फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Bhartiya Kisan Union Ugrahan rally against Farm Laws at Sunam

सुनाम में किसानों की रैली : महिलाएं लेकर पहुंचीं भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की तस्वीरें, युवाओं ने भी दिखाई ताकत

Sun, 21 Mar 2021 05:54 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, सुनाम (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, सुनाम (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sun, 21 Mar 2021 05:54 PM IST
विज्ञापन
Bhartiya Kisan Union Ugrahan rally against Farm Laws at Sunam
सुनाम रैली में पहुंचीं महिलाएं और बेटियां। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां और पंजाब खेत मजदूर यूनियन ने रविवार को सुनाम की नई अनाज मंडी में प्रदेश स्तरीय युवा रैली का आयोजन कर कृषि कानूनों को रद्द करने, निजीकरण नीति और बेरोजगारी को खत्म करने की मांग उठाई। रैली में भारी संख्या में शिरकत कर युवाओं ने ताकत दिखाई। 

विज्ञापन


महिलाएं पीले रंग के दुपट्टे ओढ़कर पहुंचीं, जबकि पुरुष पीले रंग की पगड़ी पहने थे। इस दौरान कई सदस्यों ने इंकलाबी गीत, कविताएं व शहीदों की जीवनियां प्रस्तुत कर लोगों में जोश भरा। केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी के अलावा शहीदों के समर्थन में अमर रहे के नारों से रैली स्थल गूंज उठा। संगठनों के प्रतिनिधियों ने सरकार की नीतियों को साम्राज्यवाद को बढ़ावा देने वाली नीतियां करार दिया।
विज्ञापन


वक्ताओं ने कहा कि जिन नीतियों के विरोध में देश के महान शूरवीरों ने शहादत दी थी, आज वैसी ही नीतियों को लागू करने की कोशिश हो रही है। भाकियू उगराहां के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां, जनक सिंह, अमोलक सिंह, लछमन सिंह, अमरीक सिंह, मनजीत पटियाला, चमकौर बरनाला, जोगिंदर सिंह मानसा ने कहा कि केंद्र की नीतियां हर वर्ग को प्रभावित कर रही हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

Bhartiya Kisan Union Ugrahan rally against Farm Laws at Sunam

केंद्र सरकार चहेतों के हितों की रक्षा करने वाली नीतियों को लागू करने के लिए देश के माहौल को अपने अनुसार ढाल रही है। महामारी के नाम पर लोगों की जुबान बंद की जा रही है। लेकिन वर्तमान में देश के महान शहीदों की सोच को आगे बढ़ाने की जरूरत है और संयुक्त संघर्ष मोर्चा इसके लिए पीछे नहीं हटेगा। 

प्रदेश का समूचा नौजवान वर्ग किसानों के संघर्ष में साथ दे रहा है। नारी शक्ति भी पीछे नहीं है और हर मोर्चे में महिलाएं योगदान दे रही हैं। कृषि कानूनों को वापस लेने तक आंदोलन जारी रहेगा। वक्ताओं ने कहा कि शहीद भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव को शहीद ऊधम सिंह की जन्मभूमि पर श्रद्धांजलि देने से नई ऊर्जा पैदा हुई है। 
      
युवाओं ने भगत सिंह व ऊधम सिंह की दोस्ती को किया सजदा 
शहीद ऊधम सिंह की जन्मभूमि सुनाम में सूबे भर से आए नौजवानों ने देश के दो महान शहीदों की दोस्ती को सजदा किया। शहर के मुख्य बाजारों में शहीदों की तस्वीरें लेकर युवाओं ने श्रद्धांजलि भेंट की और केंद्र की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। ऊधम सिंह के जीवन पर भगत सिंह की इतनी गहरी छाप थी कि फांसी का फंदा चूमने से कुछ दिन पहले उन्हें फांसी की चिंता नहीं थी, बल्कि फांसी होने से अपने बिछडे़ दोस्त (भगत सिंह) से मिलने को लालायित थे। 

23 मार्च 1931 को भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव सिंह को ब्रिटिश हुकूमत ने फांसी दी थी। जबकि ऊधम सिंह ने 13 मार्च 1940 को लंदन में माइकल ओड्वायर को मार गिराया था। 23 मार्च 1940 के दिन ऊधम सिंह, लंदन की जेल में थे और इस दिन उन्होंने कुछ भी नहीं खाया-पीया। किसी से बातचीत भी नहीं की थी। बल्कि एक पत्र के माध्यम से भगत सिंह के प्रति जज्बात का इजहार किया था। 

ऊधम सिंह ने इस पत्र में लिखा था कि उन्हें उम्मीद है कि मेरे दोस्त की तरह मुझे भी रात के वक्त ही फांसी दी जाएगी। यह 23 मार्च की बात है और आशा है कि मेरा दोस्त भी मुझसे मिलने की इच्छा रखते होंगे। भगत सिंह व ऊधम सिंह, साम्राज्यवादी नीतियों के खिलाफ थे और आजादी के बाद मुल्क को खुशहाल देखना चाहते थे। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed