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टीचर भर्ती घोटाला: एक को मिली राहत तो दूसरे को लगा बड़ा झटका
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 05 Jan 2017 09:49 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : डेमो फोटो
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जेबीटी-टीजीटी टीचर भर्ती घोटाले में गिरफ्तार किए गए दो टीचर्स में से एक को बड़ी राहत मिली तो दूसरे को झटका लगा। सेक्टर-10 के गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में टीचर रहे सोनीपत निवासी नवीन कुमार को बुधवार जिला अदालत से नियमित जमानत मिल गई। वहीं मामले में एक अन्य आरोपी सोनीपत के ही रहने वाले अशोक कुमार को अदालत से राहत नहीं मिली। सेशन कोर्ट ने पुलिस के जवाब के बाद उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।
सेशन कोर्ट ने बुधवार को दोनों याचिकाओं पर सुनवाई की। सोनीपत निवासी अशोक कुमार की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका में कहा गया था कि वह अपना व्यवसाय करता है और 12वीं पास है। उसका इस भर्ती घोटाले से कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि वह टीचर के पद के योग्य ही नहीं है। हालांकि उसने जनवरी 2015 में हुई परीक्षा के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसके लिए क्वालिफाई नहीं कर सका।
पुलिस ने इसके जवाब में कहा कि अशोक कुमार को 2 जनवरी को जांच ज्वाइन करने के लिए बुलाया गया था, लेकिन वह नहीं आया। उसका नाम मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल बृजेंद्र नैन, सह आरोपी संपूर्ण सिंह, सतिंदर हुड्डा, रविंदर बनिया की डिस्क्लोजर स्टेटमेंट के बाद शामिल किया गया था। स्टेटमेंट के अनुसार अशोक उनके पास अन्नू लकरा नामक कैंडीडेट लेकर आया था। उससे उसने 8.5 लाख रुपये लिए थे।
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इसमें से डेढ़ लाख रुपये उसने कमीशन के काटकर 7 साल रुपये उन्हें दिए थे। इसके अलावा वह उन नौ लोगों के ग्रुप में शामिल था जो लखनऊ गए थे। साथ ही कैंडीडेट से जमा किए गए 70 लाख रुपये उन्होंने मास्टरमाइंड मिथिलेश पांडे और दिनेश यादव को दिए थे। पुलिस के अनुसार इसलिए अशोक की गिरफ्तारी जरूरी है। ताकि उससे मास्टरमाइंड मिथिलेश पांडे तक पहुंचा जा सके।
साथ ही अन्य बेनिफिशरी टीचरों का पता चल सके। इसके अलावा पेपर लीक करवाने वाले एजेंटों का पता चल सके। सेशन कोर्ट ने पुलिस के जवाब और दलीलें सुनने के बाद अशोक को अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया और उसकी याचिका खारिज कर दी। वहीं अदालत ने सरकारी टीचर रहे नवीन कुमार की नियमित जमानत याचिका मंजूर कर दी।
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सेशन कोर्ट ने बुधवार को दोनों याचिकाओं पर सुनवाई की। सोनीपत निवासी अशोक कुमार की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका में कहा गया था कि वह अपना व्यवसाय करता है और 12वीं पास है। उसका इस भर्ती घोटाले से कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि वह टीचर के पद के योग्य ही नहीं है। हालांकि उसने जनवरी 2015 में हुई परीक्षा के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसके लिए क्वालिफाई नहीं कर सका।
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पुलिस ने इसके जवाब में कहा कि अशोक कुमार को 2 जनवरी को जांच ज्वाइन करने के लिए बुलाया गया था, लेकिन वह नहीं आया। उसका नाम मामले में मुख्य आरोपियों में शामिल बृजेंद्र नैन, सह आरोपी संपूर्ण सिंह, सतिंदर हुड्डा, रविंदर बनिया की डिस्क्लोजर स्टेटमेंट के बाद शामिल किया गया था। स्टेटमेंट के अनुसार अशोक उनके पास अन्नू लकरा नामक कैंडीडेट लेकर आया था। उससे उसने 8.5 लाख रुपये लिए थे।
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इसमें से डेढ़ लाख रुपये उसने कमीशन के काटकर 7 साल रुपये उन्हें दिए थे। इसके अलावा वह उन नौ लोगों के ग्रुप में शामिल था जो लखनऊ गए थे। साथ ही कैंडीडेट से जमा किए गए 70 लाख रुपये उन्होंने मास्टरमाइंड मिथिलेश पांडे और दिनेश यादव को दिए थे। पुलिस के अनुसार इसलिए अशोक की गिरफ्तारी जरूरी है। ताकि उससे मास्टरमाइंड मिथिलेश पांडे तक पहुंचा जा सके।
साथ ही अन्य बेनिफिशरी टीचरों का पता चल सके। इसके अलावा पेपर लीक करवाने वाले एजेंटों का पता चल सके। सेशन कोर्ट ने पुलिस के जवाब और दलीलें सुनने के बाद अशोक को अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया और उसकी याचिका खारिज कर दी। वहीं अदालत ने सरकारी टीचर रहे नवीन कुमार की नियमित जमानत याचिका मंजूर कर दी।