फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   bad condition of PGI's park

ऐसे हैं पीजीआई के पार्क, जहां मर्जी कुछ भी फेंको

Tue, 17 Dec 2013 06:37 PM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 17 Dec 2013 06:37 PM IST
विज्ञापन
bad condition of PGI's park

पीजीआई के रेजिडेंशियल एरिया में बना पार्क यहां के लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है।

विज्ञापन


गुरुद्वारे और हंसराज सराय में रहने वाले मरीज सुबह से ही पार्क में अपना बसेरा बना लेते हैं।

सोसाइटी के लोगों का आरोप है कि पार्क में मरीज अपना यूरीन बैग खाली करते, जख्म की पट्टियां फेंक देते, थूक और बलगम से भरे रूमाल आदि भी पार्क में फेंक देते हैं।

इन सबके बावजूद पार्क की कोई साफ-सफाई नहीं होती। इससे इंफेक्शन फैलने का डर है। डर के कारण ही सोसाइटी के लोग पार्क में आना नहीं चाहते।

पीजीआई रेजिडेंशियल कांप्लेक्स वेलफेयर सोसाइटी का कहना है कि सभी मरीजों की गुरुद्वारे में रुकने की व्यवस्था होती है, लेकिन वे अपने स्ट्रेचर के साथ पार्क में पहुंच जाते।
विज्ञापन


इस मुद्दे के बारे में कई दफा पीजीआई एडमिनिस्ट्रेशन को लेटर लिखा, लेकिन इसके बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया।

मरीजों की वजह से पार्क में उनके बच्चे व परिजन नहीं जा पाते। सोसाइटी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि इस बारे में यदि जल्द ही कोई निर्णय नहीं लिया गया तो कड़ा कदम उठाया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


करीब साढ़े 12 लाख से निर्माण हुआ था
गुरुद्वारे के पीछे बना पार्क साल 2009 में सोसाइटी के लोगों के लिए बनकर तैयार हुआ था।

सोसाइटी के लगातार जोर देने पर पूर्व केंद्रीय मंत्री व सांसद पवन कुमार बंसल ने अपने एमपी लोकल एरिया डेवलपमेंट फंड से सहायता राशि देकर पार्क का निर्माण किया था।

इससे यहां के लेागों को काफी फायदा पहुंचा। एक साल तक तो सब कुछ ठीक रहा, लेकिन उसके बाद यहां के हालात बदलने लगे। सभी स्ट्रीट लाइट के पोल जर्जर हो चुके हैं। लाइटें टूट चुकी है। चहारदीवार भी जर्जर हो चुकी हैं।

माली और सिक्योरिटी गार्ड की मांग की थी
एसोसिएशन के प्रधान सुभाष चंद और जनरल सेक्रेटरी बालकृष्णन ने बताया कि सोसाइटी ने पार्क की देखभाल के लिए एडमिनिस्ट्रेशन से एक गार्ड और माली की मांग की थी।

यह मांग साल 2010 से जारी है। आज साल 2013 खत्म होने को है, लेकिन अब तक  इस दिशा की ओर कोई कदम नहीं उठाया गया। पीजीआई डायरेक्टर प्रोफेसर वाईके चावला ने भी जब पीजीआई का दौरा किया था तो उस दौरान इस मुद्दे को उठाया था।

इसके बाद भी इंजीनियरिंग विंग ने कोई ध्यान नहीं दिया। अभी हाल ही में फिर से सोसाइटी ने मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को पत्र लिखकर डस्टबिन रखवाने और दीवार बनाने की मांग की है।


पीजीआई की प्रवक्ता मंजू वडवालकर ने बताया कि पार्क की मेंटेनेंस के लिए इंजीनियरिंग विंग काम करता रहता है। पार्क में आने वाले मरीजों को रोक पाना संभव नहीं है, लेकिन उन्हें गंदगी न फैलाने के बारे में जागरूक जरूर किया जा सकता है। इस बारे में जरूर प्रयास किए जा सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed