{"_id":"58b871a04f1c1b026e830753","slug":"birthday-special-jaspal-bhatti-wife-savita-bhatti-special-interview","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"'भट्टी साहब होते तो मोदी जी नोटबंदी का फैसला वापस ले लेते'","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
'भट्टी साहब होते तो मोदी जी नोटबंदी का फैसला वापस ले लेते'
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 03 Mar 2017 09:38 AM IST
विज्ञापन
जसपाल भट्टी के जन्मदिन पर विशेष
- फोटो : File Photo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सविता भट्टी: जसपाल भट्टी का इतनी जल्दी जाना सिर्फ मुझे नहीं बल्कि पूरे देश को खलता है। जिंदगी में अक्सर कुछ बातें ऐसी होती हैं, जो अपने लोगों से ही शेयर की जा सकती हैं। वो अब मैं नहीं कर पाती हूं। उनकी वजह से मेरे अंदर कांफिडेंस आता था। वे जो भी लिखते थे, सबसे पहले मुझे दिखाते थे। अब वह सब मिसिंग हो गया है।
नोटबंदी के दौरान उन्हें सब लोगों ने याद किया। किसी ने लिखा कि यदि भट्टी साहब होते तो मोदी जी नोटबंदी का फैसला वापस ले लेते। वे अपनी बात इस तरीके से रखते थे कि हर कोई सोचने पर मजबूर हो जाता था। अब वैसी आवाज सुनाई नहीं देती। मुझे लगता है कोई भी उनका जैसा नहीं बन सकता। आज तो कोई विरोध करता है तो उसे गलियां मिलने लगती हैं। अपनी बात कहने के लिए वे किसी से भी नहीं डरते थे। मुझे याद है कि मुंबई में जब राज ठाकरे साहब उत्तर भारतीयों को भगा रहे थे, तब भट्टी साहब ने वहां जाकर उनका खुलकर विरोध किया था।
जो भी उनका स्वरूप था, वो ता उम्र वैसा ही रहा। जो पगड़ी का स्टाइल पहले था, वही उनके जाते वक्त भी था। देश में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है, जो जसपाल भट्टी जैसी कामेडी, स्टाइल और व्यंग्य कर पाए। कुछ लोग हैं जो अच्छा काम कर रहे हैं। एक दो लोगों के नाम मुझे याद हैं जैसे कि राणा रणबीर। अच्छा लिखते हैं। गहराई तक जाते हैं। अमित टंडन, पम्मी आंटी, सुनील ग्रोवर। और भी लोग हैं, लेकिन मुझे फिलहाल यही नाम याद आ रहे हैं। जसपाल भट्टी जी के हर प्रोग्राम में इंटरटेनमेंट के साथ एक सीख होती थी। आज ये चीज किसी भी प्रोग्राम में नहीं दिखतीं। ये भी मिसिंग है।
विज्ञापन
विज्ञापन
नोटबंदी के दौरान उन्हें सब लोगों ने याद किया। किसी ने लिखा कि यदि भट्टी साहब होते तो मोदी जी नोटबंदी का फैसला वापस ले लेते। वे अपनी बात इस तरीके से रखते थे कि हर कोई सोचने पर मजबूर हो जाता था। अब वैसी आवाज सुनाई नहीं देती। मुझे लगता है कोई भी उनका जैसा नहीं बन सकता। आज तो कोई विरोध करता है तो उसे गलियां मिलने लगती हैं। अपनी बात कहने के लिए वे किसी से भी नहीं डरते थे। मुझे याद है कि मुंबई में जब राज ठाकरे साहब उत्तर भारतीयों को भगा रहे थे, तब भट्टी साहब ने वहां जाकर उनका खुलकर विरोध किया था।
विज्ञापन
