पंजाब: तीन मंत्रियों संग मीटिंग के बाद भाकियू ने कहा- बैठक न बेनतीजा रही, न कोई हल निकला
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कृषि कानूनों को रद्द करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर विधानसभा के घेराव करने का एलान कर चुके भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) एकता उगराहां के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने सोमवार को तीन मंत्रियों के साथ हुई बैठक के बारे में कहा है कि यह बैठक न तो बेनतीजा रही और न ही इसमें किसी मसले का हल निकला है।
पंजाब भवन में प्रदेश सरकार के तीन मंत्रियों तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखबिंदर सिंह सरकारिया और सुखजिंदर सिंह रंधावा के साथ बैठक के बाद जोगिंदर सिंह उगराहां ने बताया कि उन्होंने सोमवार को विधानसभा के बाहर धरना देने का एलान किया था। इस पर सरकार की ओर से प्रस्ताव आया कि उनके तीन मंत्री बातचीत करेंगे।
इस पर संगठन की तरफ से हिस्सा लेते हुए मंत्रियों के सामने अपनी मांगे रखी। उगराहां ने कहा कि कुछ मांगों पर मंत्रियों ने सहमति जताई लेकिन कुछ पर उनका जवाब गोलमोल सा ही रहा। इस लिहाज से यह बैठक न तो बेनतीजा रही और न ही कुछ हासिल हुआ। इस मौके पर भाकियू एकता उगराहां के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां भी मौजूद रहे।
उगराहां ने कहा कि मंत्रियों के समक्ष यह मांग रखी गई कि तीन कृषि कानूनों को रद्द करने के साथ ही राज्य सरकार ने 2017 में जो एपीएमसी एक्ट बनाया था और अकाली सरकार ने 2013 में जो मंडी एक्ट बनाया था, उन्हें भी सदन में रद्द किया जाए। उगराहां ने कहा कि इस पर तीनों मंत्रियों ने विचार करने की बात कही, जिससे साफ है कि सरकार अपने बनाए कानून रद्द करने को तैयार नहीं है।
इसके साथ ही किसानों के खिलाफ दर्ज केस भी रद्द करने की मांग की गई। उगराहां ने बताया कि मंत्रियों ने दिवाली तक ये केस रद्द करने का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि संगठन की तरफ से मंत्रियों के समक्ष पराली जलाने का मुद्दा भी उठाया गया। पिछले साल पराली न जलाने पर मुआवजा दिया जाना था, वह अब तक नहीं दिया गया। इस पर मंत्रियों की तरफ से कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके अलावा संगठन ने विधानसभा चुनाव के दौरान किए वादे को पूरा करने को कहा।
जारी रहेंगे धरने-प्रदर्शन
जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि उनका संगठन धरने-प्रदर्शन जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगों को लेकर केंद्र सरकार ने अब तक मुंह नहीं खोला है। विरोध प्रदर्शनों को और तेज किया जाएगा। सरकार यह मानकर चल रही है कि धान का सीजन है और कामकाज की वजह से प्रदर्शन खत्म हो जाएंगे या प्रदर्शनों के कारण हो रहे खर्च से किसान टूट जाएंगे तो ऐसी कोई समस्या किसानों के सामने नहीं है।