भारत बंद का पंजाब-हरियाणा में व्यापक असर, सड़कों पर उतरे किसान, 44 ट्रेनें रद्द, 34 के मार्ग बदले
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केंद्रीय कृषि कानूनों और बिजली संशोधन विधेयक के विरोध में पंजाब-हरियाणा के किसान गुरुवार को सड़कों पर उतर आए। किसान कई हाईवे पर धरने पर बैठ गए। इससे वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। चंडीगढ़ से दिल्ली तक जीटी रोड चार घंटे जाम रहा, जिससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
किसान संगठनों ने देशव्यापी चक्काजाम का आह्वान किया। पंजाब में इसी के तहत 31 किसान संगठनों ने दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक 300 से अधिक स्थानों पर धरना दिया। किसानों के इस धरने में कर्मचारियों, छात्रों, युवाओं, लेखकों, मनोरंजन जगत से जुड़े लोगों और व्यापारियों ने हिस्सा लिया।
जांलधर में किसानों का प्रदर्शन।
वहीं, हरियाणा में भी किसानों के चक्काजाम के कारण जगह-जगह सड़कों पर जाम लगा रहा। फतेहाबाद जिले में किसानों ने छह जगह धरना दिया। इनमें सिरसा-चंडीगढ़ मार्ग, हिसार-चंडीगढ़ मार्ग (एनएच 148बी) शामिल थे। इसी तरह सिरसा में किसानों ने पांच जगहों पर जाम लगाया। इसके अलावा अंबाला, करनाल, चरखी दादरी, भिवानी, हिसार, रोहतक और नारनौल में भी प्रदर्शन हुआ। किसान संगठनों का कहना है कि वे 25 नवंबर को करनाल में सीएम आवास का घेराव करेंगे।
अब 26-27 नवंबर के दिल्ली मार्च की तैयारी
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के महासचिव जगमोहन सिंह पटियाला ने बताया कि किसानों के 36 दिन से चल रहे आंदोलन से यह साबित हो गया है कि 26-27 नवंबर को होने वाले दिल्ली मार्च में पंजाब के लाखों लोग शामिल होंगे। देश के सभी किसान संगठनों की संयुक्त बैठकों के बाद पंजाब की 30 किसान जत्थेबंदियां 18 नवंबर को चंडीगढ़ में किसान भवन में बैठक करेंगी। इसमें दिल्ली आंदोलन की तैयारियों पर चर्चा होगी।
बठिंडा: किसान संगठनों ने आठ जगह लगाया जाम
कृषि कानूनों के विरोध में जिले के आठ स्थानों पर किसानों ने हाईवे पर धरना लगाकर जाम लगाया। घनइया चौक पर लगे किसानों के धरने में पहुंचे आप कार्यकर्ताओं के साथ किसानों की किसी बात को लेकर धक्कामुक्की हो गई। जिसके बाद किसानों ने आप कार्यकर्ताओं को धरने से बाहर निकाल दिया।
भारतीय किसान मजदूर यूनियन के नेता बलकार सिंह ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। आने वाले कुछ दिनों में देश के किसान कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली के रामलीला मैदान में एकत्र होकर केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।
वहीं घनइया चौक पर किसानों के धरने में आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष नवदीप सिंह जीदा कार्यकर्ताओं के साथ पहुंचे और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। इसी दौरान भारतीय किसान कीर्ती मजदूर यूनियन के नेता हनी सिंह ने आप के जिला अध्यक्ष एवं कार्यकर्ताओं को शांत रहने को कहा।
उन्होंने कहा कि स्टेज से विभिन्न किसान यूनियनों के नेता किसानों को संबोधित कर रहे हैं। लेकिन आप कार्यकर्ता ने जब किसान नेता की बात नहीं मानी तो खफा किसानों ने आप कार्यकर्ताओं को बाजूओं से पकड़कर धरने से बाहर निकालना शुरू कर दिया। इस पर आप कार्यकर्ताओं की किसानों से धक्का मुक्की भी हुई।
आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष नवदीप सिंह जीदा ने कहा कि आप कार्यकर्ताओं के साथ कोई धक्कामुक्की नहीं हुई, बल्कि किसानों ने सिर्फ आप कार्यकर्ताओं को शोर न मचाने की अपील की थी। जिसके कुछ समय बाद वह पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ धरना छोड़कर वापस आ गए थे। वहीं विभिन्न किसान संगठनों की ओर से घनइया चौक पर लगाए जाम में किसानों के समर्थन में पुलिस पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष पूर्व डीएसपी रणजीत सिंह समेत सौ के करीब सदस्य पहुंचे।
करनाल में जीटी रोड पर उतरे किसान।
फिरोजपुर : ‘केंद्र सरकार कारपोरेट घरानों के इशारे पर कर रही कार्य’
किसान संगठनों ने कृषि कानून के विरोध में मक्खू, जीरा, जलालाबाद, फिरोजपुर और बंगाली पुल पर धरना देकर जम्मू-कश्मीर और दिल्ली जाने वाले राजमार्ग को चार घंटे तक पूरी तरह बंद रखा। इस मौके पर किसानों ने केंद्र सरकार और कारपोरेट घरानों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कारपोरेट घरानों के इशारे पर कार्य कर रही है।
किसान नेता जसबीर सिंह, इंद्रजीत सिंह व बलजिंदर सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार कृषि कानून व अन्य काले कानून बनाकर किसानों और मजदूरों को बर्बाद करने पर तुली है। केंद्र सरकार किसानों के खेतों की बागडोर कारपोरेट घरानों के हाथों में सौंपने में तुली है।
किसानों का आरोप है कि केंद्र सरकार ने कई सरकारी कंपनियों, रेलवे व गैस एजेंसियों को कारपोरेट घरानों के हवाले कर दिया है। इस दौरान मक्खू-जालंधर स्थित गिद्धडपिंडी के पास सतलुज नदी पर बने पुल, मक्खू, जीरा, जलालाबाद व बंगाली पुल पर धरना देकर केंद्र सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया है।
फरीदकोट : किसानों ने 10 स्थानों पर लगाया जाम
कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों ने फरीदकोट में 10 स्थानों पर दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक नेशनल व स्टेट हाईवे पर चक्का जाम किया। फरीदकोट में गांव पक्का, सादिक व गोलेवाला, कोटकपूरा के मुख्य चौक, मोगा रोड व कोठे गज्जन सिंह और जैतो में बस स्टैंड, गांव गोंदारा, रोमाना अलबेल सिंह व वाडा भाई का में चक्का जाम कर मोदी सरकार के खिलाफ रोष जताया।
कोटकपूरा में बठिंडा रोड स्थित गांव कोठे गज्जन सिंह वाला के पास नेशनल हाईवे पर भाकियू एकता सिद्धूपुर के धरने में पंजाबी फिल्म अभिनेता योगराज सिंह भी पहुंचे। इस मौके पर अभिनेता योगराज सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार के खेती कानून से सिर्फ किसान ही प्रभावित नहीं होंगे बल्कि समाज के सभी वर्गों का कामकाज ठप हो जाएगा।
बटाला में एसएसपी ऑफिस में किसानों का विरोध प्रदर्शन।
लुधियाना : किसानों ने सतलुज पुल पर लगाईं ट्रालियां
कृषि सुधार कानूनों के विरोध में किसान यूनियन नेताओं ने गुरुवार दोपहर 12 बजे सतलुज पुल पर ट्रालियां लगाकर लुधियाना-जालंधर नेशनल हाईवे रोक दिया। दोपहिया वाहनों को भी निकलने का रास्ता नहीं दिया गया। हालांकि सैन्य वाहन और एंबुलेंस को किसान नेताओं ने खुद जाम से निकलवाया। किसान नेताओं ने कहा कि अब दिल्ली को घेरने के लिए वह पूरे देश के किसान संगठनों को एकजुट कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इसका असर भी दिखाई देगा।