जो भी उनका स्वरूप था, वो ता उम्र वैसा ही रहा। जो पगड़ी का स्टाइल पहले था, वही उनके जाते वक्त भी था। देश में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है, जो जसपाल भट्टी जैसी कामेडी, स्टाइल और व्यंग्य कर पाए। कुछ लोग हैं जो अच्छा काम कर रहे हैं। एक दो लोगों के नाम मुझे याद हैं जैसे कि राणा रणबीर। अच्छा लिखते हैं। गहराई तक जाते हैं। अमित टंडन, पम्मी आंटी, सुनील ग्रोवर। और भी लोग हैं, लेकिन मुझे फिलहाल यही नाम याद आ रहे हैं। जसपाल भट्टी जी के हर प्रोग्राम में इंटरटेनमेंट के साथ एक सीख होती थी। आज ये चीज किसी भी प्रोग्राम में नहीं दिखतीं। ये भी मिसिंग है।
विज्ञापन
'उनकी सबसे ज्यादा जरूरत उस वक्त महसूस हुई जब मैंने राजनीति ज्वाइन की'
जसपाल भट्टी के जन्मदिन पर विशेष
- फोटो : अमर उजाला
उनके कुछ काम को मेरे बेटे ने संभाल लिया है। फिल्म डायरेक्शन, एडिटिंग और ट्रेनिंग का काम जसराज कर रहा है। नानसेंस क्लब की गतिविधियां मैं और भट्टी साहब के दोस्त करते रहते हैं। हम उनके काम को आगे बढ़ा रहे हैं। लेकिन उनके जैसा ह्यूूमर और स्टाइल नहीं ला पाते। जसराज पर भट्टी साहब का पूरा प्रभाव है, लेकिन उसका अपना अलग एक स्टाइल भी है। उसने कुछ भट्टी साहब की लिखी स्क्रिप्ट पर एक फिल्म बनाई है। उसके काम को देश में नहीं बल्कि विदेश में भी मान-सम्मान मिल रहा है।
जिंदगी में भट्टी साहब की कमी हर पल खलती है, लेकिन सबसे ज्यादा जरूरत उस वक्त महसूस हुई जब मैंने राजनीति ज्वाइन की थी। मुझे बाद में पता चला कि मैं राजनीति के लिए फिट नहीं थीं। यदि वे होते तो ये पिक्चर कभी नहीं आती, लेकिन इस दौरान मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला।
वे जब गए थे तब मुझे इस बात बहुत दुख हुआ था कि चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से कोई भी नहीं आया था, जबकि वे शहर की एक धरोहर थे। पिछले साल पूर्व एडवाइजर विजय कुमार देव की बदौलत ह्यूमर फेस्ट शुरू हुआ है। मैं उनसे एक बार मिली थी और उसके कुछ ही दिन बाद ही उन्होंने ह्यूूमर फेस्ट की परमिशन दे दी। सिर्फ 800 लोगों के बैठने की जगह थी, लेकिन किसी ने बताया कि 3500 से ज्यादा लोग आए थे। इस बार प्रशासन के सहयोग से ह्यूूमर फेस्ट का आयोजन हो रहा है। इस बार भी मुझे उम्मीद है कि काफी संख्या में लोग आएंगे।
जसपाल भट्टी के जन्मदिन के साथ उनके फेमस सीरियल ‘फ्लॉप शो’ को भी पूरे 25 साल हो रहे हैं। इस मौके पर उनकी टीम को इकट्ठा किया जा रहा है। ये देश में पहली बार है कि जब कोई फेस्ट हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी भाषा में एक साथ किया जा रहा है।
जिंदगी में भट्टी साहब की कमी हर पल खलती है, लेकिन सबसे ज्यादा जरूरत उस वक्त महसूस हुई जब मैंने राजनीति ज्वाइन की थी। मुझे बाद में पता चला कि मैं राजनीति के लिए फिट नहीं थीं। यदि वे होते तो ये पिक्चर कभी नहीं आती, लेकिन इस दौरान मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला।
