फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   ayushman khurana movie dum laga ke haisha review

दम लगा के हईशा: चंडीगढ़ दे मुंडे दा बेहतरीन कमबैक

Sun, 01 Mar 2015 02:59 PM IST
विजय जैन/अमर उजाला, चंडीगढ़
विजय जैन/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 01 Mar 2015 02:59 PM IST
विज्ञापन
ayushman khurana movie dum laga ke haisha review

चंडीगढ़ दे मुंडे आयुष्मान खुराना को शादी के बाद पत्नी से इतने थप्पड़ पड़ेंगे उन्होंने सोचा भी नहीं होगा। दिमाग पर ज्यादा जोर नहीं डालें क्योंकि आयुष्मान की रील लाइफ पत्नी ने यह कारनामा किया है। हुआ यूं कि यशराज की फिल्म ‘दम लगा के हईशा’ में आयुष्मान की पत्नी बनी भूमि पेडनेकर ने ये सीन फिल्माया। 6-7 रिटेक के बाद ये सीन फाइनल हुआ था। अब बात करते हैं फिल्में की।

विज्ञापन


विकी डोनर के बाद आयुष्मान की दोनों फिल्में नौटंकी साला और हवाईजादा नाकाम रही। अब आयुष्मान खुराना ने ‘दम लगा के हईशा’ में प्रेम के किरदार में बेहतरीन कमबैक किया है। निखट्टू, निरुद्देश्य तथा पिता से डरने वाले किरदार को आयुष्मान ने विश्वसनीय बनाया। यूपी का किरदार होने के बावजूद कुछ सीन्स में वह पंजाबी युवक जैसे लगे हैं।
विज्ञापन


फ़िल्म ‘दम लगाके हईशा’ में एक मोटी लड़की को पति का प्यार हासिल करने की जद्दोजेहद, एक युवा लड़के को मोटी पत्नी के साथ दोस्तों के बीच या बाजार में साथ लेकर चलने की कशमकश, एक परिवार को जोड़े रखने की कोशिश को बहुत ही अच्छे से परदे पर पेश किया गया है। फ़िल्म देखते समय एक छोटा शहर, वहां की भाषा, वहां की उलझनें, वहां की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी परदे पर एक दम रियल लगती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रेम के पिता की भूमिका में संजय शर्मा ने जान डाली है मगर मुझे चौंका दिया मोटी लड़की संध्या का किरदार निभाने वाली भूमि पेडणेकर ने क्योंकि भूमि न सिर्फ अच्छी लगी हैं इस किरदार में बल्कि उन्होंने इसमें जान डाली है। इसके लिए तारीफ करनी होगी यश राज की, कि उन्होंने परिणीति चोपड़ा के बाद एक बार फिर अपने प्रॉडक्शन हाउस की एक और मेम्बर को ऐक्ट्रेस बना दिया।

फिल्म में लीड किरदार करने वाली भूमि पेढनेकर लंबे अर्से से इसी बैनर के साथ बतौर कास्टिंग डायरेक्टर जुड़ी हुई हैं। कहानी 1995 की है। जब कुमार सानू के गाने गली-गली गूंजते थे। ऑडियो कैसेट्स का प्रचलन था। लोग कैसेट्स खरीदने के बजाय अपने पसंदीदा गाने रिकॉर्ड करवाते थे।

वीसीआर पर फिल्में देखी जाती थीं। इस माहौल को निर्देशक और लेखक शरत कटारिया ने बेहतरीन तरीके से पेश किया है। छोटे-छोटे डिटेल्स का ध्यान रखा है। संवादों में भी उस दौर के झलक मिलती है। कहानी है हरिद्वार के एक लड़के प्रेम की जो अंग्रेजी की वजह से पढ़ाई में फ़ेल है। पिता की ऑडियो कैसेट की दूकान में गाने ट्रान्सफर करता रहता है इसलिए वो कुमार शानू का बड़ा फैन है।

उसके माता-पिता एक टीचर की पढ़ाई पढ़ रही संध्या से उसकी शादी कर देते हैं ताकि बहु को टीचर की नौकरी मिलने के बाद घर के हालात सुधर जाएं लेकिन लड़की मोटी है इसलिए प्रेम अपनी पत्नी से प्यार नहीं करता। एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार की जीवनशैली का भी बारीकी से चित्रण किया गया है। घर के कमरे कुछ इस तरह के होते थे कि दूसरे कमरे में क्या हुआ है ये बाहर वाले जान लेते हैं।


इसकी मिसाल एक सीन में मिलती है जब प्रेम और संध्या के कमरे से आती आवाज सुन कर प्रेम की मां कहती है कि उनका बेटा सयाना हो गया है। फिल्म में इस तरह के कई बेहतरीन दृश्य हैं। लाइब्रेरी में जाकर दबी आवाज में संध्या और प्रेम का विवाद करना तथा ऑडियो कैसेट्स बदल-बदल कर गानों के जरिये लड़ने वाले सीन मनोरंजक हैं। सीधी सादी औ हल्की फुल्की, वहीं हिंदुस्तान में छोटे शहरों की जिंदगी की दर्शाती, ‘दम लगा के हईशा’ एक चार्मिंग फिल्म है जिसे आपको मिस नहीं करना चाहिए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed