{"_id":"57bb23aa4f1c1b9663d4fdce","slug":"big-relief-to-punjab-university-retired-professor-by-double-bench","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"सिंगल बेंच के खिलाफ डबल बेंच का फैसला, पीयू प्रोफेसरों को बड़ी राहत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिंगल बेंच के खिलाफ डबल बेंच का फैसला, पीयू प्रोफेसरों को बड़ी राहत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 22 Aug 2016 09:47 PM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की डबल बेंच ने सिंगल बेंच के खिलाफ फैसला देते हुए पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के रिटायर्ड प्रोफेसरों को बड़ी राहत दी है। इन 45 प्रोफेसरों की ओर से सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ डबल बेंच के समक्ष दायर की गई अपील पर सोमवार को सुनवाई करते हुए जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस सुदीप आहलुवालिया की खंडपीठ ने सिंगल बेंच के फैसले पर रोक लगा दी।
खंडपीठ ने पीयू कैंपस के इन 45 प्रोफेसरों को नई नियुक्ति (रि-एंप्लायमेंट) के रूप में फिर से सेवा में लेने के आदेश जारी करने के साथ ही पीयू की ओर से उन्हें अब तक मुहैया कराई गई सरकारी क्वार्टर और अन्य सुविधाएं भी बहाल रखने के आदेश दिए हैं।
खंडपीठ ने इन प्रोफेसरों से 60 साल की उम्र के बाद अब तक नौकरी में रहने को लेकर रिकवरी के पूर्व आदेश पर भी रोक लगा दी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पंजाब यूनिवर्सिटी और केंद्र सरकार को 13 सितंबर के लिए नोटिस जारी किया है।
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खंडपीठ ने पीयू कैंपस के इन 45 प्रोफेसरों को नई नियुक्ति (रि-एंप्लायमेंट) के रूप में फिर से सेवा में लेने के आदेश जारी करने के साथ ही पीयू की ओर से उन्हें अब तक मुहैया कराई गई सरकारी क्वार्टर और अन्य सुविधाएं भी बहाल रखने के आदेश दिए हैं।
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खंडपीठ ने इन प्रोफेसरों से 60 साल की उम्र के बाद अब तक नौकरी में रहने को लेकर रिकवरी के पूर्व आदेश पर भी रोक लगा दी। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पंजाब यूनिवर्सिटी और केंद्र सरकार को 13 सितंबर के लिए नोटिस जारी किया है।
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पीयू को सेंट्रल फंडेड यूनिवर्सिटी मानने से वकील का इंकार
पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस
- फोटो : file photo
पीयू के प्रोफेसरों की तरफ से अदालत में मौजूद सीनियर एडवोकेट पुनीत जिंदल ने डबल बेंच को बताया कि सिंगल बेंच ने अपने फैसले में यह मानने से इंकार कर दिया है कि पीयू सेंट्रल फंडेड यूनिवर्सिटी है। उन्होंने कहा कि पीयू पूरी तरह एक सेंट्रल फंडेड यूनिवर्सिटी ही है क्योंकि पीयू को केंद्र सरकार आईआईटी और आईआईएम की तरह ही फंड प्रदान करती है।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि पीयू के बजट का 92 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से जारी किया जाता है। वहीं पंजाब सरकार की ओर से पीयू के 500 करोड़ से अधिक के बजट में केवल 20 करोड़ ही योगदान दिया जाता है। इसलिए सेंट्रल फंडेड यूनिवर्सिटी के रूप में पीयू के प्रोफेसरों की रिटायरमेंट उम्र भी सेंट्रल फंडेड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों की भांति 65 वर्ष की जानी चाहिए।
डबल बेंच को यह भी बताया गया कि पीयू की सीनेट और सिंडिकेट ने वर्ष 2010 और उसके बाद वर्ष 2014 में पीयू के प्रोफेसरों की रिटायरमेंट उम्र को केंद्र सरकार और यूजीसी के प्रस्ताव के अनुसार 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दिया था। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भी भेजा गया, लेकिन उस पर केंद्र सरकार ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि पीयू के बजट का 92 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सा केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से जारी किया जाता है। वहीं पंजाब सरकार की ओर से पीयू के 500 करोड़ से अधिक के बजट में केवल 20 करोड़ ही योगदान दिया जाता है। इसलिए सेंट्रल फंडेड यूनिवर्सिटी के रूप में पीयू के प्रोफेसरों की रिटायरमेंट उम्र भी सेंट्रल फंडेड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों की भांति 65 वर्ष की जानी चाहिए।
डबल बेंच को यह भी बताया गया कि पीयू की सीनेट और सिंडिकेट ने वर्ष 2010 और उसके बाद वर्ष 2014 में पीयू के प्रोफेसरों की रिटायरमेंट उम्र को केंद्र सरकार और यूजीसी के प्रस्ताव के अनुसार 60 से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दिया था। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भी भेजा गया, लेकिन उस पर केंद्र सरकार ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है।
केंद्र भी पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी मानने को तैयार नहीं
पंजाब यूनिवर्सिटी
- फोटो : amar ujala
पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा दिए जाने की मांग संबंधी याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर कह चुका है कि पीयू न तो सेंट्रल यूनिवर्सिटी है और न ही स्टेट यूनिवर्सिटी, बल्कि पंजाब री-ऑगेनार्जेशन एक्ट-1966 के तहत पीयू का दर्जा इंटर स्टेट बॉडी कारपोरेट का है। इसलिए इससे संबंधित मामले में पंजाब सरकार की सहमति जरूरी है।
उधर, पंजाब सरकार ने भी पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा दिए जाने में आनाकानी करते हुए हाईकोर्ट में साफ कर दिया था कि वह पीयू के प्रोफेसरों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। तब केंद्र सरकार ने भी रिटायरमेंट की उम्र के मामले में अपना हाथ खींच लिया था। सोमवार को डबल बेंच के समक्ष पीयू के प्रोफेसरों की अपील में केंद्र और पंजाब सरकार के रवैये का भी जिक्र किया गया।
उधर, पंजाब सरकार ने भी पीयू को सेंट्रल यूनिवर्सिटी का दर्जा दिए जाने में आनाकानी करते हुए हाईकोर्ट में साफ कर दिया था कि वह पीयू के प्रोफेसरों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। तब केंद्र सरकार ने भी रिटायरमेंट की उम्र के मामले में अपना हाथ खींच लिया था। सोमवार को डबल बेंच के समक्ष पीयू के प्रोफेसरों की अपील में केंद्र और पंजाब सरकार के रवैये का भी जिक्र किया गया।
यह था सिंगल बेंच का फैसला
पंजाब यूनिवर्सिटी
- फोटो : file photo
हाईकोर्ट की एकल बेंच ने पिछले हफ्ते 16 अगस्त को पीयू के प्रोफेसरों की रिटायरमेंट उम्र के मामले में फैसला देते हुए रिटायरमेंट उम्र बढ़ाने से इंकार कर दिया था। एकल बेंच ने पीयू कैंपस और पीयू से संबद्ध कालेजों के कुल 68 प्रोफेसरों की अलग-अलग याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए पीयू प्रशासन को सभी याचिकाकर्ता प्रोफेसरों को तुरंत प्रभाव से हटाने के आदेश दिए थे। इसके साथ ही एकल बेंच ने याचिका लंबित रहने तक नौकरी में रहे 60 साल से अधिक उम्र के प्रोफेसरों को दिए गए वेतन-भत्ते की भरपाई की बात भी कही थी।