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बर्ड वाचिंग का जुनून ऐसा, ऑफिस जाते वक्त भी पक्षी दिखे तो जुट जाते हैं सिद्धार्थ

Tue, 18 Apr 2017 09:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 18 Apr 2017 09:27 AM IST
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Bird watcher Siddharth, chandigarh news, Environment lover
चंडीगढ़ के बर्ड वॉचर सिद्धार्थ नागर
बर्ड वाचिंग की आदत जिसमें एक बार पड़ जाती है, वह उसका मुरीद बन जाता है। सेक्टर 46 के रहने वाले सिद्धार्थ नागर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। उन्होंने करीब साढ़े पांच साल पहले बर्ड वाचिंग की शुरुआत की थी, लेकिन अब उनमें ऐसा जुनून छाया है कि जब भी उन्हें वक्त मिलता है, वे बर्ड वाचिंग करते हैं। कई बार तो ऐसा हुआ कि जब वे आफिस जा रहे थे, रास्ते में उन्हें खूबसूरत पक्षी मिले और वे बर्ड वाचिंग में जुट गए। उनकी गाड़ी में हर वक्त वरनाकुलर रहता है। उनको देखकर ही कई लोगों ने बर्ड वाचिंग का रास्ता चुना।
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प्रकृति प्रेमी थे, बर्ड वॉचर भी बन गए
सिद्धार्थ बताते हैं कि वे शुरू से ही प्रकृति प्रेमी रहे हैं। उन्हें ट्रैवलिंग का शौक है। एक बार वे गुजरात के गीर नेशनल पार्क में घूमने गए। वहां पर वे जब फोटोग्राफी कर रहे थे, तभी उन्हें कुछ खूबसूरत पक्षी दिखे। इन पक्षियों के बारे में जब वहां मौजूद गाइड के बारे में पूछा तो उसने पक्षियों के बारे में जानकारी दी और गुजरात के पक्षियों की एक बुक गिफ्ट में दी।
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जब उन्होंने किताब से बर्ड्स के बारे में जानकारी हासिल की तो उनमें दिलचस्पी बढ़ी। तभी उनके एक मित्र ने बताया कि  चंडीगढ़ में बर्ड रेस के बारे में सूचना दी। सिद्धार्थ ने बर्ड रेस में हिस्सा लिया और पहली ही रेस में उनकी टीम ने पहला पुरस्कार हासिल किया।
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अहंकार को खत्म कर देती बर्ड वाचिंग

Bird watcher Siddharth, chandigarh news, Environment lover
चंडीगढ़ के बर्ड वॉचर सिद्धार्थ नागर
अहंकार को खत्म कर देती बर्ड वाचिंग
सिद्धार्थ बताते हैं कि बर्ड वाचिंग करने से नेचर के प्रति सम्मान बढ़ता है। जब पक्षियों के रहन-सहन और उनके खानपान के बारे में जानेंगे तो जो व्यक्ति में अहंकार होता है, वह अपने आप खत्म हो जाता है। क्योंकि इंसान और जीव-जंतु सब इसी प्रकृति का हिस्सा है। सोचने का नजरिया बदलता है।

सिद्धार्थ ने सुनाई एक पक्षी की अद्भुत जानकारी
सिद्धार्थ ने बताया कि चंडीगढ़ के आसपास एक ‘श्राइक ’नामक पक्षी पाया जाता है। जो अपना शिकार बहुत ही दिलचस्प तरीके से करता है। पहले वह कीड़े-मकोड़े को मारता है और कांटे पर टांग देता है। इससे उसका खून टपकना शुरू हो जाता है। जब उसका खून पूरी तरह से टपकना बंद हो जाता है, तब वह अपने शिकार को खाता है।
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