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हुड्डा ने जताया हक, चंडीगढ़ हरियाणा का

Sat, 14 Jun 2014 09:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 14 Jun 2014 09:35 PM IST
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bhupinder singh hooda says haryana

मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शनिवार को चंडीगढ़ पर हरियाणा का हक जताते हुए कहा कि चंडीगढ़ हरियाणा का है और चंडीगढ़ दोनों राज्यों (पंजाब और हरियाणा) की राजधानी है। वैसे चंडीगढ़ का अलग अस्तित्व केंद्र शासित प्रदेश के रूप में है।

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मुख्यमंत्री शनिवार को यहां पत्रकारों के साथ पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के चंडीगढ़ पंजाब को देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र पर बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पंजाब के साथ हरियाणा का पानी, सीमा और राजधानी के मुद्दे हैं।
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हरियाणा अपने हक का पानी लेकर रहेगा। कमजोर मानसून रहने की संभावना के बारे में सीएम ने कहा कि अगर मानसून कमजोर रहेगा तो भी किसानों के लिए अच्छे प्रबंध किए जाएंगे। किसानों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।

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सांगवान को सीएम ने शपथ दिलाई

bhupinder singh hooda says haryana

मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अपने आवास पर शनिवार शाम को प्रोफेसर खजान सिंह सांगवान को हरियाणा विद्यालय अध्यापक चयन बोर्ड के अध्यक्ष के तौर पर पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

सीएम ने कहा कि सांगवान की नियुक्ति के बाद चयन प्रक्रिया में तेजी आएगी। उधर, प्रो सांगवान ने कहा कि अध्यापक समाज निर्माता होता है। उनकी प्राथमिकता रहेगी कि अच्छे अध्यापकों का चयन समय पर हो ताकि अध्यापकों की कमी न रहे। परिणाम से संबंधित प्रक्रिया समय पर पूरी करने का प्रयास किया जाएगा। शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने कहा कि अब शिक्षक नियमित भर्ती प्रक्रिया में तेजी आएगी। जिन पदों के साक्षात्कार हो चुके हैं उनके परिणाम जल्द घोषित कर दिए जाएंगे।

मंत्रिमंडल की बैठक आज

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मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में रविवार को मंत्रिमंडल की बैठक होगी। रविवार की छुट्टी के दिन होने वाली इस बैठक दो शहीदों के परिजनों को नौकरी देने, राज्य चुनाव आयोग में कर्मचारियों के रूल्स में संशोधन करने और कुछ प्रशासनिक विभागों की रिपोर्ट को मंजूरी दी जा सकती है।

हालांकि शनिवार तक मीटिंग का खास एजेंडा मंत्रियों के पास नहीं भेजा गया था। मगर यह तय है कि टोल फीस माफ या कम करने से संबंधित एजेंडा इस बैठक में नहीं आएगा। मगर कैबिनेट बैठक में कुछ लोक लुभावने फैसले हो सकते हैं क्योंकि विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने में ढाई महीने से भी कम समय बचा है।

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