भारतीय किसान यूनियन कादियां के नेता हरमीत कादियां ने बताया कि 36 दिन से किसान केंद्र सरकार के कृषि सुधार कानूनों का विरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार अपना अडियल रवैया नहीं छोड़ रही है। अभी तक किसानों ने कोई उग्र प्रदर्शन नहीं किया है। जहां भी धरना लगा है, किसी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया गया है। गुरुवार को देश भर में बंद से अब यह आंदोलन सभी जगह फैल गया है।
रतिया में सड़कों पर उतरे किसान।
खेतों में पराली तो ऐसे ही जलेगी
पंजाब के खेतों में जल रही पराली के मामले पर किसान नेता हरमीत सिंह ने साफ कहा कि खेतों में पराली इसी तरह जलेगी। एक एकड़ जमीन में पराली संभालने के लिए किसान के छह हजार रुपये खर्च होते हैं। छह नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला कर सरकार को पराली संभालने के लिए सौ रुपये प्रति क्विंटल या फिर 2500 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने को कहा था। अभी तक सरकार ने कोई राहत किसानों को नहीं दी है। ऐसे में वह पराली जलाना कैसे छोड़ सकते हैं।
कैथल में तितरम मोड़ पर किसानों ने लगाया जाम।
अमृतसर में भी किसानों का प्रदर्शन
किसानों ने अमृतसर-जालंधर जीटी रोड पर स्थित गोल्डन गेट के पास प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों के साथ महिलाएं भी इस धरने में शामिल हुईं। धरने के कारण अमृतसर-जालंधर जीटी रोड पर कई किमी लंबा जाम लग गया। किसानों ने लारेंस रोड, मजीठा रोड, छेहरटा और बाईपास के कई क्षेत्रों में धरना लगाया। शहर के भीतर भी लोगों को ट्रैफिक समस्या से दो चार होना पड़ा। किसानों ने दुकानदारों से अपील की कि वह भी किसानों के संघर्ष में उनका साथ दें। किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के सदस्य गुरबचन सिंह चब्बा ने कहा कि किसानों की ओर से दी गई कॉल को सफल बनाने के लिए किसानों ने सड़क पर जाम लगाया है।
किसानों ने चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय मार्ग पर किया चक्का जाम
किसान संगठनों ने गुरुवार को चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर गांव खाबड़ा के पास चक्का जाम किया। दोपहर 12 बजे से लेकर शाम चार बजे तक किसानों ने रास्ता रोके रखा। इस प्रदर्शन में किसान जत्थेबंदियों के अलावा मजदूर यूनियनों और विद्यार्थी यूनियनों ने भी किसानों की हिमायत की। इसके अलावा किसानों द्वारा गांव रंगीलपुर के पास राष्ट्रीय मार्ग और श्री आनंदपुर साहिब में गांव नक्कियां के पास भी केंद्र के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। रंगीलपुर के पास प्रदर्शन के दौरान किसानों की कई राहगीरों से बहसबाजी भी हुई।
पातड़ां में किसानों ने दिल्ली-संगरूर हाईवे पर लगाया जाम
केंद्र सरकार की ओर से पास खेती कानूनों के विरोध में पातड़ां में क्रांतिकारी किसान यूनियन ने दिल्ली-संगरूर हाईवे पर जाम लगा दिया। वहीं किसान यूनियन उगराहां ने न्याल बाईपास पातड़ां पर पातड़ां-पटियाला रोड मुकम्मल तौर पर बंद कर दिया।
दिल्ली-संगरूर हाईवे पर गांव पैद के पास टोल प्लाजा पर लगे धरने को संबोधित करते हुए क्रांतिकारी किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रधान डॉ. दर्शन पाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों को कारपोरेट घरानों के रहमोकरम पर छोड़ दिया है। इन खेती कानूनों के वापस होने तक संघर्ष जारी रहेगा। किसान किसी कीमत पर पीछे नहीं हटेंगे।
