{"_id":"487698de9ea42ad9462e005a018d567b","slug":"battery-cart-not-operating-at-pgi","type":"story","status":"publish","title_hn":"धूल फांकने लगी पीजीआई की बैटरी कार्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धूल फांकने लगी पीजीआई की बैटरी कार्ट
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 04 Jan 2014 01:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मरीजों के लिए पीजीआई में आई बैटरी कार्ट उद्घाटन के बाद से धूल फांकने लगी हैं। उन्हें संस्थान के ट्रांसपोर्ट दफ्तर में तिरपाल से ढंक कर रख दिया गया है। दो दिन से बैटरी कार्ट फिलहाल यही पर खड़ी हैं।
पीजीआई की दलील है कि अब तक ड्राइवर व रूट के बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है।
जब इनकी भर्ती शुरू हो जाएंगी तो बैटरी कार्ट भी चलनी शुरू हो जाएगी, लेकिन इस दलील के बाद पीजीआई के एडमिनिस्ट्रेशन पर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इनका जल्दबाजी में उद्घाटन क्यों कराया गया? जब संसाधन ही पूरे नहीं थे तो इतने बड़े आयोजनों को आयोजित करने की क्या जरूरत थी? मीडिया में भी खबरें प्रकाशित हो गईं।
साल 2014 के पहले दिन पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च (पीजीआई) को एसबीआई की ओर से एक हजार कुर्सियां व चार बैटरी कार्ट दिए गए थे।
इस मौके पर एक समारोह भी आयोजित किया गया। कार्ट का उद्घाटन पीजीआई के निदेशक डॉ. योगेश चावला ने किया था। इनका मकसद पीजीआई में आने वाले मरीजों को एक विभाग से दूसरे विभाग में कार्ट के माध्यम से पहुंचाना था।
विज्ञापन
बैटरी संचालित होने के कारण यह वाहन अस्पताल के परिसर में पर्यावरण संरक्षण के नजरिए से ज्यादा उपयोगी हैं। साथ ही इनके आने से पीजीआई में चलने वाले आटो व रिक्शे से निजात मिलता, क्योंकि दोनों ही मरीजों से खूब पैसा ऐंठते हैं और पीजीआई में शोरगुल और ट्रैफिक भी खूब रहता, लेकिन बैटरी कार्ट का फायदा फिलहाल मरीजों को नहीं मिल पाया।
लुधियाना से आए परमिंदर ने बताया कि यदि संसाधन पूरे नहीं थे तो इतनी जल्दी उद्घाटन की क्या जरूरत पड़ गई? चंडीगढ़ से आए कुलबीर धवन ने बताया कि पीजीआई को इस बारे में पहले से ही सूचना थी कि बैटरी कार्ट आने वाली है, इसके बावजूद संस्थान की ओर से ड्राइवर व रूट नहीं तय किए गए। अभी तो यह भी नहीं मालूम कब तक ड्राइवर आ पाएंगे।
उद्घाटन के बाद भी थोड़ा समय लगता है। अभी ड्राइवरों का इंतजाम नहीं हो पाया है। ड्राइवरों के आने के बाद बैटरी कार्ट चल पाएंगी। यह बता पाना मुश्किल है कि कब तक ड्राइवर आएंगे। इस बारे में मुझे जानकारी भी नहीं है।
- मंजू वडवालकर, प्रवक्ता पीजीआई
विज्ञापन
पीजीआई की दलील है कि अब तक ड्राइवर व रूट के बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया है।
जब इनकी भर्ती शुरू हो जाएंगी तो बैटरी कार्ट भी चलनी शुरू हो जाएगी, लेकिन इस दलील के बाद पीजीआई के एडमिनिस्ट्रेशन पर सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इनका जल्दबाजी में उद्घाटन क्यों कराया गया? जब संसाधन ही पूरे नहीं थे तो इतने बड़े आयोजनों को आयोजित करने की क्या जरूरत थी? मीडिया में भी खबरें प्रकाशित हो गईं।
विज्ञापन
साल 2014 के पहले दिन पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड रिसर्च (पीजीआई) को एसबीआई की ओर से एक हजार कुर्सियां व चार बैटरी कार्ट दिए गए थे।
इस मौके पर एक समारोह भी आयोजित किया गया। कार्ट का उद्घाटन पीजीआई के निदेशक डॉ. योगेश चावला ने किया था। इनका मकसद पीजीआई में आने वाले मरीजों को एक विभाग से दूसरे विभाग में कार्ट के माध्यम से पहुंचाना था।
विज्ञापन
बैटरी संचालित होने के कारण यह वाहन अस्पताल के परिसर में पर्यावरण संरक्षण के नजरिए से ज्यादा उपयोगी हैं। साथ ही इनके आने से पीजीआई में चलने वाले आटो व रिक्शे से निजात मिलता, क्योंकि दोनों ही मरीजों से खूब पैसा ऐंठते हैं और पीजीआई में शोरगुल और ट्रैफिक भी खूब रहता, लेकिन बैटरी कार्ट का फायदा फिलहाल मरीजों को नहीं मिल पाया।
लुधियाना से आए परमिंदर ने बताया कि यदि संसाधन पूरे नहीं थे तो इतनी जल्दी उद्घाटन की क्या जरूरत पड़ गई? चंडीगढ़ से आए कुलबीर धवन ने बताया कि पीजीआई को इस बारे में पहले से ही सूचना थी कि बैटरी कार्ट आने वाली है, इसके बावजूद संस्थान की ओर से ड्राइवर व रूट नहीं तय किए गए। अभी तो यह भी नहीं मालूम कब तक ड्राइवर आ पाएंगे।
उद्घाटन के बाद भी थोड़ा समय लगता है। अभी ड्राइवरों का इंतजाम नहीं हो पाया है। ड्राइवरों के आने के बाद बैटरी कार्ट चल पाएंगी। यह बता पाना मुश्किल है कि कब तक ड्राइवर आएंगे। इस बारे में मुझे जानकारी भी नहीं है।
- मंजू वडवालकर, प्रवक्ता पीजीआई