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चंडीगढ़ से लापता बच्चों में 60 फीसदी लड़कियां
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Tue, 08 Dec 2015 12:01 PM IST
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हर साल शहर से दर्जनों बच्चे संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो जाते हैं। पिछले तीन वर्षों के दौरान गुम हुए बच्चों के आंकड़ों पर गौर करें तो यह जानकर हैरानी होगी कि शहर से गायब हुए बच्चों में 60 फीसदी लड़कियां शामिल हैं। शहर से ज्यादातर बच्चे स्लम और रूरल एरिया से गायब होते हैं।
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पुलिस बच्चों के गुम होने के मामलों में अपहरण का ही मामला दर्ज करती है। नोएडा के निठारी कांड के सामने आने के बाद गुम हुए बच्चों के परिजनों में किसी मानव तस्करी गिरोह की एक्टिव होने का डर हमेशा रहता है।
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तीन वर्षों में 107 बच्चे गायब हुए
पुलिस से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक 2013 से लेकर अब तक 107 बच्चों के गुम होने की रिपोर्ट थानों में दर्ज हुई हैं। इनमें 66 नाबालिग लड़कियां शामिल हैं।
वर्ष........लापता लड़के.....लड़कियां
2013...........16 ...........37
2014...........11...........12
2015...........14...........17
कमीशन फॉर प्रोटे्क्शन ऑफ चिल्ड्रन राइट्स की चेयरपर्सन देवी सिरोही का कहना है कि उन्होंने पुलिस से बात कर गुम हुए बच्चों के मामलों को गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच करने को कहा है। यूटी पुलिस को यह सुझाव दिया गया था कि वह आसपास के राज्यों की पुलिस के साथ तालमेल कर गुम बच्चों की जानकारी साझा करे। अन्य राज्यों की पुलिस के साथ अगर कोआर्डिनेशन होगा तो बच्चों को ढूंढने में आसानी होगी।
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परिजनों को गिरोह सक्रिय होने की आशंका
गुम हुए बच्चों के परिजनों में इस बात की आशंका है कि बच्चा चुराने वाला कोई गिरोह शहर में सक्रिय है, जो बच्चों को तस्करी या फिर उनके अंगों को बेचने के मकसद से उठाता है। क्योंकि अगर बच्चा घर से नाराज होकर गया है तो ज्यादा देर तक वह दूर नहीं रह सकता है।
वहीं यूटी पुलिस के डीआईजी एएस चीमा का कहना है कि पुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान के दौरान करीब 50 बच्चों को उनके परिवारों से मिलवाया था। हालांकि पुलिस अब भी गुम हुए बच्चों के मामलों को गंभीरता से लेते हुए जांच करती है। बच्चों की तस्करी या अंगों की तस्करी का मामला अब तक सामने नहीं आया है।
सुप्रीम कोर्ट के यह हैं निर्देश
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पुलिस विभाग को निर्देश दिया गया है कि पुलिस गुम हुए बच्चों के मामलों में स्कूल, दोस्त और आस-पड़ोस के लोगों से पूछताछ करे। अखबारों में लापता हुए बच्चों का फोटो के साथ विज्ञापन देकर तलाश करे।