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हरियाणा : अब पंडित नेकी राम के नाम पर होगा भिवानी मेडिकल कॉलेज, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को 220 करोड़ रुपये जारी

Mon, 15 Mar 2021 10:11 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 15 Mar 2021 10:11 PM IST
सार

  • सीएम ने बजट अभिभाषण में कराया संशोधन, गलती से हुआ डॉ. मंगलसेन के नाम का जिक्र
  • अनिल विज का सुझाव, मंगलसेन के नाम पर शुरू हो कोई न कोई प्रोजेक्ट, सीएम करेंगे गौर

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Bhiwani Medical college will Named as Pandit Neki Ram
हरियाणा विधानसभा। - फोटो : फाइल फोटो।

विस्तार

हरियाणा के भिवानी स्थित मेडिकल कॉलेज को अब पंडित नेकी राम के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सोमवार को शून्यकाल में इसकी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने अपने बजट अभिभाषण के बिंदु 112 में संशोधन भी कराया। अभिभाषण में उन्होंने घोषणा कर दी थी कि इस का नाम डॉ. मंगलसेन मेडिकल कॉलेज होगा।

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मुख्यमंत्री ने सदन में बताया कि बजट अभिभाषण की त्रुटि को सुधार लिया गया है। उन्होंने 26 जनवरी 2019 को स्वयं भिवानी के नागरिक अस्पताल को अपग्रेड करने की घोषणा करते हुए इसका नाम प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी पंडित नेकी राम शर्मा पर रखने की बात कही थी। इसके बाद सरकार ने निर्णय लेते हुए इसका नामकरण भी कर दिया। अभिभाषण में हुई गलती को सुधारा गया है। इस कॉलेज को केंद्र प्रायोजित परियोजना के तहत विकसित किया जाएगा।
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मुख्यमंत्री की घोषणा पर कांग्रेस विधायक किरण चौधरी ने कहा कि नागरिक अस्पताल का नाम चौधरी बंसीलाल पर है। सरकार अगर उसे बदल कर पंडित नेकी राम कर रही है तो मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल का नाम लेने से क्यों कतरा रहे। बीच में गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि मंगलसेन बहुत बड़े नेता थे, उनकी तपस्या से ही आज हम यहां बैठ हैं। उनके नाम को गलती से कहीं नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उनके नाम से भिवानी क्षेत्र में कोई बड़ा प्रोजेक्ट होना चाहिए। इस पर सीएम ने कहा कि किसी परियोजना का नाम रखा जाएगा, उससे पहले बैठकर चर्चा कर लेंगे।

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जजपा विधायक रामकुमार गौतम ने कहा कि मंगलसेन, बंसीलाल के गुरु थे। किरण को फक्र होना चाहिए। इस पर बहस न करो। इस पर किरण चौधरी ने कहा कि गौतम भड़काने का काम करते हैं। नेकी राम के नाम पर लाइब्रेरी बनाई है, उनका बुत भी लगवाया है। अगर मेडिकल कॉलेज का नाम पंडित नेकी राम पर रखा जा रहा है तो वह उसका स्वागत करती हैं। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने कहा कि मंगलसेन कानून से चलने वाले प्रजातांत्रिक व्यक्ति थे। उनके नाम से अगर कोई संस्थान है तो उसे बदलना नहीं चाहिए। महापुरुषों के नाम पर कोई नई परियोजना शुरू कर दो। 

राजस्व घाटा केयू कर्मियों के वेतन, पेंशन में देरी का कारण
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (केयू) के कर्मचारियों को वेतन और पेंशन देरी से मिलने के कई कारण हैं। शैक्षणिक सत्र 2016-17 में संबद्ध महाविद्यालयों के नए विश्वविद्यालयों में स्थानांतरित होने के कारण राजस्व घाटा बढ़ा। 2017 में शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी भी बड़ा कारण है। कोविड-19 के कारण आंतरिक प्राप्तियों से होने वाली आय में भी कमी आई है।

शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने भाजपा विधायक सुभाष सुधा के सवाल पर यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को वित्त वर्ष 2021-22 में 220 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। विधायक ने कर्मचारियों के 15 करोड़ रुपये और भी मांगे हैं, जिस पर जल्दी विचार किया जाएगा। वर्ष 2015-16 में 75.21 करोड़ रुपये, 2016-17 में 78 करोड़ रुपये, 2017-18 में 82 करोड़ रुपये, 2018-19 में 95 करोड़ रुपये, 2019-20 में 163 करोड़ रुपये विश्वविद्यालय को दिए गए।

इनमें आवर्ती और गैर आवर्ती राशि शामिल है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय स्वायत्त निकाय होने के कारण अपने स्वयं के स्रोतों से भी आय अर्जित करता है। विश्वविद्यालय ने 2015-16 में 139. 47 करोड़ रुपये, 2016-17 में 153.25 करोड़ रुपये, 2017-18 में 167 करोड़ रुपये, 2018-19 में 149.88 करोड़ रुपये, 2019-20 में 159.46 करोड़ रुपये और 2020-21 में 87.05 करोड़ रुपये की आय अर्जित की है।

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