चिंताजनक: मोगा के 100 गांवों में बिगड़ा लिंगानुपात, एक हजार बेटों पर सिर्फ 750 बेटियों का जन्म
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मोगा के 100 गांवों में लिंगानुपात का औसत ग्राफ इतना बिगड़ चुका है कि यहां पर एक हजार बेटों के पीछे महज 750 बेटियों ने जन्म लिया है। यह चिंताजनक खुलासा डिप्टी कमिश्नर संदीप हंस के आदेश के बाद कराए गए सर्वे में हुआ है। हालांकि यह सूची प्रशासन ने सार्वजनिक नहीं की है।
बीते कई साल से मोगा में लिंग जांच का गोरखधंधा चल रहा है। बीते पांच साल में करीब पांच बार सिरसा सेहत विभाग की टीम ने स्टिंग ऑपरेशन कर मोगा में भ्रूण लिंग जांच वाले स्कैन सेंटरों को पकड़कर सील किया है। वहीं पंजाब सेहत विभाग का दावा था कि जिले में लिंगानुपात पहले से सुधरा है। यहां साल 2019 में एक हजार लड़कों के मुकाबले 932 लड़कियां है।
इस सच्चाई पता लगाने के लिए डीसी ने मोगा जिले के 430 गांवों में ऐसे गांवों की पहचान करने को कहा जहां लिंगानुपात कम था। इसके अलावा जहां भ्रूण लिंग जांच सेंटरों को सील किया गया था, उसके आसपास के गांवों को भी चिह्नित करने को कहा गया। इसके बाद जिले के पांच ब्लाकों के कुल 100 गांवों में यह सर्वे करवाया गया। उसी में यह चिंताजनक स्थिति सामने आई है।
सरकार ने दिया फंड
पंजाब सरकार ने मोगा के लिए ढाई लाख रुपये का फंड जारी किया है। इससे इस बार सेहत विभाग विशेष तौर पर गांवों में बेटियों की लोहड़ी मनाएगा। छह जनवरी से लेकर दस जनवरी तक जिले के पांच ब्लाकों डरोली भाई, ठठ्ठी भाई, पत्तो हीरा सिंह, कोटइसे खां और ढुडीके में 400 नवजात बच्चियों को सेहत विभाग की ओर से 500 रुपये का गिफ्ट दिया जाएगा। गिफ्ट में बेबी सूट या फिर गर्म कंबल दिए जाएंगे।
वर्ष 2018 की तुलना में 2019 में मोगा जिले में लिंगानुपात का ग्राफ पहले से काफी सुधरा है। हालांकि डीसी के आदेश पर किए गए सर्वे में होने वाला खुलासा चिंताजनक है। गांवों में डीपीओ कार्यालय की ओर से नुक्कड़ नाटकों का आयोजन शुरू किया गया है। जनवरी में सेहत विभाग की ओर से विशाल रैली का आयोजन किया जा रहा है। - ओम प्रकाश अरोड़ा, पीएनडीटी कोऑर्डिनेटर, सेहत विभाग, मोगा