विधानसभा चुनाव : 'सिद्धू से पूछो ! शीला बदनाम थी या कांग्रेस'
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चार फरवरी वो ऐतिहासिक दिन है जिस दिन पंजाब के विकास की गाथा एकबार फिर आगे बढ़ेगी। पंजाब में विकास की दर पिछले दस सालों में कांग्रेस के अब तक शासनकाल से कई गुना अधिक है।
सिद्धू नासमझ हैं, बहुत समझाया लेकिन नही माने। कांग्रेस में उनके जाने से कोई फर्क नही पड़ने वाला। यह कहना है देश के वित्तमंत्री अरुण जेटली का।
उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस पंजाब में सत्ता के सपने ले रही है वह ये नही जानती कि उसकी लुटिया पांच राज्यों में डूबने वाली है। अरुण जेटली ने कहा कि शिअद-भाजपा का साथ बीते 20 वर्षों से है।
दोनों पार्टियां मिलकर काम करती है। पंजाब का विकास इस बात का गवाह है कि पंजाब आने वाले पांच साल में देश का सबसे विकासशील राज्य होगा।
'सिद्धू को छोड़ो हम सेवा करने आए हैं कामेडी करने नही'
उन्होंने कहा कि पठानकोट में पाकिस्तानी आंतकियों ने जब कदम रखा तो हमारे सैनिकों ने उसका जवाब पाकिस्तान की धरती पर जाकर दिया। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान दुनिया भर में मुंह दिखाने का काबिल नही रहा।
इसी तरह कांग्रेस ने देश के दामन पर जो दलाली व भ्रष्टाचार का कलंक लगाया था मोदी सरकार ने उसे दुनिया के सामने धो डाला है। पंजाब में कांग्रेस के बयानबाजी के सिवा उसका कोई औचित्य नही है।
सिद्धू से पूछो ! शीला बदनाम थी या कांग्रेस
डिप्टी सीएम सुखबीर बादल जब स्पीच देने के लिए माइक पकड़ा तो सिद्धू के खिलाफ कुछ भाजपा नेताओं ने शोर मचाया। डिप्टी सीएम ने माइक संभालते ही श्रोताओं की लाइन में बैठे किसी भाजपाई ने कहा कि सिद्धू से पूछना चाहिए ! शीला बदनाम थी या कांग्रेस।
यह सुन डिप्टी सीएम हंसे फिर बोले सिद्धू को छोड़ो हम सेवा करने आए हैं कामेडी करने नही। पंजाब में विकास हमारा मुद्दा था और है। कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नही है इसलिए कांग्रेसी किसी को भी बदनाम कर देते हैं। सिद्धू जब भाजपा में थे तब उनकी भाजपा पार्टी मां थी, अब कांग्रेस में चले गए तो मां भूल गए।