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Hindi News ›   Chandigarh ›   Bhiwani Candidates Position in Haryana Assembly Elections

चुनावी दंगलः जीजा-साली आमने-सामने

Fri, 26 Sep 2014 11:14 AM IST
प्रेम सारस्वत/अमर उजाला, सिवानी मंडी
प्रेम सारस्वत/अमर उजाला, सिवानी मंडी Updated Fri, 26 Sep 2014 11:14 AM IST
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Bhiwani Candidates Position in Haryana Assembly Elections

राजनीति और जंग में सब कुछ जायज है। यहां बात हो रही है लोहारू विधानसभा क्षेत्र से बसपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों की। सभी दलों ने अपने-अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के घराने के दो परिवारों के आमने-सामने की जंग एक बार फिर आमने-सामने है।

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इससे पहले सुरेंद्र सिंह और रणबीर महेंद्रा लोकसभा चुनाव में आमने-सामने थे। इसमें सुरेद्र सिंह ने हविपा और रणबीर महेंद्रा ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। 16 सालों बाद यह पहला मौका है, जब एक ही परिवार के दो और लोग सुमित्रा चौधरी और सोमवीर सिंह आमने-सामने होंगे। रिश्ते में जीजा-साली के बीच यह जंग पूरे राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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सुमित्रा बसपा से और सोमवीर सिंह कांग्रेस से आमने-सामने होंगे। दोनों ही उम्मीदवार पार्टी के अलावा बंसीलाल के नाम से वोट मांगते नजर आएंगे। यह बात अलग है कि बंसीलाल परिवार से अलग होकर गए जेपी दलाल भी भाजपा से ताल ठोक चुके हैं।
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बंसीलाल के इर्द‌-गिर्द घूमती है राजनीति

Bhiwani Candidates Position in Haryana Assembly Elections

भिवानी जिले की राजनीति पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल के इर्द-गिर्द रही है। एक समय में यहां पूर्व मुख्यमंत्री का सिक्का चलता था। उनके निधन के बाद से उनकी पुत्रवधु किरण चौधरी, पौती श्रुति चौधरी और उनके दामाद सोमवीर सिंह बंसीलाल के नाम पर इस हलका की राजनीति करते आ रहे हैं।

ऐसे में इस बार बहुजन समाज पार्टी ने पूर्व मंख्यमंत्री बंसीलाल की पुत्री डॉ. सुमित्रा चौधरी और उनके दामाद और पूर्व विधायक सोमवीर सिहं को कांग्रेस ने चुनाव मैदान में उतारने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। बंसीलाल के निधन के बाद सोमवीर सिंह और किरण चौधरी के बीच का विवाद किसी से छिपा नहीं है, लेकिन दोनों कभी आमने-सामने चुनाव मैदान में नहीं देखे गए।

दोनों ने लगाए थे भितरघात के आरोप

Bhiwani Candidates Position in Haryana Assembly Elections

दोनों तरफ से चुनाव में भीतरघात का आरोप जरूर लगा है। इससे पहले वर्ष 1998 में इस परिवार के दो सगे भाई सुरेंद्र सिंह और रणबीर महेंद्रा अलग-अलग दलों से आमने-सामने थे। इसमें सुरेंद्र सिंह चुनाव जीते थे। अब 16 सालों बाद एक ही परिवार के दो सदस्य एक बार फिर आमने-सामने हैं।

फर्क इतना ही है कि उस समय भाई-भाई थे और इस बार जीजा-साली आमने सामने हैं। खास बात यह है कि पार्टी के मुद्दों के साथ-साथ दोनों ही सदस्य बंसीलाल के नाम को भुनाने में लग गए हैं। इसके अलावा इस परिवार से लंबे समय तक जुड़े रहे भाजपा के उम्मीदवार जेपी दलाल का भी बंसीलाल और सुरेंद्र सिंह का नाम अपने भाषणों में लेना नहीं भूलते।

बंसीलाल के नाम का फायदा किसे मिलता है, यह तो वोटरों को तय करना है, लेकिन जीजा-साली के बीच छिड़ी यह चुनावी जंग लोगों में चर्चा का विषय बनी हुई है। बंसीलाल समर्थक भी हैरान हैं कि वे अपना वोट बंसीलाल की बेटी को दें या दामाद को।

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