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मोदी सरकार के आखिरी बजट से नाराज हैं देश के किसान, किया 27 को विरोध प्रदर्शन का एलान
Sun, 03 Feb 2019 09:06 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 03 Feb 2019 09:06 AM IST
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indian budget 2019
- फोटो : PTI
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मोदी सरकार द्वारा पेश किए गए अंतरिम बजट से देश की किसान जत्थेबंदियां आहत हैं। इसलिए उन्होंने बजट के विरोध में प्रदर्शन करने का एलान किया है।
भारतीय किसान यूनियन का कहना है कि केंद्र सरकार ने किसानों से छह हजार रुपये तो अतिरिक्त टैक्स वसूला है और वही छह हजार किसानों को किश्तों में वापस मिलेगा रोजाना 17 रुपये के हिसाब से। भाजपा ने चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया था कि किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा लेकिन अब सरकार अपने वादे से भाग गई है। इसलिए किसान जत्थेबंदियों ने घोषणा की है कि 27 फरवरी को चंडीगढ़ में धरना प्रदर्शन किया जाएगा और इससे पहले 17 फरवरी को किसान जत्थेबंदियां सरकार के नाम पर ज्ञापन देंगी।
शनिवार को प्रेस वार्ता में भारतीय किसान यूनियन के हरमीत सिंह कादियां, जगदेव सिंह कन्यावाली, गुरसाहब सिंह तरनतारन, कुलदीप सिंह भाईके, बलजिंदर सिंह बब्बी, अमरीक सिंह जालंधर, जसपिंदर सिंह फरीदकोट, शिंगारा सिंह जलालाबाद ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों को 500 रुपये प्रति माह देने का फैसला कर मजाक किया है। छोटे से छोटे किसान का कीटनाशक, स्प्रे, खाद आदि पर साल में 11 हजार रुपये खर्च आता है, इस पर सरकार ने जीएसटी लगाकर 1980 रुपये अतिरिक्त लिए।
इसके अलावा डीएपी और यूरिया पर जीएसटी लगाकर 1980 रुपये और वसूले गए, जबकि डीजल पर तीन हजार रुपये अतिरिक्त अदा करने पड़े जो छह हजार से अधिक बनता है। ऐसे में सरकार हमारा पैसा लूटकर हमें ही किश्तों में वापस करने जा रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब में किसानों का आलू, प्याज, बासमती पिछले तीन साल से मंडी में पड़ा सड़ रहा है। पाकिस्तान से प्याज, आलू और खाड़ी देशों से बासमती को लेकर कोई साफ पॉलिसी नहीं बनाई गई है।
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फसल बीमा योजना भी पूरी तरह से फेल हो रही है। केंद्र सरकार ने इस योजना के जरिए अरबों रुपये जमा कर लिए लेकिन किसानों को एक फीसदी भी नहीं मिला। किसानों ने गन्ने की अदायगी, आवारा पशु की दिक्कतों समेत कई परेशानियों को गिनाते हुए कहा कि जो किसान देश के लोगों का पेट भर रहा है, उनका हाल बेहाल हो चुका है।
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भारतीय किसान यूनियन का कहना है कि केंद्र सरकार ने किसानों से छह हजार रुपये तो अतिरिक्त टैक्स वसूला है और वही छह हजार किसानों को किश्तों में वापस मिलेगा रोजाना 17 रुपये के हिसाब से। भाजपा ने चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया था कि किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा लेकिन अब सरकार अपने वादे से भाग गई है। इसलिए किसान जत्थेबंदियों ने घोषणा की है कि 27 फरवरी को चंडीगढ़ में धरना प्रदर्शन किया जाएगा और इससे पहले 17 फरवरी को किसान जत्थेबंदियां सरकार के नाम पर ज्ञापन देंगी।
शनिवार को प्रेस वार्ता में भारतीय किसान यूनियन के हरमीत सिंह कादियां, जगदेव सिंह कन्यावाली, गुरसाहब सिंह तरनतारन, कुलदीप सिंह भाईके, बलजिंदर सिंह बब्बी, अमरीक सिंह जालंधर, जसपिंदर सिंह फरीदकोट, शिंगारा सिंह जलालाबाद ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों को 500 रुपये प्रति माह देने का फैसला कर मजाक किया है। छोटे से छोटे किसान का कीटनाशक, स्प्रे, खाद आदि पर साल में 11 हजार रुपये खर्च आता है, इस पर सरकार ने जीएसटी लगाकर 1980 रुपये अतिरिक्त लिए।
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इसके अलावा डीएपी और यूरिया पर जीएसटी लगाकर 1980 रुपये और वसूले गए, जबकि डीजल पर तीन हजार रुपये अतिरिक्त अदा करने पड़े जो छह हजार से अधिक बनता है। ऐसे में सरकार हमारा पैसा लूटकर हमें ही किश्तों में वापस करने जा रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब में किसानों का आलू, प्याज, बासमती पिछले तीन साल से मंडी में पड़ा सड़ रहा है। पाकिस्तान से प्याज, आलू और खाड़ी देशों से बासमती को लेकर कोई साफ पॉलिसी नहीं बनाई गई है।
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फसल बीमा योजना भी पूरी तरह से फेल हो रही है। केंद्र सरकार ने इस योजना के जरिए अरबों रुपये जमा कर लिए लेकिन किसानों को एक फीसदी भी नहीं मिला। किसानों ने गन्ने की अदायगी, आवारा पशु की दिक्कतों समेत कई परेशानियों को गिनाते हुए कहा कि जो किसान देश के लोगों का पेट भर रहा है, उनका हाल बेहाल हो चुका है।