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जिस स्कूल का नाम शहीद के नाम पर रखना था, उसे नौवीं कक्षा के बच्चे से उड़वाना चाहते थे आतंकी

Fri, 29 Mar 2019 05:27 PM IST
ajay kumar मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 29 Mar 2019 05:27 PM IST
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Big reveals,Terrorist was want to attack on school by a student
लेफ्टिनेंट उमर फयाज पर लिखी गई किताब - फोटो : अमर उजाला

कश्मीर के कुलगाम में रहने वाले भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट उमर फयाज को मौत के घाट उतारने के बाद भी आतंकियों के नापाक मंसूबे पूरे नहीं हुए थे। वह घाटी में दहशत का ऐसा माहौल बनाना चाहते थे कि कोई भी कश्मीरी युवा सेना में भर्ती होने को नहीं सोचे। उधर, भारतीय सेना भी आतंकियों का सफाया करने के साथ-साथ उनकी इस सोच और मंसूबों को भी मिटाने में लगी थी।

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इसी कड़ी में भारतीय सेना ने यह फैसला किया कि कश्मीरी युवाओं को प्रेरित करने और लेफ्टिनेंट उमर फयाज की शहादत को अमर बनाने के लिए उनके पैतृक गांव बीहीबाग के स्कूल का नाम ‘शहीद उमर फयाज’ के नाम पर रखा जाए। दो राजपूताना राइफल्स के निहत्थे लेफ्टिनेंट उमर फयाज की आतंकियों ने 9 मई 2017 को अपहरण कर हत्या कर दी थी। उमर अपनी बहन की शादी समारोह में शिरकत करने आए थे। लेकिन इलाके में सक्रिय आतंकी उमर के इंडियन आर्मी ज्वाइन करने से बेहद खफा थे और उन्हें निशाने पर लिए हुए थे।
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उमर की शहादत के बाद इंडियन आर्मी ने गांव बीहीबाग के स्कूल का नाम शहीद लेफ्टिनेंट उमर फयाज के नाम पर रखने के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसमें कई आर्मी अफसर, इलाके के मौजिज लोगों व स्कूली छात्रों को भी आमंत्रित किया गया था। आतंकियों ने इस कार्यक्रम के दौरान बड़ा आतंकी हमला करने की योजना बनाई। इसके लिए नौवीं कक्षा के एक छात्र को मोहरा बनाया गया। 

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यह छात्र अपनी विपरीत पारिवारिक परिस्थितियों की वजह से परेशान चल रहा था। उसका पिता उसकी मां को बहुत पीटता था और उसे तलाक दे चुका था। लेकिन वह बच्चा अपनी मां से बेइंतहा मोहब्बत करता था।

बच्चे की इसी परेशानी का फायदा उठाकर एक आतंकी ने इस बच्चे को हैंड ग्रेनेड दिया और उसका ब्रेनवॉश कर उसे अपने स्कूल के कार्यक्रम में यह कहकर भेज दिया कि जैसे ही सभी आर्मी अफसर आ जाएं तो इस हैंड ग्रेनेड को वहां फेंक देना। लेकिन बच्चे को कार्यक्रम की सिक्योरिटी में तैनात जवानों ने पहले ही राउंड अप कर लिया और बच्चे ने भी सारी साजिश उन्हें बता दी थी। 

इसके बावजूद सेना ने हैंड ग्रेनेड जब्त करने के बाद अफसरों के निर्देश पर उस बच्चे को कार्यक्रम में भाग लेने की अनुमति दी। क्योंकि इस कार्यक्रम में बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण काउंसलिंग प्रोग्राम रखा गया था। काउंसलिंग प्रोग्राम में वह बच्चा गुमसुम बैठा रहा और काउंसिलर भावना अरोड़ा ने जब बच्चे को कुरेदा तो बड़ी मासूमियत से बच्चे ने अपनी पारिवारिक घटना से लेकर हैंड ग्रेनेड से स्कूल उड़ाने तक की साजिश बयां कर दी।

आर्मी चीफ ने लिखी है किताब की प्रस्तावना

यह खुलासा लेफ्टिनेंट शहीद उमर फैयाज की जीवनी पर आधारित किताब ‘अंडॉन्टिड’ में हुआ है। इस पुस्तक को शोधकर्ता, काउंसिलर व लेखिका भावना अरोड़ा ने लिखी है। जबकि इंडियन आर्मी चीफ जनरल विपिन रावत ने इस किताब की प्रस्तावना लिखी है। चंडीगढ़ में इस पुस्तक के विमोचन पर भावना अरोड़ा ने बताया कि फयाज को उसकी आर्मी ज्वाइनिंग के छह माह के भीतर ही मार दिया गया था।

दरअसल, घाटी में आतंकी इस दहशत से कश्मीरी युवाओं में सेना ज्वाइन न करने का खौफ पैदा करना चाहते हैं। इसलिए उमर फयाज के बाद 7 और मूल कश्मीरी जवानों को आतंकियों ने इसी तरह अगवा कर मार दिया है। करीब एक साल बाद 2 अप्रैल 2018 को सेना ने 12 आतंकियों को मारा था, उनमें फयाज के दो हत्यारे आतंकी इशफाक मलिक और रियाज ठोकर भी शामिल थे। भावना के अनुसार सेना की अनुमति से महीनों की रिसर्च के बाद उन्होंने ये पुस्तक लिखी है।

‘उमर ने वास्तविक अर्थों में ‘कश्मीरियत’ को जिया है और उन्हें इतिहास में एक ऐसे नायक के रूप में जाना जाएगा, जिसने सभी बाधाओं के पार और सभी तरह के विरोध के खिलाफ जाकर राष्ट्र की सेवा करने का विकल्प चुना।’ - सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने किताब की प्रस्तावना में लिखा

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