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चंडीगढ़ में बदहाल सड़कें: हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन और एमसी से मांगा जवाब, दायर की गई थी जनहित याचिका
Sat, 27 Sep 2025 05:08 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 27 Sep 2025 05:08 PM IST
सार
नगर निगम के सर्वे के अनुसार शहर में 180 किलोमीटर सड़कों को तुरंत रिपेयर की जरूरत है। नगर निगम फंड की कमी का हवाला देकर अपने हाथ पीछे खींच लेता है। सड़क के मुद्दे पर राजनीति होती है लेकिन विकास कार्य करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।
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चंडीगढ़ नगर निगम
- फोटो : फाइल
विस्तार
चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ प्रशासन की अनदेखी के चलते शहर की सड़कों की बदहाली का मामला जनहित याचिका के माध्यम से पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के समक्ष रखा गया है। याचिका पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, यूटी प्रशासन, नगर निगम, मेयर, डीसी व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट मुकुल गोयल ने बताया कि स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल चंडीगढ़ की सड़कें बदहाल हालत में हैं। मानसून सीजन में हुई बरसात ने हालात को बदतर बना दिया है। वी 3 सेक्टर डिवाइडिंग रोड को लेकर नगर निगम और प्रशासन जिम्मेदारी को एक दूसरे पर डाल रहे हैं।
नगर निगम के सर्वे के अनुसार शहर में 180 किलोमीटर सड़कों को तुरंत रिपेयर की जरूरत है। नगर निगम फंड की कमी का हवाला देकर अपने हाथ पीछे खींच लेता है। सड़क के मुद्दे पर राजनीति होती है लेकिन विकास कार्य करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। सड़कों में बड़े-बड़े गढ्ढे बने हैं जिनमें मलबा डाल कर काम पूरा समझ लिया जाता है। इन गढ्ढों के कारण हादसों की संख्या बढ़ती जा रही है। शहर की कुछ सड़कें तो ऐसी हैं जहां एक दशक से अधिक समय से रिपेयर का काम नहीं हुआ है। याचिका में जर्जर हालत में मौजूद सड़कों की फोटो भी पेश की गई। हाईकोर्ट से अपील की गई कि तुरंत सड़कों की रिपेयर के लिए आदेश जारी किया जाए।
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याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट मुकुल गोयल ने बताया कि स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल चंडीगढ़ की सड़कें बदहाल हालत में हैं। मानसून सीजन में हुई बरसात ने हालात को बदतर बना दिया है। वी 3 सेक्टर डिवाइडिंग रोड को लेकर नगर निगम और प्रशासन जिम्मेदारी को एक दूसरे पर डाल रहे हैं।
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नगर निगम के सर्वे के अनुसार शहर में 180 किलोमीटर सड़कों को तुरंत रिपेयर की जरूरत है। नगर निगम फंड की कमी का हवाला देकर अपने हाथ पीछे खींच लेता है। सड़क के मुद्दे पर राजनीति होती है लेकिन विकास कार्य करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। सड़कों में बड़े-बड़े गढ्ढे बने हैं जिनमें मलबा डाल कर काम पूरा समझ लिया जाता है। इन गढ्ढों के कारण हादसों की संख्या बढ़ती जा रही है। शहर की कुछ सड़कें तो ऐसी हैं जहां एक दशक से अधिक समय से रिपेयर का काम नहीं हुआ है। याचिका में जर्जर हालत में मौजूद सड़कों की फोटो भी पेश की गई। हाईकोर्ट से अपील की गई कि तुरंत सड़कों की रिपेयर के लिए आदेश जारी किया जाए।
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