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घमासान को तैयार बठिंडा का सियासी मैदान
अनिल भारद्वाज/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 02 Mar 2014 09:02 AM IST
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लोकसभा क्षेत्र बठिंडा का सियासी माहौल कांग्रेस-पीपीपी गठबंधन की खबरों के बीच एकदम से नया रंग ले गया है। शिअद उम्मीदवार हरसिमरत कौर बादल केलिए अभी तक बिलकुल आसान दिखाई दे रहा बठिंडा का चुनावी मैदान अब कुछ अलग दिखने लगा है।
नए सियासी समीकरणों के बीच उनका मुकाबला पीपीपी अध्यक्ष तथा पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत बादल से होने जा रहा है। यूं तो पिछले लोकसभा चुनाव में करीब सवा लाख वोट के अंतर से जीत हासिल करने के बाद से ही हरसिमरत बादल क्षेत्र में पूरी तरह से सक्रिय हैं।
उन्होंने संसद में पंजाब के मसले मजबूती से उठाए। पंजाब की अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार ने भी इस क्षेत्र पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रखा है। संगत दर्शनों की एक लंबी श्रृंखला सीएम प्रकाश सिंह बादल व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल यहां आयोजित कर चुके हैं।
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लोकसभा क्षेत्र के अधीन आते विधायकों के संबंधित समीकरण भी शिअद के हक में हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव में यहां की 9 में से 6 सीटों पर अकाली विधायक जीते, जबकि 3 सीटें कांग्रेस की झोली में गई थीं, इसके बावजूद वोटों के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयान करते हैं।
2009 के लोकसभा चुनाव में हरसिमरत बादल ने कांग्रेस के रणइंदर सिंह को 1,20,948 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। इसके बाद 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में बठिंडा लोकसभा क्षेत्र के अधीन आती 9 विधानसभा सीटों पर शिअद प्रत्याशियों को कुल 4,89,685 मत मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशियों को 4,57,397 वोट हासिल हुए।
वहीं, साझा मोर्चा के बैनर तले पीपीपी ने 7, जबकि भाकपा ने 2 सीटों पर चुनाव लड़ा। यहां पीपीपी को कुल 1,04,587 और भाकपा को 48,142 मत हासिल हुए। इस समय कांग्रेस तथा पीपीपी के हाथ मिल चुके हैं और भाकपा की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
ऐसे में भाकपा को छोड़कर कांग्रेस और पीपीपी को 2012 में हासिल हुए मतों को जोड़ लें तो यह आंकड़ा 5,61,984 बनता है, जो कि शिअद को मिले मतों से 72,299 अधिक है।
इस तरह ताजा हालात में मुकाबला उतना आसान नहीं, जितना पीपीपी और कांग्रेस के समझौते से पहले दिखाई दे रहा था। हालांकि, समझौते के सार्वजनिक होने के बाद सांसद हरसिमरत बादल और उनके पति व शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल इसे कांग्रेस की हार करार दे चुके हैं। उनका दावा है कि कांग्रेस के मैदान छोड़ने से शिअद आधी लड़ाई तो वैसे ही जीत चुका है।
कांग्रेसियों का रुख महत्वपूर्ण
नए घटनाक्रम के बीच बठिंडा लोकसभा क्षेत्र के कांग्रेसी नेताओं व कार्यकर्ताओं का रुख चुनावी नतीजों को प्रभावित करेगा। देखना होगा कि कांग्रेस का पूरा वोट बैंक मनप्रीत को कंवर्ट होता है या नहीं।
वहीं, इस बात का असर भी रहेगा कि विधानसभा चुनाव के बाद पीपीपी अपना कितना वोट बैंक कायम रख पाई है। भाकपा व माकपा के वोटर क्या लाइन लेते हैं, यह भी अहम रहेगा?
पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री सुरिंदर सिंगला और पूर्व विधायक हरमिंदर सिंह जस्सी इस सीट से कांग्रेस टिकट के दावेदार थे। मनप्रीत बादल को टिकट मिलने पर उनका रवैये पर नजर रखनी होगी।
विधानसभा चुनाव में मौड़ से कांग्रेसी उम्मीदवार के रूप में 43,962 वोट हासिल करने वाले मंगत राय बंसल अब शिअद में शामिल हो चुके हैं। इस सीट पर मनप्रीत बादल को पीपीपी उम्मीदवार के रूप में 26,398 वोट मिले थे। इस प्रकार तमाम तरह के कारक इस सीट पर नतीजे को प्रभावित करेंगे।
यहां थी हरसिमरत की लीड
2009 के आम चुनाव में शिअद प्रत्याशी हरसिमरत बादल ने कांग्रेस के रणइंदर सिंह को 7 विधानसभा सीटों पर पछाड़ा था। हरसिमरत को लंबी, भुच्चो मंडी, बठिंडा ग्रामीण, तलवंडी साबो, मौड़, सरदूलगढ़ तथा बुढलाडा में लीड मिली थी। रणइंदर बठिंडा शहरी और मानसा में आगे रहे थे।
विधानसभा चुनाव में आंकड़ा हुआ 6-3
2012 के विधानसभा चुनाव में शिअद की लीड का आंकड़ा कम हुआ। इस चुनाव में शिअद को 6, जबकि कांग्रेस को 3 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल हुई। लंबी, बठिंडा शहरी व ग्रामीण, मौड़, मानसा और बुढलाडा में शिअद प्रत्याशी जीते। भुच्चो मंडी, तलवंडी साबो और सरदलूगढ़ सीटें कांग्रेस की झोली में गईं।
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नए सियासी समीकरणों के बीच उनका मुकाबला पीपीपी अध्यक्ष तथा पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री मनप्रीत बादल से होने जा रहा है। यूं तो पिछले लोकसभा चुनाव में करीब सवा लाख वोट के अंतर से जीत हासिल करने के बाद से ही हरसिमरत बादल क्षेत्र में पूरी तरह से सक्रिय हैं।
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उन्होंने संसद में पंजाब के मसले मजबूती से उठाए। पंजाब की अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार ने भी इस क्षेत्र पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रखा है। संगत दर्शनों की एक लंबी श्रृंखला सीएम प्रकाश सिंह बादल व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल यहां आयोजित कर चुके हैं।
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लोकसभा क्षेत्र के अधीन आते विधायकों के संबंधित समीकरण भी शिअद के हक में हैं। 2012 के विधानसभा चुनाव में यहां की 9 में से 6 सीटों पर अकाली विधायक जीते, जबकि 3 सीटें कांग्रेस की झोली में गई थीं, इसके बावजूद वोटों के आंकड़े कुछ और ही कहानी बयान करते हैं।
2009 के लोकसभा चुनाव में हरसिमरत बादल ने कांग्रेस के रणइंदर सिंह को 1,20,948 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। इसके बाद 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में बठिंडा लोकसभा क्षेत्र के अधीन आती 9 विधानसभा सीटों पर शिअद प्रत्याशियों को कुल 4,89,685 मत मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशियों को 4,57,397 वोट हासिल हुए।
वहीं, साझा मोर्चा के बैनर तले पीपीपी ने 7, जबकि भाकपा ने 2 सीटों पर चुनाव लड़ा। यहां पीपीपी को कुल 1,04,587 और भाकपा को 48,142 मत हासिल हुए। इस समय कांग्रेस तथा पीपीपी के हाथ मिल चुके हैं और भाकपा की स्थिति स्पष्ट नहीं है।
ऐसे में भाकपा को छोड़कर कांग्रेस और पीपीपी को 2012 में हासिल हुए मतों को जोड़ लें तो यह आंकड़ा 5,61,984 बनता है, जो कि शिअद को मिले मतों से 72,299 अधिक है।
इस तरह ताजा हालात में मुकाबला उतना आसान नहीं, जितना पीपीपी और कांग्रेस के समझौते से पहले दिखाई दे रहा था। हालांकि, समझौते के सार्वजनिक होने के बाद सांसद हरसिमरत बादल और उनके पति व शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल इसे कांग्रेस की हार करार दे चुके हैं। उनका दावा है कि कांग्रेस के मैदान छोड़ने से शिअद आधी लड़ाई तो वैसे ही जीत चुका है।
कांग्रेसियों का रुख महत्वपूर्ण
नए घटनाक्रम के बीच बठिंडा लोकसभा क्षेत्र के कांग्रेसी नेताओं व कार्यकर्ताओं का रुख चुनावी नतीजों को प्रभावित करेगा। देखना होगा कि कांग्रेस का पूरा वोट बैंक मनप्रीत को कंवर्ट होता है या नहीं।
वहीं, इस बात का असर भी रहेगा कि विधानसभा चुनाव के बाद पीपीपी अपना कितना वोट बैंक कायम रख पाई है। भाकपा व माकपा के वोटर क्या लाइन लेते हैं, यह भी अहम रहेगा?
पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री सुरिंदर सिंगला और पूर्व विधायक हरमिंदर सिंह जस्सी इस सीट से कांग्रेस टिकट के दावेदार थे। मनप्रीत बादल को टिकट मिलने पर उनका रवैये पर नजर रखनी होगी।
विधानसभा चुनाव में मौड़ से कांग्रेसी उम्मीदवार के रूप में 43,962 वोट हासिल करने वाले मंगत राय बंसल अब शिअद में शामिल हो चुके हैं। इस सीट पर मनप्रीत बादल को पीपीपी उम्मीदवार के रूप में 26,398 वोट मिले थे। इस प्रकार तमाम तरह के कारक इस सीट पर नतीजे को प्रभावित करेंगे।
यहां थी हरसिमरत की लीड
2009 के आम चुनाव में शिअद प्रत्याशी हरसिमरत बादल ने कांग्रेस के रणइंदर सिंह को 7 विधानसभा सीटों पर पछाड़ा था। हरसिमरत को लंबी, भुच्चो मंडी, बठिंडा ग्रामीण, तलवंडी साबो, मौड़, सरदूलगढ़ तथा बुढलाडा में लीड मिली थी। रणइंदर बठिंडा शहरी और मानसा में आगे रहे थे।
विधानसभा चुनाव में आंकड़ा हुआ 6-3
2012 के विधानसभा चुनाव में शिअद की लीड का आंकड़ा कम हुआ। इस चुनाव में शिअद को 6, जबकि कांग्रेस को 3 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल हुई। लंबी, बठिंडा शहरी व ग्रामीण, मौड़, मानसा और बुढलाडा में शिअद प्रत्याशी जीते। भुच्चो मंडी, तलवंडी साबो और सरदलूगढ़ सीटें कांग्रेस की झोली में गईं।