फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   behrupiya play and nautanki festival ends

मंच पर 'बहुरूपिया' आ गया, नौटंकी खत्म करवा गया

Sun, 09 Feb 2014 12:37 AM IST
शंकर सिंह/ अमर उजाला, चंडीगढ़।
शंकर सिंह/ अमर उजाला, चंडीगढ़। Updated Sun, 09 Feb 2014 12:37 AM IST
विज्ञापन
behrupiya play and nautanki festival ends

छह दिन तक चले नौटंकी फेस्टिवल की हर नौटंकी में एक ही टीम। इससे टीम में सदस्यों में नौटंकी के दौरान थकावट साफ झलक रही थी।

विज्ञापन


शनिवार को टेगौर थिएटर में आयोजित सेलिब्रेटिंग नौटंकी का समापन बहुरूपिया नौटंकी के साथ हुआ। इसे अतुल यदुवंशी ने निर्देशित किया।

बहुरूपिया एक लोककथा है, जिसे नौटंकी के रूप में राजकुमार श्रीवास्तव ने लिखा है। फेस्टिवल का आयोजन मिनिस्ट्री ऑफ कल्चरल केंद्र सरकार एंड डिपार्टमेंट ऑफ कल्चरल अफेयर की ओर से किया गया था।  

अकसर दादी-नानी से सुनी जा चुकी है बहुरूपिया की कहानी। इसकी शुरूआत फॉग और लाइट के कांबीनेशन से हुई जो दर्शकों का ध्यान अच्छे से खींच रही थी। लेकिन, इसी बीच जब पंचभूत नामक मास्क पहने पांच किरदार आए तो उनमें आपसी तालमेल की कमी दिखी। कहानी दो सूत्रधारों से शुरू होती है, जो नौटंकी को शुरू करते हुए संवादों के माध्यम से कहानी को आगे ले जाते हैं।
विज्ञापन


कहानी एक बहुरूपिये की है जो रूप बदलने में माहिर है। बहुरूपिया एक दिन राजा के पास अपने इस हुनर के साथ जाता है। राजा उसके हुनर को जानने के लिए उसे एक साधु का रूप धरने को कहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


कुछ दिन बाद खबर आती है कि एक साधु महाराज नगर में हैं। राजा उनके पास जेवर और वस्त्र लेकर जाते हैं, तो साधु मना कर देता है। इससे राजा नाराज हो जाता है।

अगले दिन बहुरूपिया अपना इनाम लेने राजा के पास पहुंचता है, तो कहता है कि वह साधु वहीं था। इसलिए अपना किरदार निभा रहा था, जिससे वह कोई कीमती वस्तु नहीं ले सकता था।

इसी बीच राज्यनाई उसे चुड़ैल का रूप धरने को कहता है, लेकिन बहुरूपिया मना कर देता है। बाद में बहुरूपिया मान जाता है, लेकिन चुड़ैल बन उसके हाथों से राजा के साले का कत्ल हो जाता है।

इसकी वजह वह राजा को अपना चुडै़ल रूप बताता है। इसी बीच राज्यनाई चाल चलते हुए बहुरूपिये के कत्ल की साजिश रचते हैं, लेकिन वह नाकाम हो जाते हैं और अपनी चाल में खुद फंस जाता है।

थके हुए दिखे कलाकार
नौटंकी में अगर बात अभिनय की करें तो सभी कलाकार थके हुए लग रहे थे। इससे किरदार में जान ला पाना एक चैलेंज लग रहा था।

राजा बने धीरज और राज्यनाई बने शिव ने अपने किरदार में दम भरते हुए नाटक को कुछ हद तक संभाला। राज्यनाई का किरदार क्योंकि हंसी से भरपूर और नकारात्मक था, इसलिए उस किरदार में करने को बहुत कुछ था जो शिव ने अच्छे से निभाया।

लाइट एंड साउंड
नाटक में फॉग का इस्तेमाल किया गया जिसे रोशनी और असरदार बना रही थी। चुडै़ल के किरदार का मंचन बेहतरीन रहा। इसमें लाइट और फॉग का इस्तेमाल बखूबी किया गया।


कुछ एक सीन में फेड इन जल्दी हो गया, जिससे कुछ देर स्टेज खाली भी दिखा। यहां तक कि एक दृश्य में लाइट ठीक करता हुए स्टेज पर कर्मी भी दिख गया। साउंड हमेशा से नौटंकी की जान रही है, जिसने नाटक के साथ न्याय किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed