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रोती रही बीमार महिला, पर सैम्पल नहीं लिया
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 12 Apr 2014 02:32 PM IST
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नंगल की विमला की तबीयत पिछले कई दिनों से खराब चल रही थी। वे ओपीडी में दिखाने आईं। प्रारंभिक जांच के बाद डॉक्टर ने रिसर्च ब्लॉक बी के कमरा नंबर 3029 सैंपल देने के लिए भेज दिया।
जब विमला अपने पति के साथ वहां पर पहुंची तो लंबी लाइन लगी थी। उनके पति ने काउंटर पर आग्रह किया कि उन्हें इमरजेंसी है और पत्नी की तबीयत लगातार बिगड़ रही है।
इस पर सैंपल ले रहे कर्मचारियों ने जवाब दिया कि चाहे कुछ भी हो, सैंपल लेने के लिए लाइन में लगना होगा। मायूस होकर विमला वापस लौट आईं। दर्द से परेशान वह जमीन पर बैठ गईं और रोने लगीं। लोगों ने भी मिन्नतें कीं लेकिन कर्मचारी नहीं माने।
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बाद में अमर उजाला के संवाददाता और फोटोग्राफर ने उनसे आग्रह किया तो उनके सुर बदल गए और जवाब दिया कि जब भी कोई इमरजेंसी आती है तो वे सैंपल ले लेते हैं। इसके बाद उन्होंने विमला के थायराइड के सैंपल ले लिए।
खिड़की में हाथ डालकर देने पड़ते हैं सैंपल
रिसर्च ब्लॉक बी में स्थित इंडोक्रिनोलॉजी लैब की अजीबोगरीब स्थिति है। यहां पर सैंपल देने वालों के लिए बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है। मरीजों को खड़े रहकर खिड़की में हाथ डालना होगा और अंदर कर्मचारी अपनी सीट पर बैठा-बैठा मरीज का ब्लड आदि निकाल कर सैंपल लेता है।
भीड़ इतनी होती है कि मरीजों को सैंपल देने के लिए कम से कम डेढ़ से दो घंटे का वक्त लगता है। गर्मी शुरू हो चुकी है। मरीज पसीने से लथपथ हो रहे थे। पंखे आदि का कोई इंतजाम नहीं है। आगे जब गरमी बढ़ेगी तो दिक्कते और बढ़ सकती हैं।
रिपोर्ट हुई गुम, दोबारा से करवाना पड़ा टेस्ट
लैब में इतनी ज्यादा अराजकता है कि कई बार मरीजों की रिपोर्ट खो जाती हैं। होशियारपुर से आई एक महिला मरीज ने बताया कि वे दोबारा सैंपल रिपोर्ट लेने के लिए लाइन पर खड़ी हुई हैं। बीस दिन पहले उन्होंने टेस्ट कराया था, जब रिपोर्ट लेने आईं तो मना कर दिया गया कि आपकी रिपोर्ट नहीं है।
मैं अपने भांजे का सैंपल देने आया हूं। पिछले एक घंटे से खड़ा हूं लेकिन लाइन एक इंच भी आगे नहीं बढ़ रही है। कोई भी मैनेजमेंट नहीं है। लोग परेशान हो रहे हैं। कोई सुध लेने वाला नहीं है।
सचिंद्रा, निवासी चंडीगढ़
सैंपल के लिए लाइन इतनी लंबी है। एक काउंटर बनाया गया है। काउंटर का कर्मचारी भी बीच-बीच में उठकर चला जाता है। मरीजों को काफी परेशानी आ रही है।
दिलप्रीत कौर, मोहाली
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जब विमला अपने पति के साथ वहां पर पहुंची तो लंबी लाइन लगी थी। उनके पति ने काउंटर पर आग्रह किया कि उन्हें इमरजेंसी है और पत्नी की तबीयत लगातार बिगड़ रही है।
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इस पर सैंपल ले रहे कर्मचारियों ने जवाब दिया कि चाहे कुछ भी हो, सैंपल लेने के लिए लाइन में लगना होगा। मायूस होकर विमला वापस लौट आईं। दर्द से परेशान वह जमीन पर बैठ गईं और रोने लगीं। लोगों ने भी मिन्नतें कीं लेकिन कर्मचारी नहीं माने।
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बाद में अमर उजाला के संवाददाता और फोटोग्राफर ने उनसे आग्रह किया तो उनके सुर बदल गए और जवाब दिया कि जब भी कोई इमरजेंसी आती है तो वे सैंपल ले लेते हैं। इसके बाद उन्होंने विमला के थायराइड के सैंपल ले लिए।
खिड़की में हाथ डालकर देने पड़ते हैं सैंपल
रिसर्च ब्लॉक बी में स्थित इंडोक्रिनोलॉजी लैब की अजीबोगरीब स्थिति है। यहां पर सैंपल देने वालों के लिए बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है। मरीजों को खड़े रहकर खिड़की में हाथ डालना होगा और अंदर कर्मचारी अपनी सीट पर बैठा-बैठा मरीज का ब्लड आदि निकाल कर सैंपल लेता है।
भीड़ इतनी होती है कि मरीजों को सैंपल देने के लिए कम से कम डेढ़ से दो घंटे का वक्त लगता है। गर्मी शुरू हो चुकी है। मरीज पसीने से लथपथ हो रहे थे। पंखे आदि का कोई इंतजाम नहीं है। आगे जब गरमी बढ़ेगी तो दिक्कते और बढ़ सकती हैं।
रिपोर्ट हुई गुम, दोबारा से करवाना पड़ा टेस्ट
लैब में इतनी ज्यादा अराजकता है कि कई बार मरीजों की रिपोर्ट खो जाती हैं। होशियारपुर से आई एक महिला मरीज ने बताया कि वे दोबारा सैंपल रिपोर्ट लेने के लिए लाइन पर खड़ी हुई हैं। बीस दिन पहले उन्होंने टेस्ट कराया था, जब रिपोर्ट लेने आईं तो मना कर दिया गया कि आपकी रिपोर्ट नहीं है।
मैं अपने भांजे का सैंपल देने आया हूं। पिछले एक घंटे से खड़ा हूं लेकिन लाइन एक इंच भी आगे नहीं बढ़ रही है। कोई भी मैनेजमेंट नहीं है। लोग परेशान हो रहे हैं। कोई सुध लेने वाला नहीं है।
सचिंद्रा, निवासी चंडीगढ़
सैंपल के लिए लाइन इतनी लंबी है। एक काउंटर बनाया गया है। काउंटर का कर्मचारी भी बीच-बीच में उठकर चला जाता है। मरीजों को काफी परेशानी आ रही है।
दिलप्रीत कौर, मोहाली