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High Court News: चन्नी के भांजे भूपिंदर सिंह पहुंचे हाईकोर्ट, राहों में दर्ज FIR रद्द करने की मांग
Mon, 25 Jul 2022 08:14 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Mon, 25 Jul 2022 08:14 PM IST
सार
जस्टिस विकास बहल ने निजी कारणों का हवाला देते हुए चन्नी के भांजे की याचिका पर सुनवाई से इन्कार कर दिया। इस याचिका पर सुनवाई के लिए नई बेंच के गठन के लिए इसे मुख्य न्यायाधीश को रेफर कर दिया है।
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पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के साथ भूपिंदर सिंह हनी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के भांजे भूपिंदर सिंह हनी और कुदरतदीप सिंह के खिलाफ राहों में इसी माह दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई से जस्टिस विकास बहल ने इन्कार कर दिया। उन्होंने नई बेंच गठित करने के लिए याचिका मुख्य न्यायाधीश को रेफर कर दी।
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दोनों ने एफआईआर रद्द करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में दोनों ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए एफआईआर और इस पर हो रही कार्रवाई पर याचिका लंबित रहते रोक लगाने की भी मांग की थी। सोमवार को मामला सुनवाई के लिए जस्टिस विकास बहल की बेंच के सामने पहुंचा था। जस्टिस विकास बहल ने निजी कारणों का हवाला देते हुए इस पर सुनवाई से इन्कार कर दिया। इस याचिका पर सुनवाई के लिए नई बेंच के गठन के लिए इसे मुख्य न्यायाधीश को रेफर कर दिया।
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निलंबित जेल अधीक्षक शमशेर सिंह दहिया ने लगाई सुरक्षा की गुहार
हरियाणा के निलंबित जेल अधीक्षक शमशेर सिंह दहिया ने खुद को व परिवार की जान को खतरा बताते हुए सुरक्षा बहाल करने की हाईकोर्ट से अपील की है। याचिका में दहिया ने बताया कि वह 2001 में भिवानी जेल में तैनात था। उस समय हंसा गैंग ने एक जेल वार्डर की हत्या कर दी थी और याची को जान से मारने की धमकी दी थी। इसके बाद याची को सुरक्षा मुहैया करवाई गई थी। इसके बाद हिसार में तैनाती के दौरान उसे एक गनमैन दिया गया था।
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2014 में रामपाल को विशेष सुविधा देने के लिए याची पर दबाव बनाया गया और जब याची नहीं माना तो उसे धमकी मिलने लगी और झूठी शिकायतें दाखिल की जाने लगीं। इसके बाद याची पर हमला भी हुआ था। इसके बाद याची सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। याची ने बताया कि निकाय चुनाव के बहाने याची की सुरक्षा में मौजूद हेड कांस्टेबल को वापस बुला लिया गया। याची ने बताया कि वह अभी निलंबित है और पंचकूला मुख्यालय में अटैच है। ऐसे में याची और उसके परिवार को जान का खतरा है। याची ने एडीजीपी सीआईडी को पत्र लिख सुरक्षा बहाल करने की मांग की थी लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।