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10 हजार NHM कर्मियों को मिले एक साथ दो तोहफे, फिर भी कई मांगें बुलंद
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 29 Apr 2017 12:49 PM IST
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करीब 19 सालों से एक मिशन के अंतर्गत सरकारी अस्पतालों में अपने सेवाएं दे रहे दस हजार स्वास्थ्य कर्मियों को दो बड़ी राहत मिली हैं। नीति आयोग ने जहां एनएचएम मिशन को अब 31 मार्च 2022 तक जारी रखने का फैसला लिया है, वहीं हरियाणा सरकार ने भी अब इन कर्मचारियों का सर्विस कांट्रैक्ट एक साल के लिए रिन्यू कर दिया है। हर वित्त वर्ष में ये अनुबंध रिन्यू किया जाता है।
इस फैसले से जहां इन कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है, वहीं डाक्टरों व स्टाफ की कमी झेल रहे सरकारी अस्पतालों में भी कामकाज कुछ हद तक पहले की तरह सुचारु रहेगा। दरअसल, 1998 में केंद्र सरकार की योजना के तहत हरियाणा समेत अन्य राज्यों में आरसीएच (रिप्रोडेक्ट चाइल्ड हेल्थ) के तहत इन कर्मचारियों को रखा गया था। वर्ष 2005 में इन मिशन का नाम आरसीएच-टू रखा गया।
वर्ष 2007 में इस मिशन का नाम नेशनल रूरल हेल्थ मिशन व नेशनल अर्बन हेल्थ मिशन किया गया। लेकिन वर्ष 2012 में इसेे नेशनल हेल्थ मिशन बना दिया गया। इस मिशन के तहत बजट का 60 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार और 40 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार वहन करती है। सूबे के सरकारी अस्पतालों में इस मिशन के तहत लगभग 12 हजार पद हैं, जिन पर अभी 10156 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें डाक्टर, स्टाफ नर्स, ड्राइवर, लैब तकनीशियन, फार्मासिस्ट, काउंसलर, डाटा एंट्री आपरेटर, अकाउंटेट, कंसलटेंट, मॉनीटरिंग अफसर, जिला परियोजना अधिकारी व अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल है।
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इस फैसले से जहां इन कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है, वहीं डाक्टरों व स्टाफ की कमी झेल रहे सरकारी अस्पतालों में भी कामकाज कुछ हद तक पहले की तरह सुचारु रहेगा। दरअसल, 1998 में केंद्र सरकार की योजना के तहत हरियाणा समेत अन्य राज्यों में आरसीएच (रिप्रोडेक्ट चाइल्ड हेल्थ) के तहत इन कर्मचारियों को रखा गया था। वर्ष 2005 में इन मिशन का नाम आरसीएच-टू रखा गया।
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वर्ष 2007 में इस मिशन का नाम नेशनल रूरल हेल्थ मिशन व नेशनल अर्बन हेल्थ मिशन किया गया। लेकिन वर्ष 2012 में इसेे नेशनल हेल्थ मिशन बना दिया गया। इस मिशन के तहत बजट का 60 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार और 40 फीसदी हिस्सा राज्य सरकार वहन करती है। सूबे के सरकारी अस्पतालों में इस मिशन के तहत लगभग 12 हजार पद हैं, जिन पर अभी 10156 कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें डाक्टर, स्टाफ नर्स, ड्राइवर, लैब तकनीशियन, फार्मासिस्ट, काउंसलर, डाटा एंट्री आपरेटर, अकाउंटेट, कंसलटेंट, मॉनीटरिंग अफसर, जिला परियोजना अधिकारी व अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शामिल है।
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चिकित्सक
अखिल भारतीय एनएचएम इंप्लाइज एसोसिएशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेंद्र गौतम व प्रदेश कार्यकारिणी के महासचिव कृष्ण कटारिया के अनुसार भले ही एनएचएम कर्मियों का रोजगार मार्च 2022 तक सुरक्षित है, लेकिन सरकार उन्हे पक्का करे, ताकि उनका भविष्य भी सुरक्षित बन सके। उन्होंने इसके लिए सीएम के पीएस को ज्ञापन दिया है।
ये मांगें अभी बुलंद
-एएनएम की तरह एनएचएम के सभी कर्मियों को स्टेट कैश इंसेनटिव का लाभ मिले
-कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के तहत 14.29 प्रतिशत वेतन बढ़ाया जाए
-गत वर्ष आंदेालन केदौरान कर्मचारियों का काटा वेतन जारी किया जाए
-सर्वशिक्षा अभियान के कर्मचारियों की तर्ज पर एनएचएम कर्मियों को भी स्टेट सर्विस रूल, ग्रेड पे व भत्तों का लाभ दिया जाए
ये मांगें अभी बुलंद
-एएनएम की तरह एनएचएम के सभी कर्मियों को स्टेट कैश इंसेनटिव का लाभ मिले
-कर्मचारियों को सातवें वेतनमान के तहत 14.29 प्रतिशत वेतन बढ़ाया जाए
-गत वर्ष आंदेालन केदौरान कर्मचारियों का काटा वेतन जारी किया जाए
-सर्वशिक्षा अभियान के कर्मचारियों की तर्ज पर एनएचएम कर्मियों को भी स्टेट सर्विस रूल, ग्रेड पे व भत्तों का लाभ दिया जाए