वहीं न्याल बाईपास पटियाला रोड पर किसान नेता रघबीर सिंह, हरदेव सिंह, जसविंदर सिंह ने कहा कि दिल्ली सरकार ने कभी पंजाब के किसानों को उनके हक नहीं दिए। इस बार किसान अपने हक लेकर ही रहेंगे। उधर नाभा में भारतीय किसान यूनियन डकौंदा ने रोहटी पुल चौक में जाम लगा दिया। साथ ही भारतीय किसान यूनियन राजेवाल की ओर से नाभा में दुलदी गेट के पास नाभा-मालेरकोटला चंगी सड़क पर जाम लगाकर धरना दिया गया। किसान नेताओं पाल सिंह कैदूपुर, महिंदर सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार बाज न आई तो उसे सबक सिखाया जाएगा।
संगरूर में दिल्ली-लुधियाना और बठिंडा-चंडीगढ़ हाईवे जाम
कृषि कानूनों को रद्द करवाने की मांग को लेकर पंजाब बंद के आह्वान को संगरूर में पूर्ण समर्थन मिला। जिले के विभिन्न हिस्सों में मुख्य मार्गों पर किसान संगठनों ने जाम लगाया। महावीर चौक में किसान संगठनों ने दिल्ली-लुधियाना और बठिंडा-चंडीगढ़ मार्ग पर दोपहर 12 से 4 बजे तक जाम लगाकर यातायात पूरी तरह बाधित रखा।
किसान नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार जीएसटी, ग्रामीण विकास फंड और माल गाड़ियां रोककर पंजाब को आर्थिक तौर पर कमजोर करना चाहती है। केंद्र की ऐसी हरकतों ने पंजाब सहित पूरे देश के किसानों के गुस्से को तेज किया है। केंद्र सरकार किसानों की जमीन कॉरपोरेट घरानों को सौंपने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रही है लेकिन किसान इसे किसी सूरत में होने नहीं देंगे।
केंद्र सरकार के ऐसे फैसलों का डटकर विरोध किया जाएगा। 20 नवंबर तक मालगाड़ियों के लिए रेलवे ट्रैक खुले हैं। रेलवे प्लेटफार्म भी खाली किए जाएंगे। कारपोरेट घरानों के पेट्रोल पंप, शापिंग मॉल, टोल प्लाजा और भाजपा नेताओं का घेराव तेज किया जाएगा। इसके बाद 26 नवंबर को दिल्ली की तरफ कूच किया जाएगा।
बटाला : किसानों ने जीटी रोड पर की नारेबाजी
पूरे देश में बंद की कॉल के आह्वान पर बटाला में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी ने चक्का जाम कर रोष जताया। प्रदर्शनकारी किसानों ने बटाला के एसएसपी कार्यालय के सामने जीटी रोड पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के कारण लगाए गए जाम से यातायात पूरी तरह बाधित रहा। प्रदर्शनकारी किसानों में महिलाएं भी शामिल थीं। किसानों के इस प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए थे। सड़क के बीच बैठकर प्रदर्शनकारियों ने कृषि कानूनों की निंदा की। वहीं पठानकोट, जालंधर, मुक्तसर और अबोहर में भी किसान संगठनों ने भारत बंद के समर्थन में प्रदर्शन किया।
आज भी रद्द रहेंगी 44 ट्रेनें, 34 का बीच रास्ते होगा संचालन
पंजाब में रेलवे ट्रैक पर बैठे किसान गुरुवार धरने से उठ गए लेकिन उन्होंने प्रशासन व पंजाब सरकार से वार्ता के दौरान सिर्फ ट्रैक पर मालगाड़ियों के संचालन की ही हामी भरी है। ट्रैक पर मेल व एक्सप्रेस सहित दूसरी किसी प्रकार की यात्री गाड़ियों का संचालन नहीं किया जाएगा। इसलिए रेलवे ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पंजाब व जम्मू की तरफ जाने वाली ट्रेनों का संचालन पांच नवंबर तक स्थगित कर दिया है।