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Chandigarh News: एडिनोवायरस से सावधान, नवजात बच्चों को बना रहा शिकार

Mon, 03 Apr 2023 02:03 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 03 Apr 2023 02:03 AM IST
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Beware of adenovirus, making newborn children a victim
चंडीगढ़। कोरोना और इनफ्लुएंजा के बढ़ते मरीजों के बीच अब एडिनोवायरस का भी खतरा बढ़ गया है। एक साथ तीन वायरस लोगों पर अलग अलग तरह से आक्रमण कर रहे हैं। डॉक्टर भी इनके लक्षणों के कारण भ्रम में पड़ जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तीनों संक्रमण के लक्षण लगभग एक समान है, लेकिन चिंता की बात यह है कि एडिनोवायरस खासतौर पर नवजात बच्चों को अपना शिकार बना रहा है। वहीं इन संक्रमण के कारण लोगों के फेफड़े के साथ ही गले की स्थिति खराब हो रही है। संक्रमण के कारण ज्यादातर मरीज आवाज बंद होने की शिकायत लेकर अस्पतालों की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि इलाज के साथ ही संक्रमण वाले मरीजों की जिनोम सीक्वेंसिंग व वायरोलॉजी स्टडी भी जरूरी है जिससे संक्रमण के मुख्य कारण की जानकारी प्राप्त की जा सके।
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जिनोम के साथ वायरोलॉजी स्टडी जरूरी

वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन के एडवाइजर डॉ. आरएसबेदी ने बताया कि कोविड-19 और इन्फ्लूएंजा के बीच एडिनोवायरस के बढ़ते खतरे को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है। इन तीनों संक्रमण के मरीजों को चिन्हित करने के लिए जिनोम सीक्वेंसिंग के साथ वायरोलॉजी स्टडी बेहद जरूरी है। डॉ. बेदी ने बताया कि वायरोलॉजी स्टडी प्राइवेट सेक्टर में बेहद महंगा है। ऐसे में प्रशासन को इसकी जांच के लिए सरकारी संस्थान में तत्काल व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए जिससे संक्रमण के बढ़ते स्तर का समय रहते पता लगाकर उसे नियंत्रित करने के उपाय पर तेजी से काम किया जा सके।
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नवजात पर दें विशेष ध्यान

भारतीय बाल अकादमी की सदस्य व बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. गुंजन बवेजा का कहना है कि एडिनोवायरस का संक्रमण खास तौर पर नवजात बच्चों को ज्यादा शिकार बना रहा है। ऐसे में छोटे बच्चों में होने वाले वायरल इंफेक्शन को लेकर माता-पिता सचेत रहे। डॉ गुंजन ने बताया कि एडिनोवायरस के संक्रमण के कारण 24 से 48 घंटे के बीच नवजात वेंटिलेटर पर पहुंच रहे हैं। इसलिए बच्चों में साफ सफाई का विशेष रूप से ध्यान रखें।
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इनसेट-

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

- बुखार, गले में दिक्कत, सांस नली में सूजन, खांसी, डायरिया, आंखों में गुलाबीपन, पेट में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, आंखों के आसपास सूजन और उल्टी होना जैसे लक्षण मरीज के संक्रमित होने का इशारा करते हैं।


इनसेट

संक्रमण बेहद आसान, ऐसे करें बचाव

डॉ. बेदी ने बताया कि एडीनोवायरस कई तरह के वायरस का समूह है, जो आंख, सांस नली, फेफड़े, आंत, नर्वस सिस्टम और यूरिनरी ट्रैक्ट को संक्रमित करता है। इसके लक्षण फ्लू जैसे होते हैं। यह किसी भी उम्र वर्ग के लोगों को संक्रमित कर सकता है। इसका संक्रमण साल में कभी भी हो सकता है। इसका वायरस संक्रमित मरीज को छूने, हाथ मिलाने, संक्रमित चीजों को पकड़ने और हवा में मौजूद खांसी के ड्रॉप्लेट्स से फैलता है। इसलिए साफ सफाई ही बचाव का सबसे बेहतर उपाय है। डॉ. बेदी का कहना है मरीज के संपर्क में आने के बाद अपने हाथ जरूर धोएं। कुछ एडीनोवायरस मरीजों के मल के जरिए भी फैलते हैं। खासतौर पर संक्रमित बच्चे के डायपर को बदलने के दौरान। इसके अलावा इसका वायरस पानी (स्विमिंग पूल) के जरिए भी फैल सकता है।
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