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चंडीगढ़: कांग्रेस के मंसूबों पर आप ने फेरा झाड़ू, वोट प्रतिशत बढ़ा फिर भी पार्टी को मिली हार, स्टार प्रचारकों का भी नहीं मिला लाभ

Tue, 28 Dec 2021 02:11 AM IST
ajay kumar नीरज कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
नीरज कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 28 Dec 2021 02:11 AM IST
सार

कांग्रेस के स्टार प्रचारकों में रणदीप सुरजेवाला, कन्हैया कुमार, राजिंदर सिंह राणा, अभिषेक दत्त, अलका लांबा, नेटा डिसूजा सहित कई बड़े नेताओं ने प्रचार की कमान संभाली लेकिन कांग्रेस इसका लाभ लेने में असफल रही।  

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Big reasons behind Congress defeat in Chandigarh Municipal elections 2021
कांग्रेस - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को मिली हार महीनों तक चुभेगी। कांग्रेस अपनी सोच के अनुसार सीटों पर जीत दर्ज नहीं कर पाई। कांग्रेस के मंसूबों पर आम आदमी पार्टी ने झाड़ू फेर दी है। कांग्रेस के टिकट वितरण में जमीनी कार्यकर्ताओं और नेताओं की अनदेखी का नतीजा यह हुआ कि पार्टी कई सीटें हार गई। टिकट बंटवारे के बाद रूठे नेताओं को मनाने में नाकाम नही। अगर रूठों को मनाने में सफल रहती तो थोड़े वोट से हार को जीत में बदला जा सकता था। 

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कई क्षेत्रों में टिकट वितरण में अनदेखी के कारण भी पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा। वार्ड नंबर 29 में जगजीत सिंह कंग को टिकट दिए जाने के बाद रूठे कार्यकर्ताओं को पार्टी मनाने में असफल रही। तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ कांग्रेस ने बड़ा संघर्ष किया लेकिन इसका लाभ नहीं उठा पाई। यादविंदर मेहता व प्रेमलता ने किसान आंदोलन में बड़ा काम किया लेकिन दोनों ही नेता अंत समय में कांग्रेस का साथ छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए। बता दें कि प्रेमलता भी चुनाव जीतने में कामयाब रहीं और यादविंदर मेहता की पत्नी तरुणा भी चुनाव जीत गईं। 
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कांग्रेस को अपने पार्षदों को भाजपा से बचाकर रखना होगा
कांग्रेस को अपने पार्षदों को हर साल भाजपा के वार से बचाकर रखना होगा। क्योंकि भाजपा के नगर निगम में 12 पार्षद जीत कर आए हैं। हर वर्ष मेयर का चुनाव होता है। मेयर के चुनाव में दल-बदल कानून न होने के कारण कहीं भाजपा कांग्रेस में सेंधमारी न कर दे, इसका हर साल मेयर चुनाव में डर बना रहेगा, क्योंकि भाजपा ने कई दूसरे प्रांतों में बहुमत नहीं होने पर भी अपनी सरकार बनाई है। इसका डर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस दोनों को सताना शुरू कर दिया है। 

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प्रदीप छाबड़ा के जाने के बाद कमजोर होती गई कांग्रेस

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा का आम आदमी पार्टी में जाना कांग्रेस को भारी पड़ गया। आम आदमी पार्टी में उनके समर्थकों में यादविंदर मेहता, प्रेमलता, दमनप्रीत बादल सहित कई अन्य नेता कांग्रेस छोड़कर आम आदमी पार्टी में चले गए। इनमें प्रेमलता, यादविंदर मेहता की पत्नी तरुणा मेहता, दमनप्रीत सिंह बादल ने जीत दर्ज की। 

केजरीवाल ने झूठ को सच के रूप में परोसा
केजरीवाल ने झूठ को सच के रूप में परोसा है। आप ने चुनाव में करोड़ों रुपये खर्च कर दिए। करोड़ों खर्च कर नगर निगम चुनाव को भ्रष्ट किया है। आम आदमी पार्टी ने शहर के लोगों को ऐसे सपने दिखाए, जो उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं हैं। अब उन्हें कर के दिखाना होगा। लोग बदलाव चाहते थे। कांग्रेस का वोट शेयर बढ़ा है। सीटें भी चार से बढ़कर आठ हुई हैं। केजरीवाल का फैक्टर चला है। किसान आंदोलन का लाभ भी आम आदमी पार्टी को मिला है। लोगों ने कांग्रेस को नहीं भाजपा को हराया है। कांग्रेस दोनों पार्टियों आप और भाजपा का विरोध करेगी। कांग्रेस विपक्ष की भूमिका में रहेगी। भाजपा तोड़फोड में माहिर है। हमारे लोग कहीं जाने वाले नहीं हैं।  -सुभाष चावला, चंडीगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

कांग्रेस पिछड़ी, वोट प्रतिशत रहा अव्वल

नगर निगम चुनाव में कांग्रेस सीटों में बेशक पीछे रही लेकिन वोट प्रतिशत में अव्वल रही है। कांग्रेस को 29.79 प्रतिशत मत मिले। वहीं, भाजपा को 29.30 प्रतिशत मत मिले, जबकि आम आदमी पार्टी को 27.08 प्रतिशत मत मिले। निर्दलीय को 7.10 व अन्य को 6.26 प्रतिशत मत मिले। साल 2016 के निगम चुनाव में भाजपा को 42.98, जबकि कांग्रेस को 33.57 प्रतिशत मत मिले थे। वहीं, आप चुनाव मैदान में नहीं थी।

पिछले चुनाव में दुबे को मिले थे साढ़े 9 हजार मत
आप की लहर का इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि साल 2016 के निगम चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अनिल दुबे लगभग साढ़े 9 हजार मतों से विजयी रहे थे। उस दौरान यह सबसे बड़ा जीत का अंतर था। इस बार उनकी पत्नी चुनाव में मैदान में है और उनकी जीत का अंतर 1795 वोट रहा है।  

सबसे बड़ी जीत का अंतर हरप्रीत कौर बबला का रहा
वार्ड 10 से कांग्रेस प्रत्याशी हरप्रीत कौर बबला ने अपने प्रतिद्वंद्वी भाजपा प्रत्याशी राशि भसीन को 3103 मतों से हराया। वहीं, सबसे कम अंतर से जीत वार्ड 34 से कांग्रेस प्रत्याशी गुरप्रीत सिंह की रही। उन्होंने भाजपा के भूपिंदर शर्मा को 9 मतों से हराया।   

जीत नहीं, बस सीट है बड़ी
कुछ जीत चुनाव में ऐसी रहीं, जहां महज सीट का ही महत्व रह गया। इसमें वार्ड 2 से भाजपा प्रत्याशी महेश इंदर सिंह 11 मतों से जीते, वहीं वार्ड 3 से दिलीप शर्मा 90 मतों से जीते। वार्ड 4 से आप प्रत्याशी सुमन देवी 12 मतों से तो वार्ड 22 से अंजू कत्याल 76 मतों से जीतीं। वार्ड 34 में कांग्रेस प्रत्याशी गुरप्रीत सिंह मात्र 9 मतों से जीते।

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