ससुर से प्रभावित होकर राजनीति में आई आशा, ऐसा रहा अबतक का सफर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेयर उम्मीदवार आशा जसवाल अपने ससुर ठाकुर मलूक सिंह से प्रभावित होकर संघ और भाजपा में आई थी। सबसे पहले आशा जसवाल ने 1988 में अपने पूरे परिवार के साथ आगरा और उसके बाद 1989 में मुंबई में हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में शामिल होने के लिए गई थी।
आशा जसवाल उस समय अपने छोटे बच्चों का भी साथ ले गई थी। उस समय उनका बेटा ब्रजेश्वर जसवाल 10 और बेटी आंचल ठाकुर 4 साल की थी। चंडीगढ़ से उस समय नाममात्र लोग ही अधिवेशन में भाग लेने के लिए गए थे।
आशा जसवाल का जन्म 62 साल पहले हिमाचल के पालमपुर के गांव नौन में हुआ था जबकि उनका ससुराल जिला ऊना के गांव परंब का है। आशा जसवाल का संबंध राजपूत समुदाय से है। आशा जसवाल के ससुर जनसंघ से जुड़े हुए थे। वह संघ में भाग संघचालक भी रह चुके हैं।
हिमाचल से जुड़ी तीसरी मेयर होंगी आशा
हिमाचल से जुड़ी तीसरी मेयर होंगी आशा :
इससे पहले भी दो महिला मेयर ऐसी रह चुकी हैं जिनका संबंध हिमाचल से रहा है। इनमें पूर्व मेयर पूनम शर्मा और ललित जोशी का नाम शामिल है और अब आशा जसवाल का नाम भी जुड़ जाएगा।
पहली बार बिना पार्षदों की राय लिए घोषित किए उम्मीदवार :
उम्मीदवारों का नाम तय करने के लिए भाजपा ने पहली बार पार्षदों की बैठक बुलाकर उनकी राय नहीं पूछी। इसका एक बड़ा कारण यह भी था कि ऐसा करने पर भाजपा के पार्षदों में गुटबाजी उभर सकती थी।
जबकि मेयर पद की अन्य दावेदार पूर्व मेयर राज बाला मलिक और हीरा नेगी को उम्मीद थी कि पार्षदों की राय में वह बाजी मार लेंगी, लेकिन टंडन गुट ने ऐसा न करके सीधा हाईकमान से बात करके आशा जसवाल को मेयर का उम्मीदवार घोषित कर दिया।
सूत्रों का कहना है कि आशा जसवाल की संघ परिवार से नजदीकियों के कारण राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामलाल भी उन्हें उम्मीदवार बनवाना चाहते थे।