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लगाम कसने की तैयारी: बीजिंग मॉडल से दिल्ली-एनसीआर में कम होगा प्रदूषण, सेवानिवृत्त आईएएस पी राघवेंद्र राव बने कमेटी के चेयरमैन

Mon, 21 Feb 2022 11:43 AM IST
निवेदिता वर्मा सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 21 Feb 2022 11:43 AM IST
सार

दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान अत्याधिक प्रदूषण बढ़ रहा है। धान के सीजन में पराली के अवशेष जलाने से प्रदूषण स्तर और बढ़ जाता है। इसको लेकर दिल्ली के साथ लगते राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान पर प्रदूषण फैलाने के आरोप लगते रहे हैं।

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Beijing's model will be adopted for permanent solution to pollution in Delhi and NCR
प्रदूषण - फोटो : फाइल

विस्तार

सीमाओं को लेकर बेशक भारत और चीन में तनाव चल रहा हो, लेकिन दिल्ली और एनसीआर में प्रदूषण के स्थायी समाधान के लिए बीजिंग का मॉडल अपनाया जाएगा। प्रदूषण रोकने के लिए देश के नामी विशेषज्ञों की एक कमेटी बनाई गई है। कमेटी के अध्यक्ष की जिम्मेदारी हरियाणा के सेवानिवृत्त आईएएस पी राघवेंद्र राव को सौंपी है, उनके साथ आईआईटी एक्सपर्टस समेत मौसम और पर्यावण विशेषज्ञ शामिल हैं। यह कमेटी इस मॉडल और दिल्ली के साथ लगते राज्यों का अध्ययन कर रही है। इसके आधार पर ही नए सिरे से एनसीआर के लिए मापदंड तय किए जाएंगे। 

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दिल्ली में हर साल सर्दियों के दौरान अत्याधिक प्रदूषण बढ़ रहा है। धान के सीजन में पराली के अवशेष जलाने से प्रदूषण स्तर और बढ़ जाता है। इसको लेकर दिल्ली के साथ लगते राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान पर प्रदूषण फैलाने के आरोप लगते रहे हैं। हर बार दिल्ली और अन्य राज्यों की सरकारें आमने सामने होती हैं। हालांकि, हर साल केंद्र सरकार और राज्य सरकारें प्रदूषण स्तर कम करने के लिए नए नए नियम लागू करती हैं। दो माह पहले वायु गुणवत्ता सूचकांक इतना बढ़ गया कि एनसीआर में सभी उद्योगों को बंद कर दिया गया। फिलहाल एनसीआर में उद्योगों को पांच दिन तक चलाने की अनुमति दी गई है।

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चरणबद्ध तरीके से प्रदूषण कम करने की तैयारी

विशेषज्ञों का कहना है कि 20 साल पहले बीजिंग शहर में दिल्ली की तरह प्रदूषण के हालात थे। वहां पर भी प्रदूषण कम करने के लिए चरणबद्ध तरीके से मॉडल लागू किया था। इस पूरी प्रक्रिया में 7 से 10 साल लगे हैं। लेकिन अब वहां का एक्यूआई सामान्य स्तर पर है। वहां पर आसपास के इलाकों के लिए नियम तय किए गए और इनका सख्ती से पालन कराया गया। दूसरा लोगों की सहभागिता रही, जिससे यह मॉडल सफल रहा। भारत में हर साल सर्दियों के दिनों में उद्योंगों आदि पर सख्ती बरती जाती है, शेष महीनों में ऐसा कुछ नहीं होता। इसलिए अब 1 से 3 साल और 3 से 5 साल के साथ दस साल तक का चरण तय किया जाएगा।

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चीन ने उठाए थे ये कदम

चीन ने 2013 में नेशनल एक्शन प्लान आन पाल्यूशन लागू किया। सरकार ने इस पर करीब 277 अरब डालर खर्च किए। इसके अनुसार ही योजनाएं बनाई गई। इसके तहत कारखानों को दूसरे स्थानों पर शिफ्ट किया गया या बंद किया गया। बहुत से उद्योगों में उत्पादन कम किया। चीन ने देश के कोयले का इस्तेमाल घटाया, जर्जर वाहनों को सड़कों से हटाया और बीजिंग में कारों की संख्या कम की। कोयला आधारित प्लांटस को मंजूरी देनी बंद की। शहरों में प्यूरीफायर लगाए। ताजी हवा के गलियारे बनाए और बड़ी संख्या में पेड़ लगाए। साथ ही चूल्हे के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी। 

राज्यों में जाकर कमेटी तलाश रही समाधान

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की ओर से बनाई गई विशेषज्ञों की यह कमेटी दिल्ली के साथ लगते हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, यूपी और चंडीगढ़ का अध्ययन करेंगे। कमेटी का मानना है कि दिल्ली से राज्यों की दूरी के हिसाब से नियम बनाए जाएंगे। क्योंकि दिल्ली से एक दम सटे क्षेत्र और 200 से 300 किलोमीटर दूरी वाले क्षेत्र के लिए एक जैसे नियम नहीं हो सकते। 

विशेषज्ञों की कमेटी बीजिंग मॉडल का अध्ययन कर रही है। साथ ही दिल्ली के साथ लगते राज्यों में जाकर स्थिति का आंकलन किया जा रहा। कमेटी प्रदूषण के स्थायी समाधान के लिए स्थाई रोडमैप तैयार करेगी, ताकि उसी के अनुसार राज्य काम करें। आगामी कुछ माह में रिपोर्ट तैयार करके केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी। -पी राघवेंद्र राव, अध्यक्ष, एक्सपर्ट कमेटी और हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।

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