वे जब गए थे तब मुझे इस बात बहुत दुख हुआ था कि चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से कोई भी नहीं आया था, जबकि वे शहर की एक धरोहर थे। पिछले साल पूर्व एडवाइजर विजय कुमार देव की बदौलत ह्यूमर फेस्ट शुरू हुआ है। मैं उनसे एक बार मिली थी और उसके कुछ ही दिन बाद ही उन्होंने ह्यूूमर फेस्ट की परमिशन दे दी। सिर्फ 800 लोगों के बैठने की जगह थी, लेकिन किसी ने बताया कि 3500 से ज्यादा लोग आए थे। इस बार प्रशासन के सहयोग से ह्यूूमर फेस्ट का आयोजन हो रहा है। इस बार भी मुझे उम्मीद है कि काफी संख्या में लोग आएंगे।
जसपाल भट्टी के जन्मदिन के साथ उनके फेमस सीरियल ‘फ्लॉप शो’ को भी पूरे 25 साल हो रहे हैं। इस मौके पर उनकी टीम को इकट्ठा किया जा रहा है। ये देश में पहली बार है कि जब कोई फेस्ट हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी भाषा में एक साथ किया जा रहा है।
ये दृश्य हमेशा याद आते हैं
जसपाल भट्टी के जन्मदिन पर विशेष
- फोटो : अमर उजाला
ये दृश्य हमेशा याद आते हैं
महंगाई के वक्त उन्होंने मुझे सब्जियों की माला पहनाई थी और खुद लौकी की टाई पहनी थी।
सुखना लेक पर वे कटोरी-चम्मच लेकर शर्मदान करने गए थे।
सुखना के सूखने पर उन्होंने जाकर वहां क्रिकेट खेला था। सुखना से उन्हें खास लगाव था।
बच्चों के स्कूल बैग भारी होने पर पर कहा था कि बच्चे डाक्टर व इंजीनियर बनें या न बनें वे कुली जरूर बनेंगे।
भ्रष्टाचार के खिलाफ उन्होंने संसद के सामने प्रदर्शन किया था। एक राजनीतिक पार्टी बनाई थी उसका नाम हवाला पार्टी दिया था।
ये सीख मिलती है
लाफ्टर एक मेडिटेशन का काम करता है। अच्छे ह्यूूमर के लिए हंसना जरूरी है।
कोई बात कहने के लिए तरीका अच्छा होना चाहिए।
दरियादिली होना चाहिए। हर किसी के लिए दिल में जगह होनी चाहिए।
निडरता। यदि आप कुछ कहना चाहते हैं तो डरे नहीं।
बनावटीपन नहीं होना चाहिए। भट्टी साहब ने अपने शख्सियत पर कोई प्रयोग नहीं किया।
महंगाई के वक्त उन्होंने मुझे सब्जियों की माला पहनाई थी और खुद लौकी की टाई पहनी थी।
सुखना लेक पर वे कटोरी-चम्मच लेकर शर्मदान करने गए थे।
सुखना के सूखने पर उन्होंने जाकर वहां क्रिकेट खेला था। सुखना से उन्हें खास लगाव था।
बच्चों के स्कूल बैग भारी होने पर पर कहा था कि बच्चे डाक्टर व इंजीनियर बनें या न बनें वे कुली जरूर बनेंगे।
भ्रष्टाचार के खिलाफ उन्होंने संसद के सामने प्रदर्शन किया था। एक राजनीतिक पार्टी बनाई थी उसका नाम हवाला पार्टी दिया था।
ये सीख मिलती है
लाफ्टर एक मेडिटेशन का काम करता है। अच्छे ह्यूूमर के लिए हंसना जरूरी है।
कोई बात कहने के लिए तरीका अच्छा होना चाहिए।
दरियादिली होना चाहिए। हर किसी के लिए दिल में जगह होनी चाहिए।
निडरता। यदि आप कुछ कहना चाहते हैं तो डरे नहीं।
बनावटीपन नहीं होना चाहिए। भट्टी साहब ने अपने शख्सियत पर कोई प्रयोग नहीं किया।