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जाट आरक्षण मामले में आया नया मोड़, हाईकोर्ट से की गई बड़ी अपील

Tue, 17 Jan 2017 08:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 17 Jan 2017 08:59 PM IST
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big appeal in punjab haryana highcourt in haryana jat reservation case
हरियाणा जाट आरक्षण केस
जाटों को दिए गए आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका में मंगलवार को नया मोड़ आ गया। कुछ याचिकाकर्ताओं ने एक अपील दायर की है। इसमें उन्होंने बेंच बदलने की अपील की। आरक्षण को चुनौती देने वाली यादव महासभा और मुरारी लाल गुप्ता ने बेंच के दोनों जजों के जटसिख होने की बात कहते हुए इस मामले को अन्य बेंच को रेफर करने की बात कही।
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इन दलीलों पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि मौखिक अपील पर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा। इसके लिए अर्जी दाखिल की जाए। अर्जी पर सुनवाई कर उचित आदेश जारी होंगे। मंगलवार को मामले की सुनवाई आरंभ होते ही यादव महासभा की ओर से एडवोकेट पीआर यादव ने कहा कि उनका केस किसी अन्य बेंच को रेफर किया जाए।
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यादव ने कहा कि इस खंडपीठ के दोनों जज जटसिख हैं और वे इस मामले को नहीं सुन सकते हैं क्योंकि जाटों के आरक्षण को चुनौती का मामला है। जस्टिस एसएस सरों और जस्टिस लीज़ा गिल की खंडपीठ ने इसपर टिप्पणी करते हुए कहा कि आरक्षण पर रोक लगाने वाली भी यही बेंच थी। अब जब इस मामले की सुनवाई पूरी होने वाली है और इतना समय दिया जा चुका है इस समय बेंच बदलने की मांग समझ से बाहर है।
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क्यों न आरक्षण से रोक हटाकर दूसरी बेंच को भेज दें

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आरक्षण के लिए हरियाणा में जाटों का विरोध प्रदर्शन - फोटो : फाइल फोटो
बेंच ने कहा कि यदि ऐसा है तो क्यों न आरक्षण से रोक हटा कर इसे दूसरी बेंच को भेज दें। साथ ही यह भी कहा कि मौखिक रूप से की गई अपील पर निर्णय नहीं लिया जा सकता है और ऐसे में यदि आपत्ति है तो इसे अर्जी दाखिल कर बेंच के सामने रखा जाए। अर्जी पर कानून के अनुरूप सुनवाई और निर्णय लिया जाएगा।

हरियाणा सरकार ने इस अपील पर कहा कि पहले ही 6 माह से आरक्षण पर रोक जारी है और अब इस प्रकार की अर्जी दाखिल करना सीधे तौर पर रोक को जारी रखने और मामले को लटकाने का प्रयास है। इस दौरान कुम्हार महासभा व अन्य याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उन्हें बेंच पर भरोसा है और वे दलीलें जारी रखना चाहते हैं। इस पर हाईकोर्ट ने दलीलें जारी रखने की छूट दी।

सीनियर एडवोकेट वीके जिंदल ने बहस आरंभ करते हुए नेशनल ज्यूडिशियल कमिशन मामले का हवाला देते हुए कहा कि हरियाणा विधानसभा ने जो एक्ट पास किया है वह पूरी तरह से असंवैधानिक है। विधानसभा में एक्ट को लाने से पहले जो अनिवार्य प्रावधान थे, उनकी पालना नहीं की गई और आंकड़ों के बगैर आरक्षण का प्रावधान कर दिया गया।

साथ ही यह भी कहा गया कि बेंच इस मामले को कमिशन के पास नहीं भेज सकती है। याची पक्ष की दलीलें पूरी न होने पर हाईकोर्ट ने सुनवाई को 24 जनवरी तक के लिए टाल दिया।
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