोट हासिल करके कांग्रेस की जीत का रास्ता रोक दिया था और शिअद-भाजपा गठबंधन को सत्ता में बने रहने का मौका मिल गया था। लेकिन इस बार स्थिति भिन्न है। यदि भाजपा अपने 2017 के प्रदर्शन में सुधार करती है और कैप्टन की पार्टी किसानी मुद्दे के चलते वोट खींचने में सफल रहती है तो यह गठबंधन सत्ताधारी कांग्रेस को नुकसान पहुंचाएगा।

भाजपा से गठबंधन पर संयुक्त अकाली दल में पड़ी फूट

भाजपा से गठबंधन करने पर शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) में बगावत के हालात बन गए हैं। पार्टी अध्यक्ष सुखदेव सिंह ढींढसा के फैसले को लेकर पार्टी के नेता और वर्करों में नाराजगी उभरकर सामने आने लगी है। सीनियर नेता रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा ने तो साफ कह दिया है कि अगर भाजपा से गठबंधन हुआ तो वह पार्टी में नहीं रहेंगे। उनका कहना है कि पार्टी के वर्करों ने इस बात पर पहले ही नाराजगी जताई है कि वह भाजपा से गठबंधन को राजी नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाए कि जब पार्टी सहमत नहीं तो फिर ढींढसा भाजपा से गठबंधन के लिए क्यों उत्साही हैं। उधर, पार्टी वर्करों का तर्क है कि भले ही केंद्र ने कृषि कानून वापस ले लिए हैं, लेकिन किसान आंदोलन के चलते लोगों में भाजपा के प्रति नाराजगी अब तक कायम है। इसके अलावा कैप्टन की कारगुजारी से भी लोग नाखुश हैं। ऐसे में भाजपा और कैप्टन के गठबंधन में शामिल होने से पार्टी को नुकसान हो सकता है।

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