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अब सामने आएगा भगत सिंह को फांसी का असली सच

Sun, 06 Sep 2015 10:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, होशियारपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, होशियारपुर Updated Sun, 06 Sep 2015 10:55 AM IST
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bhagat singh death panelty case will open in lahor highcourt

भगत सिंह को फांसी दिए जाने का असली सच अब सामने आएगा। मामले की सुनवाई फिर से शुरू होने जा रही है। पाकिस्तान के भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन ने इस मामले को दोबारा खोलने के लिए लाहौर हाईकोर्ट में 2013 में आवेदन दाखिल किया था।

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‘लाहौर मामले’ के नाम से प्रसिद्ध इस केस की सुनवाई में मदद के लिए सुप्रीम कोर्ट के वकील पाकिस्तान जाएंगे। यूपीए सरकार ने भारत के इच्छुक वकीलों को पाक जाने की विशेष अनुमति दी थी।
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भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन, पाकिस्तान के अध्यक्ष इम्तियाज रशीद कुरैशी ने यह जानकारी दी। वे शनिवार को भगत सिंह के भाई राजिंदर सिंह के नाती अधिवक्ता सुखविंदर जीत सिंह संघा से मिलने के लिए होशियारपुर आए थे।
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भगत सिंह फाउंडेशन के अध्यक्ष ने दी थी अर्जी

bhagat singh death panelty case will open in lahor highcourt

कुरैशी ने बताया कि 24 मई 2013 को अपने आदेश में लाहौर उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति शुजात अली खान ने केस मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा था। आदेश में जस्टिस खान ने कहा था कि मामले में सार्वजनिक महत्व के जटिल सवाल उठाए गए हैं। इसलिए इसकी सुनवाई वृहद पीठ द्वारा की जानी चाहिए।

मामला तब से लंबित पड़ा हुआ था और अब तक किसी बड़ी बेंच का गठन नहीं किया गया। वह मामले में मदद के लिए तैयार भारत के सुप्रीम कोर्ट के अपने वकील दोस्तों और भगत सिंह के परिवार के सदस्यों से मिलने के लिए यहां आए हैं। पाक लौट कर वह मामले की जल्द सुनवाई के लिए अदालत में आर्जी दाखिल करेंगे।

उन्होंने कहा कि यह भारत की उनकी दूसरी यात्रा है। उन्होंने बताया कि स्वेच्छा से इस मामले में उनकी मदद करने के लिए तैयार सुप्रीम कोर्ट के वकीलों को पिछली सरकार ने पूर्व सीएम मनमोहन सिंह के व्यक्तिगत हस्तक्षेप से मंजूरी प्रदान की थी। कुरैशी ने बताया कि भारतीय वकील अदालत के सामने उपस्थित होने के लिए अधिकृत तो नहीं हैं, लेकिन वे इस मामले की सुनवाई के लिए जरूरी कानूनी पहलुओं पर उनकी मदद करेंगे।

फांसी नहीं न्यायिक हत्या हुई

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कुरैशी ने कहा कि भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को दी गई फांसी एक न्यायिक हत्या थी क्योंकि न तो सांडर्स की हत्या संबंधी प्राथमिकी में उनके नाम थे और न ही उन्हें फांसी देने के लिए डेथ वारंट जारी करने वाले लाहौर उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार के पास ही इसके लिए कोई न्यायिक अधिकार था।

लिहाजा रजिस्ट्रार द्वारा जारी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की मौत का वारंट अवैध था। हमारी मांग है कि ब्रिटिश सरकार भारत और पाकिस्तान के लोगों से माफी मांगे और शहीदों के परिजनों को मुआवजा भी दे।

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